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मराठा आरक्षण आंदोलनकारी मनोज जारांगे पाटिल की महाराष्ट्र सरकार को खुली चेतावनी

सरिता त्रिपाठी
मुंबई / जालना

महाराष्ट्र की राजनीति और सामाजिक ताने-बाने में मराठा आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर बेहद उग्र और निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। राज्य सरकार पर अपनी मांगों को लेकर भारी दबाव बनाते हुए, मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जारांगे पाटिल ने अपने आंदोलन को और अधिक आक्रामक तेवर दे दिए हैं। मराठा समुदाय को कुनबी (ओबीसी) प्रमाण पत्र जारी करने की मांग को लेकर उनका अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल सोमवार (7 सितंबर, 2026) को 10वें दिन में प्रवेश कर गया है। 10 दिनों से बिना अन्न-जल ग्रहण किए बैठे जारांगे पाटिल का गिरता स्वास्थ्य प्रशासन के लिए चिंता का विषय बन गया है, और उनके समर्थकों में भी भारी आक्रोश पनप रहा है।

इस तनावपूर्ण माहौल के बीच, मनोज जारांगे पाटिल ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन को एक बहुत ही सख्त और खुली चेतावनी जारी की है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि यदि मराठा प्रदर्शनकारियों को किसी भी प्रकार का नुकसान पहुंचाया जाता है, तो पूरे महाराष्ट्र को 10 मिनट के भीतर बंद कर दिया जाएगा। यह चेतावनी उन हालिया घटनाओं के संदर्भ में दी गई है जहां कुछ स्थानों पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक और लाठीचार्ज की खबरें सामने आई थीं। जारांगे पाटिल का यह अल्टीमेटम राज्य सरकार के लिए एक बड़ा सिरदर्द बन गया है, क्योंकि किसी भी प्रकार की ज़ोर-ज़बरदस्ती राज्य भर में कानून-व्यवस्था के एक बड़े संकट को जन्म दे सकती है।

हालांकि, अपनी इस सख्त चेतावनी के साथ-साथ, मनोज जारांगे पाटिल ने अपने समुदाय के सदस्यों से शांति और संयम बनाए रखने की भी पुरज़ोर अपील की है। उन्होंने अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा कि वे पूरे समुदाय से पुलिस के प्रति आक्रामक व्यवहार न करने और अपना विरोध पूरी तरह से शांतिपूर्ण ढंग से (silently) दर्ज़ कराने का आग्रह करते हैं। उनका यह बयान दर्शाता है कि वे अपने आंदोलन को हिंसक रूप लेने से बचाना चाहते हैं, ताकि उनकी जायज़ मांगों को कोई असामाजिक तत्व हाईजैक न कर सके और सरकार को आंदोलन कुचलने का कोई बहाना न मिल पाए।

इसके अलावा, आंदोलन को एक व्यापक पारिवारिक और सामाजिक रूप देने के लिए उन्होंने मराठा समुदाय की महिलाओं से एक विशेष भावनात्मक अपील भी की है। मनोज जारांगे पाटिल ने समुदाय की महिला सदस्यों से अपील की है कि वे मराठा समुदाय के सभी बेटे और बेटियों को अपने बच्चों की तरह मानें और उसी के अनुसार कार्य करें। यह अपील मराठा युवाओं के भीतर एकजुटता की भावना को मज़बूत करने और महिलाओं को इस आंदोलन की अगली पंक्ति में लाने का एक स्पष्ट प्रयास है। जैसे-जैसे उनकी भूख हड़ताल आगे बढ़ रही है, महाराष्ट्र सरकार पर इस जटिल आरक्षण मुद्दे का कोई त्वरित और कानूनी रूप से टिकाऊ समाधान निकालने का भारी दबाव बनता जा रहा है।