इजरायल का बड़ा दावा: लेबनान के प्रमुख रिज के नीचे सुरंगों से हिजबुल्लाह लड़ाकों का किया सफाया

विवेक ओझा
यरुशलम / मंसूरी
मध्य पूर्व में चल रहे सैन्य संघर्ष और क्षेत्रीय तनाव के बीच इजरायल ने अपने उत्तरी मोर्चे पर एक बड़ी रणनीतिक सफलता का दावा किया है। दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ चल रहे अपने सैन्य अभियानों के तहत, इजरायल ने कहा है कि उसने लेबनान के एक प्रमुख रिज (Lebanon ridge) के नीचे स्थित सुरंगों (tunnels) से हिजबुल्लाह लड़ाकों को पूरी तरह से साफ कर दिया है। यह अभियान सीमावर्ती क्षेत्रों में इजरायल की सुरक्षा चिंताओं को दूर करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
हिजबुल्लाह की सुरंग नेटवर्क हमेशा से इजरायली रक्षा बलों (IDF) के लिए एक गंभीर चुनौती रही है। इन भूमिगत सुरंगों का उपयोग लड़ाकों की घुसपैठ और हथियारों के भंडारण के लिए किया जाता रहा है। इस रिज को हिजबुल्लाह के नियंत्रण से मुक्त कराने का दावा इजरायल की आक्रामक सैन्य रणनीति का हिस्सा है।
इस सैन्य अभियान के साथ-साथ सीमा पर एक महत्वपूर्ण मानवीय और कूटनीतिक गतिविधि भी देखने को मिली। शुक्रवार (Friday) को, इजरायली अधिकारियों ने इजरायल में हिरासत में लिए गए चार लोगों को लेबनानी अधिकारियों को सौंप दिया। कैदियों का यह स्थानांतरण सीधे तौर पर दोनों देशों की सेनाओं के बीच नहीं, बल्कि इंटरनेशनल कमेटी ऑफ द रेड क्रॉस (International Committee of the Red Cross) के माध्यम से किया गया।
शुक्रवार, 4 सितंबर, 2026 को रेड क्रॉस के काफिले (Red Cross convoy) ने इजरायली जेलों में बंद रहे इन चार रिहा किए गए कैदियों को एस्कॉर्ट किया। रेड क्रॉस का यह काफिला कैदियों को लेकर लेबनान के दक्षिणी गांव मंसूरी (Mansouri) पहुंचा।
रेड क्रॉस जैसी अंतरराष्ट्रीय तटस्थ संस्थाओं का इस तरह के कैदी हस्तांतरण में शामिल होना युद्धग्रस्त क्षेत्रों में मानवीय संवाद बनाए रखने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इजरायल द्वारा एक तरफ सैन्य शक्ति का प्रयोग कर सुरंगों को नष्ट करना और दूसरी तरफ कैदियों को रिहा करना, दोनों देशों के बीच चल रहे इस जटिल संघर्ष की बहुआयामी प्रकृति को दर्शाता है। हालांकि इस रिहाई से कुछ परिवारों को राहत मिली होगी, लेकिन लेबनान सीमा पर तनाव अभी भी चरम पर है।