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न्यायपालिका में बड़े प्रशासनिक बदलाव की तैयारी: सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 4 उच्च न्यायालयों में नए मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति की सिफारिश की

राघवेन्द्र प्रताप सिंह नई दिल्ली

भारत की न्यायपालिका में रिक्त पदों को भरने और न्यायिक व्यवस्था को अधिक सुचारू व पारदर्शी बनाने की दिशा में एक बड़ा और अहम कदम उठाया गया है। भारत के सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India) के कॉलेजियम ने देश के 4 प्रमुख उच्च न्यायालयों (High Courts) में नए मुख्य न्यायाधीशों (Chief Justices) की नियुक्ति के लिए अपनी औपचारिक सिफारिशें केंद्र सरकार को भेज दी हैं। 31 अगस्त 2026 को सामने आई इस ताज़ा रिपोर्ट के बाद अब गेंद पूरी तरह से केंद्र सरकार के पाले में है, जिसे इन सिफारिशों पर अंतिम मुहर लगानी है।

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम, जिसका नेतृत्व भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) करते हैं और जिसमें सर्वोच्च न्यायालय के अन्य वरिष्ठतम न्यायाधीश शामिल होते हैं, देश की उच्च न्यायपालिका में नियुक्तियों और तबादलों के लिए सर्वोच्च निर्णायक संस्था है। चार अलग-अलग राज्यों के उच्च न्यायालयों में मुख्य न्यायाधीशों के पद रिक्त होने या वर्तमान मुख्य न्यायाधीशों के सेवानिवृत्त होने की स्थिति को देखते हुए, कॉलेजियम ने गहन विचार-विमर्श और वरिष्ठता, योग्यता व अखंडता के कड़े मापदंडों का मूल्यांकन करने के बाद ये सिफारिशें की हैं।

किसी भी राज्य के उच्च न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। मुख्य न्यायाधीश न केवल उस राज्य की न्यायपालिका का प्रशासनिक प्रमुख होता है, बल्कि वह मुकदमों के आवंटन (रोस्टर तैयार करने), त्वरित सुनवाई सुनिश्चित करने और राज्य के भीतर निचली अदालतों (Subordinate Courts) के कामकाज की निगरानी करने के लिए भी ज़िम्मेदार होता है। जब किसी उच्च न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश का पद लंबे समय तक रिक्त रहता है या कार्यकारी (Acting) मुख्य न्यायाधीश के भरोसे चलता है, तो इससे प्रशासनिक फैसले लेने में देरी होती है और अंततः इसका असर मुकदमों के निपटारे की गति पर पड़ता है।

वर्तमान में भारतीय न्यायपालिका के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती मुकदमों का भारी बैकलॉग (लंबित मामले) है। देश के विभिन्न उच्च न्यायालयों में लाखों मामले सालों से लंबित पड़े हैं। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम का यह कदम न्यायिक रिक्तियों को भरने की दिशा में एक अत्यंत सकारात्मक पहल है। कानूनी जानकारों का मानना है कि पूर्णकालिक मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति से इन चार उच्च न्यायालयों के प्रशासनिक कामकाज में तेज़ी आएगी और मुकदमों के त्वरित निपटारे के लिए नई पीठों (Benches) के गठन में भी सहूलियत होगी।

अब सभी की निगाहें केंद्रीय कानून मंत्रालय पर टिकी हैं। कॉलेजियम की सिफारिशों के बाद, सरकार खुफिया ब्यूरो (IB) की पृष्ठभूमि रिपोर्ट के आधार पर इन नामों की समीक्षा करती है और फिर राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद नियुक्ति का आधिकारिक वारंट जारी किया जाता है। हाल के वर्षों में कॉलेजियम द्वारा भेजे गए नामों को मंज़ूरी देने में सरकार द्वारा लगाए गए समय को लेकर अक्सर न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच एक मूक वैचारिक टकराव देखने को मिला है। हालांकि, न्याय प्रणाली की गरिमा और आम जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए यह अत्यंत आवश्यक है कि इन चार उच्च न्यायालयों को बिना किसी अनावश्यक देरी के उनके नए मुख्य न्यायाधीश मिल जाएं। यह कदम भारतीय लोकतंत्र के तीसरे और सबसे अहम स्तंभ को मज़बूती प्रदान करेगा।