पेरिस में एफिल टॉवर के पास हिंदू प्रतिनिधिमंडल के दौरे पर विवाद: महिलाओं को हटाने के दावों की जांच शुरू

अभिषेक सिंह
पेरिस / नई दिल्ली
यूरोप के प्रमुख सांस्कृतिक केंद्रों में से एक, फ्रांस की राजधानी पेरिस से एक बेहद संवेदनशील और सांस्कृतिक विवाद का मामला सामने आया है। पेरिस का प्रशासन वर्तमान में एक ऐसे दावे की गहन जांच कर रहा है, जिसमें यह आरोप लगाया गया है कि एक हिंदू प्रतिनिधिमंडल के दौरे के दौरान महिलाओं को कार्यक्रम स्थल से हटा दिया गया था। यह मामला तब तूल पकड़ने लगा जब एफिल टॉवर के पास आयोजित एक धार्मिक समारोह के दौरान स्थानीय कार्यकर्ताओं और प्रबंधन ने महिलाओं को अलग-थलग करने के आरोप लगाए। फ्रांस जैसे धर्मनिरपेक्ष देश में लैंगिक समानता को लेकर कड़े कानून हैं, जिसके कारण इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया और स्थानीय प्रशासन का ध्यान अपनी ओर आकृष्ट किया है।
इस विवाद के केंद्र में बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था (BAPS) है, जिसके भिक्षुओं (monks) का एक प्रतिनिधिमंडल पेरिस के ऐतिहासिक दौरे पर था। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, 3 सितंबर 2026 को पेरिस की प्रसिद्ध सीन नदी (river Seine) पर एक औपचारिक नदी परेड (ceremonial river parade) का आयोजन किया गया था। इस भव्य नदी परेड से ठीक पहले, BAPS के हिंदू भिक्षुओं ने एफिल टॉवर के सामने एक धार्मिक समारोह (religious ceremony) में भाग लिया था। इसी समारोह के दौरान यह विवाद उत्पन्न हुआ कि आयोजकों ने महिलाओं की उपस्थिति को लेकर कुछ अनुचित शर्तें रखी थीं।
आरोपों की गंभीरता को देखते हुए, पेरिस के संबंधित प्रशासन और जांच एजेंसियों ने इस बात की पड़ताल शुरू कर दी है कि क्या वास्तव में किसी हिंदू धार्मिक समूह के दौरे के दौरान महिलाओं को हटाया गया था। स्थानीय नागरिक अधिकार संगठनों का कहना है कि सार्वजनिक स्थानों पर किसी भी धार्मिक मान्यता के नाम पर महिलाओं के साथ भेदभाव करना फ्रांसीसी गणराज्य के मूल सिद्धांतों के सख्त खिलाफ है।
हालांकि, इन गंभीर आरोपों के सामने आने के बाद बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था (BAPS) ने अपना आधिकारिक रुख स्पष्ट करते हुए इन दावों का पुरजोर खंडन किया है। BAPS के प्रवक्ताओं ने उन सभी दावों को पूरी तरह से नकार दिया है जिनमें यह कहा गया था कि उन्होंने आयोजकों से “महिलाओं के साथ उनकी बातचीत को सीमित करने” (limit their interaction with women) के लिए कहा था। संस्था का तर्क है कि उनके साधु और संन्यासी अपने सख्त धार्मिक नियमों और ब्रह्मचर्य का पालन करते हैं, लेकिन इसका मतलब यह कतई नहीं है कि उन्होंने किसी भी सार्वजनिक या बाहरी महिला को कार्यक्रम से हटाने की कोई आधिकारिक मांग की थी।
यह पूरा घटनाक्रम वैश्विक मंच पर दो अलग-अलग संस्कृतियों और उनकी मान्यताओं के बीच होने वाले टकराव का एक स्पष्ट उदाहरण है। एक ओर जहां संन्यासी जीवन के अपने विशिष्ट नियम हैं, वहीं दूसरी ओर पश्चिमी समाज में लैंगिक अधिकारों को लेकर जीरो-टॉलरेंस की नीति है। 8 सितंबर 2026 को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, पेरिस पुलिस और प्रशासन इस मामले की निष्पक्ष जांच कर रहे हैं ताकि सच्चाई सामने आ सके। इस जांच के निष्कर्षों का असर भविष्य में यूरोप में आयोजित होने वाले इस तरह के बड़े धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के प्रोटोकॉल पर पड़ सकता है।