Trending

72 साल, एक कल्ट गाना और शिक्षक दिवस का जश्न! ‘आओ बच्चों तुम्हें दिखाएं…’ के बिना आखिर क्यों अधूरा है 5 सितंबर?

विवेक ओझा
नई दिल्ली:
आज 5 सितंबर है, यानी शिक्षक दिवस (Teachers’ Day)! देशभर के स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों के सम्मान में भव्य कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। लेकिन क्या आपने कभी इस बात पर गौर किया है कि इन कार्यक्रमों की रौनक एक खास गाने के बिना हमेशा अधूरी रहती है? जी हां, हम बात कर रहे हैं उसी सदाबहार और कल्ट गाने की— ‘आओ बच्चों तुम्हें दिखाएं झांकी हिंदुस्तान की…।’ बीते 72 सालों से यह गाना भारत के हर स्कूल की शान बना हुआ है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर इस ‘एजुकेशनल एंथम’ (Educational Anthem) में ऐसा क्या अनोखा जादू है, जो आज भी इसे शिक्षक दिवस की पहली पसंद बनाए हुए है?

1954 से लेकर आज तक हर स्कूल की धड़कन! आखिर किसने रचा था ये ऐतिहासिक गीत?
यह गाना सिर्फ एक धुन नहीं, बल्कि भारतीय शिक्षा, इतिहास और देशभक्ति का एक ऐसा अमर दस्तावेज है जिसने कई पीढ़ियों के रगों में जोश भरा है। यह कल्ट गीत साल 1954 में रिलीज हुई मशहूर फिल्म ‘जागृति’ (Jagriti) का है। इसे देश के महान गीतकार कवि प्रदीप (Kavi Pradeep) ने अपनी जादुई कलम से लिखा था और अपनी ही दमदार आवाज में गाया भी था। दिग्गज संगीतकार हेमंत कुमार के संगीत ने इस गाने में ऐसी जान फूंकी कि यह रातों-रात पूरे देश के स्कूलों का ‘अनऑफिशियल एंथम’ बन गया।

देशभक्ति और शिक्षा का ऐसा अनूठा संगम, जिसे सुनकर आज भी खड़े हो जाते हैं रोंगटे!
शिक्षक दिवस के मौके पर इस गाने को विशेष रूप से बजाने की सबसे बड़ी वजह इसके गहरे बोल हैं। यह गाना एक शिक्षक और छात्रों के बीच के पवित्र रिश्ते और देश के गौरवशाली इतिहास को बेहद शानदार तरीके से पेश करता है:

  • इतिहास की सजीव झांकी: इस गीत के जरिए छात्रों को भारत के महान शहीदों, शूरवीरों और देश के अलग-अलग हिस्सों की सांस्कृतिक विरासत की सैर कराई जाती है।
  • आदर्श शिक्षक की भूमिका: यह गाना एक शिक्षक की उस अहम भूमिका को सलाम करता है, जो बच्चों को सिर्फ किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रखता, बल्कि उनके अंदर देशप्रेम और राष्ट्र निर्माण की अलख भी जगाता है।

कवि प्रदीप की वो जादुई कलम, जिसने रच दिया इतिहास
कवि प्रदीप को यूं ही ‘राष्ट्रकवि’ का दर्जा नहीं मिला था। ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ जैसे रुला देने वाले गीत से लेकर ‘आओ बच्चों तुम्हें दिखाएं’ तक, उनकी कलम से निकले हर शब्द ने सीधे लोगों के दिलों पर राज किया। यह उनकी लेखनी की ही ताकत है कि आज सात दशक बाद भी स्कूलों में बच्चों की परफॉर्मेंस इसी गाने से शुरू होती है।

आज जब हम 2026 के आधुनिक शिक्षा और स्मार्ट क्लासरूम वाले दौर में जी रहे हैं, तब भी ‘आओ बच्चों तुम्हें दिखाएं…’ की प्रासंगिकता और मिठास रत्ती भर भी कम नहीं हुई है। यह गाना सिर्फ एक पुरानी धुन नहीं है, बल्कि हमारे उन तमाम शिक्षकों की अनथक मेहनत का सम्मान है, जो चुपचाप अपनी कक्षाओं में भारत का कल गढ़ने में लगे हुए हैं।