नोएडा DM मेधा रूपम के खिलाफ हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी यूपी सरकार

नई दिल्ली। नोएडा में मजदूरों के प्रदर्शन से जुड़े एक छात्र को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत में लेने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को उत्तर प्रदेश सरकार सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सरकार के इस फैसले की जानकारी दी।इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में नोएडा की जिला मजिस्ट्रेट (DM) मेधा रूपम की ओर से छात्र को NSA के तहत हिरासत में लेने के आदेश को रद्द कर दिया था। कोर्ट ने छात्र को 5 लाख रुपये मुआवजा देने का भी आदेश दिया था। हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार, यह रकम नोएडा DM के वेतन से वसूल किए जाने की बात कही गई थी।हाईकोर्ट ने हिरासत के आदेश पर की थी कड़ी टिप्पणीइलाहाबाद हाईकोर्ट ने छात्र की हिरासत के आदेश को रद्द करते हुए जिला प्रशासन की कार्रवाई पर कड़ी टिप्पणी की थी। कोर्ट ने कहा था कि हिरासत का आदेश बिना ठीक से विचार किए जारी किया गया।मामला बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में एक अन्य मामले की सुनवाई के दौरान उठा। इसी दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले का उल्लेख किया।छात्र को CJP प्रदर्शन में शामिल होने पर भेजा गया था नोटिसमामला ग्रेटर नोएडा के एक छात्र को CJP प्रदर्शन में शामिल होने को लेकर भेजे गए कारण बताओ नोटिस से भी जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने नोटिस को लेकर सवाल उठाया।चीफ जस्टिस ने पूछा कि जब सुप्रीम कोर्ट छात्रों के प्रदर्शन में शामिल होने को लेकर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई से रोक चुका है, तो फिर इस तरह का कारण बताओ नोटिस कैसे जारी किया गया?DM ने नहीं, कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने जारी किया था नोटिससुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि नोटिस को लेकर मीडिया की ओर से नोएडा DM से सवाल किए जा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह नोटिस नोएडा DM ने जारी नहीं किया था।सॉलिसिटर जनरल के मुताबिक, कारण बताओ नोटिस ग्रेटर नोएडा के कार्यकारी मजिस्ट्रेट की ओर से जारी किया गया था।सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देगी सरकारसुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले का जिक्र किया, जिसमें नोएडा DM की ओर से छात्र के खिलाफ NSA के तहत जारी हिरासत आदेश को रद्द कर दिया गया था।इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार हाईकोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी। अब सरकार की ओर से हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील किए जाने की तैयारी है।इस मामले में हाईकोर्ट की टिप्पणी और मुआवजे के आदेश के बाद प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठे हैं। अब सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई से यह स्पष्ट होगा कि हाईकोर्ट के फैसले पर आगे क्या रुख सामने आता है।