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मंगलुरु रेलवे क्षेत्र संक्रमण: इस सप्ताह होगी मैसूर और पलक्कड़ मंडलों की अहम बैठक

राघवेन्द्र प्रताप सिंह
मंगलुरु

भारतीय रेलवे के प्रशासनिक और परिचालन ढांचे में एक बड़े बदलाव की प्रक्रिया तेज़ हो गई है। मंगलुरु रेलवे क्षेत्र के लंबे समय से लंबित संक्रमण (transition) को लेकर अब ज़मीनी स्तर पर अहम कदम उठाए जा रहे हैं। इस प्रशासनिक संक्रमण को सुचारू रूप से लागू करने के लिए मैसूर और पलक्कड़ मंडलों (Mysuru and Palakkad Divisions) के बीच इस सप्ताह एक बहुत ही महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है। यह बैठक इस बात का संकेत है कि मंगलुरु रेलवे नेटवर्क को लेकर वर्षों से चल रही प्रशासनिक जटिलताओं को अब अंतिम रूप से सुलझाया जा रहा है।

इस उच्च-स्तरीय प्रशासनिक बैठक में रेलवे के कई वरिष्ठ अधिकारी हिस्सा लेंगे। जानकारी के अनुसार, मंगलुरु में होने वाली इस बैठक में मंडल प्रमुखों (Divisional heads) और मंडल अधिकारियों (divisional officers) की उपस्थिति रहेगी। यह बैठक केवल एक औपचारिक शिष्टाचार भेंट नहीं है, बल्कि इसमें रेलवे के संसाधनों और कामकाज से जुड़े कई तकनीकी और जटिल मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श किया जाएगा। इस बैठक के मुख्य एजेंडे में संपत्तियों के हस्तांतरण (transfer of assets) और परिचालन जिम्मेदारियों (operational responsibilities) व अन्य संबंधित मामलों (and the like) पर चर्चा करना शामिल है।

मंगलुरु रेलवे स्टेशन का ढांचागत महत्व पूरे दक्षिणी रेलवे नेटवर्क के लिए अत्यंत विशाल है। मंगलुरु सेंट्रल (Mangaluru Central) पलक्कड़ के प्रमुख कोचिंग डिपो (major coaching depot) को अपने भीतर समाहित किए हुए है। इस कोचिंग डिपो का कार्यभार और यहाँ की परिचालन क्षमता रेलवे की दक्षता का एक बड़ा उदाहरण है। आंकड़ों के अनुसार, इस डिपो में कोचिंग की लगभग 17 जोड़ियों (17 pairs of coaching) का रखरखाव किया जाता है, जिनमें यात्री (passenger) के साथ-साथ एक्सप्रेस (express) ट्रेनें भी शामिल हैं।

इस विशाल डिपो की तकनीकी क्षमता का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहाँ लगभग 450 कोच (about 450 coaches) प्राथमिक रखरखाव (primary maintenance) की प्रक्रिया से गुज़रते हैं। इन सैकड़ों कोचों के सुचारू रखरखाव और मरम्मत के लिए डिपो में उन्नत बुनियादी ढांचा मौजूद है, जिसमें तीन पिट लाइनें (three pit lines) और एक सिक लाइन (one sick line) शामिल हैं। इतने विशाल इंफ्रास्ट्रक्चर और संपत्तियों का एक मंडल से दूसरे मंडल में हस्तांतरण कोई आसान कार्य नहीं है; इसके लिए मैसूर और पलक्कड़ डिवीजनों के अधिकारियों को एक बेहद पारदर्शी और तकनीकी रूप से सटीक रोडमैप तैयार करना होगा।