सत्य निकेतन इमारत हादसा: मरने वालों की संख्या 7 हुई, हाई कोर्ट ने दिए शहर भर में पीजी निरीक्षण के आदेश

राघवेन्द्र प्रताप सिंह
नई दिल्ली
भारत की राजधानी दिल्ली में असुरक्षित निर्माण और शहरी नियोजन की विफलता एक बार फिर एक बड़ी मानवीय त्रासदी का कारण बन गई है। नई दिल्ली के बेहद व्यस्त और छात्र-बहुल इलाके सत्य निकेतन (Satya Niketan) के पास 6 सितंबर 2026 को हुए एक भीषण इमारत हादसे (building collapsed) ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। मलबे के नीचे दबे लोगों को निकालने के लिए लगातार चलाए गए सघन बचाव अभियानों के बावजूद, इस हादसे में मरने वालों की संख्या सोमवार तक बढ़कर 7 हो गई है। इस दर्दनाक घटना ने दिल्ली में छात्रों के आवास की दयनीय स्थिति (student housing woes) को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला खड़ा किया है।
हादसे की गंभीरता और इसमें हुई जनहानि का कड़ा संज्ञान लेते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) ने तुरंत सख्त कदम उठाए हैं। अदालत ने दिल्ली में पेइंग गेस्ट (PG) के रूप में चल रहे सभी आवासों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए शहर भर में व्यापक निरीक्षण (citywide PG inspection) के आदेश जारी कर दिए हैं। अदालत ने स्पष्ट रूप से छात्रों के आवास संकट और उनकी सुरक्षा चिंताओं को हरी झंडी दिखाते हुए प्रशासन की लापरवाही पर तीखे सवाल खड़े किए हैं।
कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने इस मामले में त्वरित आपराधिक कार्रवाई करते हुए इमारत के मालिक को गिरफ्तार कर लिया है। जांच में सामने आई मिलीभगत और गैर-ज़िम्मेदाराना रवैये के कारण पुलिस ने इमारत के मालिक के साथ-साथ उसकी पत्नी और बेटे (spouse and son) को भी इस मामले में सह-आरोपी बनाते हुए गिरफ्तार किया है। इसके साथ ही, प्रशासनिक जवाबदेही तय करते हुए दिल्ली नगर निगम (MCD) के 5 अधिकारियों को भी तत्काल प्रभाव से निलंबित (suspended) कर दिया गया है। यह निलंबन इस बात का संकेत है कि अवैध निर्माण को शह देने वाले भ्रष्ट तंत्र के खिलाफ अब कड़ी कार्रवाई की जा रही है।
दक्षिण दिल्ली का सत्य निकेतन इलाका दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के बेहद करीब होने के कारण हज़ारों छात्रों का ठिकाना है। यहां कम जगह में अधिक मुनाफा कमाने के लालच में मकान मालिक बिना किसी स्ट्रक्चरल ऑडिट के कई मंजिला इमारतें खड़ी कर देते हैं, जिनका उपयोग पीजी आवास (PG accommodations) के रूप में किया जाता है। इन इमारतों में न तो वेंटिलेशन की उचित व्यवस्था होती है और न ही अग्निशमन या आपातकालीन निकास के कोई पुख्ता इंतज़ाम होते हैं।
लगातार हो रहे ऐसे हादसों से सबक लेते हुए, दिल्ली सरकार अब एक नई और सख्त नीति पर विचार (mulling policy) कर रही है। यह नीति उन सभी इमारतों को नियंत्रित (govern buildings) करने के लिए बनाई जा रही है जिनका उपयोग विभिन्न व्यावसायिक और आवासीय उद्देश्यों, विशेषकर पीजी आवास (including PG accommodations) के लिए किया जाता है। इस नई नीति का उद्देश्य पुराने और कमज़ोर हो चुके ढांचों के व्यावसायिक उपयोग पर लगाम लगाना और छात्रों के लिए सुरक्षित और किफायती आवास के मानक तय करना है। शहर के नागरिकों को उम्मीद है कि 7 लोगों की जान लेने वाले इस हादसे के बाद अब कागज़ी कार्रवाइयों से आगे बढ़कर ज़मीनी स्तर पर ठोस बदलाव देखने को मिलेंगे।