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यूपीआई (UPI) की एक दशक की शानदार यात्रा: 314 लाख करोड़ के लेनदेन के पीछे काम करने वाली उन्नत तकनीक और इसका वैश्विक विस्तार

विवेक ओझा
नई दिल्ली

भारत ने पिछले एक दशक में वित्तीय प्रौद्योगिकी (Fintech) के क्षेत्र में जो क्रांति की है, उसका सबसे चमकता हुआ सितारा ‘यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस’ यानी यूपीआई (UPI) है। आज सब्जी वाले से लेकर बड़े शॉपिंग मॉल्स तक, यूपीआई हर भारतीय की रोज़मर्रा की ज़िंदगी का एक अभिन्न अंग बन चुका है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जब आप अपने फोन की स्क्रीन पर भुगतान का बटन दबाते हैं, तो पर्दे के पीछे क्या होता है (What goes on behind the screen when you pay through UPI?)? यह एक ऐसी उन्नत प्रणाली है जिसने भारत को डिजिटल भुगतान के मामले में दुनिया का सिरमौर बना दिया है।

यूपीआई की कार्यप्रणाली बेहद तेज़, सुरक्षित और जटिल तकनीकी वास्तुकला पर आधारित है। सरल शब्दों में समझें तो, यूपीआई नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (National Payments Corporation of India – NPCI) द्वारा संचालित एक प्रणाली के माध्यम से यूज़र्स के ऐप्स और बैंकों को जोड़कर तत्काल बैंक-टू-बैंक भुगतान (instant bank-to-bank payments) को सक्षम बनाता है। जब आप किसी PhonePe या अन्य ऐप के क्यूआर कोड (जैसे तस्वीरों में दिखाई देने वाले परिधान विक्रेता के पास रखे PhonePe स्कैनर) को स्कैन करते हैं, तो NPCI का स्विच सेकंड के कुछ हिस्सों में आपके बैंक और प्राप्तकर्ता के बैंक के बीच सुरक्षित संचार स्थापित करता है और धन का तत्काल हस्तांतरण सुनिश्चित करता है।

साल 2016 में लॉन्च (launched in 2016) होने के बाद से, यूपीआई ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा है। एक दशक के भीतर यह एक विशाल डिजिटल भुगतान नेटवर्क (massive digital payments network) के रूप में विकसित हो गया है। इसके आकार और अर्थव्यवस्था पर इसके प्रभाव का अंदाज़ा इसके नवीनतम आंकड़ों से लगाया जा सकता है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान, यूपीआई ने अविश्वसनीय रूप से 24,160 करोड़ लेनदेन (24,160 crore transactions) को संभाला है। इन लेनदेन का कुल मूल्य ₹314 लाख करोड़ (₹314 lakh crore) आंका गया है, जो भारत की अर्थव्यवस्था की विशालता और उसमें डिजिटल प्रणाली की गहरी पैठ को दर्शाता है।

मात्रा (volume) के हिसाब से देखा जाए तो, यूपीआई अब देश के कुल डिजिटल भुगतान लेनदेन का 85% (accounting for 85% of the country’s digital payment transactions by volume) हिस्सा बन चुका है। इसकी बढ़ती लोकप्रियता का प्रमाण यह है कि केवल मई 2026 के एक अकेले महीने में ही इस प्रणाली ने 2,366 करोड़ लेनदेन (processed 2,366 crore transactions) सफलतापूर्वक पूरे किए हैं। यह आंकड़ा दुनिया के किसी भी अन्य भुगतान प्लेटफॉर्म के लिए अकल्पनीय है।

भारत की इस अभूतपूर्व तकनीकी सफलता ने अब वैश्विक स्तर पर भी अपनी चमक बिखेरनी शुरू कर दी है। जो प्रणाली कभी केवल भारत के लिए डिज़ाइन की गई थी, अब उसे कई देशों में अपनाया जा रहा है (now being adopted in several countries)। यूपीआई की यह यात्रा यह साबित करती है कि यदि स्वदेशी तकनीक को सही विज़न और सुरक्षित अवसंरचना के साथ ज़मीन पर उतारा जाए, तो वह न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था में क्रांति ला सकती है, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक आदर्श मॉडल भी बन सकती है।