अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान के सैन्य अभ्यास के बीच उत्तर कोरिया का शक्ति प्रदर्शन: दूसरे नौसैनिक विध्वंसक को किया कमीशन

विवेक ओझा/ प्योंगयांग: कोरियाई प्रायद्वीप और समूचे पूर्वी एशिया में एक बार फिर से सैन्य तनाव और भू-राजनीतिक अस्थिरता के बादल गहरे होते जा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज़ से एक बेहद अहम और चिंताजनक घटनाक्रम में, उत्तर कोरिया ने अपनी नौसैनिक ताकत में भारी इज़ाफा करते हुए एक बड़ा कदम उठाया है। प्राप्त आधिकारिक जानकारी के अनुसार, उत्तर कोरिया ने अपना दूसरा नौसैनिक विध्वंसक (naval destroyer) चालू कर दिया है। यह सैन्य विस्तार ऐसे समय में हो रहा है जब क्षेत्र में पहले से ही हथियारों की होड़ और कूटनीतिक गतिरोध अपने चरम पर है।
उत्तर कोरिया द्वारा अपनी सैन्य क्षमता को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करने का समय भी बेहद रणनीतिक है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान ने एक सैन्य अभ्यास (military drill) शुरू किया है। इन तीनों सहयोगी देशों का यह संयुक्त सैन्य अभ्यास प्योंगयांग के लिए हमेशा से एक बड़ी चिढ़ और सुरक्षा खतरे का कारण रहा है। उत्तर कोरिया इन अभ्यासों को अपनी संप्रभुता पर सीधे हमले की तैयारी मानता है, और इसी के जवाब में वह अक्सर मिसाइल परीक्षण या नए सैन्य उपकरणों की कमीशनिंग करके अपनी जवाबी ताकत का एहसास कराता है।
इस शक्ति प्रदर्शन का केंद्र एक भव्य सैन्य समारोह था। रिपोर्ट के अनुसार, 6 सितंबर, 2026 को उत्तर कोरिया के वॉनसन पोर्ट (Wonsan Port) पर विध्वंसक ‘कांग कोन’ (Kang Kon) के कमीशनिंग समारोह का आयोजन किया गया। इस महत्वपूर्ण समारोह में उत्तर कोरियाई नेतृत्व की पारिवारिक और राजनीतिक एकजुटता भी स्पष्ट रूप से दिखाई दी। इस समारोह में किम जोंग उन अपनी बेटी किम जू ऐ (Kim Ju Ae) के साथ शामिल हुए। किम जू ऐ का सैन्य आयोजनों में लगातार देखा जाना अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों के बीच इस बात की प्रबल अटकलों को जन्म दे रहा है कि उन्हें भविष्य के नेतृत्व के लिए तैयार किया जा रहा है।
सैन्य शक्ति प्रदर्शन के इस दौर के बीच, कूटनीतिक वार्ताओं के दरवाज़े पूरी तरह से बंद नहीं हुए हैं, लेकिन उन पर कड़ी शर्तें लगा दी गई हैं। उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन ने पहले कहा था कि वह वार्ता पर लौट सकते हैं यदि अमेरिका उत्तर कोरिया के खिलाफ अपनी ‘शत्रुतापूर्ण नीति’ (hostile policy) को छोड़ दे। प्योंगयांग की दृष्टि में, यह ‘शत्रुतापूर्ण नीति’ ही क्षेत्र में हथियारों की दौड़ का मूल कारण है। इसके अलावा, उन्होंने अमेरिका से यह भी मांग की कि वह एक परमाणु राज्य (nuclear state) के रूप में उत्तर कोरिया की स्थिति का सम्मान करे। यह शर्त अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए स्वीकार करना कूटनीतिक रूप से लगभग असंभव है, क्योंकि वे उत्तर कोरिया के पूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण की वकालत करते हैं।
इस नए विध्वंसक ‘कांग कोन’ की तैनाती से उत्तर कोरिया की समुद्री युद्धक क्षमता में निश्चित रूप से इज़ाफा होगा, जिससे वह जापानी सागर और पीला सागर में अधिक आक्रामक गश्त कर सकेगा। अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान का त्रिपक्षीय गठबंधन जहां एक ओर अपनी सैन्य तत्परता बढ़ा रहा है, वहीं उत्तर कोरिया भी यह साबित कर रहा है कि वह किसी भी दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है। यह पूरा परिदृश्य इस बात का संकेत है कि कोरियाई प्रायद्वीप में शांति की राह अभी बहुत लंबी और जटिल है, और जब तक दोनों पक्ष अपनी कठोर शर्तों से पीछे नहीं हटते, तब तक इस तरह के सैन्य शक्ति प्रदर्शन क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बने रहेंगे।