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पाकिस्तान में मची भारी खलबली! सिंधु जल संधि विवाद के बीच भारत का बड़ा ‘मास्टरस्ट्रोक’, लद्दाख में बिना सीमेंट के खड़ा कर दिया अनोखा बांध

विवेक ओझा
नई दिल्ली/लेह:
पाकिस्तान के साथ चल रहे सिंधु जल संधि (Indus Water Treaty) विवाद और इसके निलंबन की सुगबुगाहट के बीच भारत ने एक ऐसा कड़ा रणनीतिक कदम उठाया है, जिसने इस्लामाबाद की नींद उड़ा दी है। भारत ने लद्दाख के दुर्गम और रणनीतिक इलाके में सिंधु नदी के पानी को साधने के लिए एक बेहद अनोखा बांध तैयार कर लिया है। सबसे बड़ी हैरानी और इंजीनियरिंग का कमाल यह है कि इस पूरे बांध को बनाने में एक ग्राम भी सीमेंट या कंक्रीट का इस्तेमाल नहीं किया गया है। भारत के इस जल-प्रहार से सरहद पार भारी बेचैनी है!

10 फीट तक बढ़ा जलस्तर: आखिर क्या है बिना सीमेंट वाले इस ‘अजेय’ बांध का रहस्य?
लद्दाख की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में भारी-भरकम मशीनों और कंक्रीट से बांध बनाना हमेशा से एक बड़ी चुनौती रहा है। लेकिन भारतीय इंजीनियरों और स्थानीय प्रशासन ने इसका एक नायाब तोड़ निकाल लिया है:

  • पारंपरिक ‘स्टोन पिचिंग’ तकनीक: इस बांध को पूरी तरह से स्थानीय पत्थरों और पारंपरिक ‘स्टोन पिचिंग’ (Stone Pitching) तकनीक के सहारे खड़ा किया गया है।
  • इको-फ्रेंडली और मजबूत: बिना कंक्रीट के बना यह ढांचा पूरी तरह से इको-फ्रेंडली (Eco-friendly) है और लद्दाख के खतरनाक मौसम को आसानी से झेल सकता है।
  • पानी का बंपर स्टोरेज: इस पत्थरों वाले बांध के बनकर तैयार होते ही सिंधु नदी का जलस्तर करीब 10 फीट तक बढ़ गया है, जो एक बहुत बड़ी कामयाबी है।

एक तीर से दो निशाने: लद्दाख की प्यास बुझी, पाकिस्तान को मिला अल्टीमेटम!
इस बांध के निर्माण के पीछे भारत की एक बहुत बड़ी और गहरी कूटनीतिक रणनीति छिपी है।

  1. लद्दाख का कायाकल्प: जलस्तर बढ़ने से आसपास के गांवों, किसानों और स्थानीय आबादी के लिए पीने व सिंचाई के पानी की भारी किल्लत दूर हो जाएगी। यह लद्दाख के विकास में एक मील का पत्थर है।
  2. पाकिस्तान को कड़ा संदेश: सिंधु जल संधि पर पाकिस्तान की लगातार अड़ंगेबाजी और विवादों के बीच, भारत ने ग्राउंड जीरो पर यह काम करके साफ कर दिया है कि वह अपने हिस्से के पानी की एक-एक बूंद का इस्तेमाल करेगा। अब भारत अपने पानी को यूं ही बहकर पाकिस्तान नहीं जाने देगा।

लद्दाख में तैयार हुआ पत्थरों का यह बांध केवल पानी रोकने की दीवार नहीं है, बल्कि यह भारत की नई और आक्रामक ‘जल कूटनीति’ (Water Diplomacy) का जीता-जागता सबूत है। इस कदम ने साबित कर दिया है कि भारत अब अंतरराष्ट्रीय संधियों की आड़ में अपने हितों से कोई समझौता नहीं करेगा।