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पेरिस के एफिल टॉवर दौरे पर उठे विवाद से भारत सरकार ने किया किनारा

विवेक ओझा
नई दिल्ली / पेरिस

फ्रांस की राजधानी पेरिस में एफिल टॉवर के पास एक हिंदू धार्मिक समूह के दौरे को लेकर पैदा हुए विवाद ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी सुर्खियां बटोरी हैं। फ्रांस के कड़े धर्मनिरपेक्ष कानूनों और वहां के नागरिक अधिकारों के बीच इस घटना ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है। इस कूटनीतिक और सामाजिक हलचल के बीच, भारत सरकार ने इस पूरे मामले से पूरी तरह से दूरी बना ली है और अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। सरकार ने धार्मिक समूह के एफिल टॉवर दौरे को लेकर उठे इस विवाद के बीच स्पष्ट रूप से कहा है कि वह इसमें शामिल नहीं है।

भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने इस मुद्दे पर पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए इसे एक निजी संस्थागत मामला करार दिया है। विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा है कि यह “पूरी तरह से संस्थाओं (BAPS और एफिल टॉवर प्रबंधन) के बीच का मामला” है। मंत्रालय का यह रुख दर्शाता है कि नई दिल्ली इसे किसी भी रूप में कोई कूटनीतिक या द्विपक्षीय मुद्दा नहीं मानती है। यह विवाद मुख्य रूप से स्थानीय फ्रांसीसी प्रबंधन और दौरा करने वाले धार्मिक प्रतिनिधिमंडल के बीच के प्रोटोकॉल और नियमों की व्याख्या का परिणाम है, जिसमें भारत सरकार का कोई आधिकारिक लेना-देना नहीं है।

इस विवाद की शुरुआत एक विशेष घटनाक्रम के बाद हुई थी, जिसने पेरिस के इस प्रतिष्ठित पर्यटन स्थल के कामकाज को भी प्रभावित किया। रिपोर्ट के अनुसार, 8 सितंबर, 2026 को पेरिस में एक हिंदू प्रतिनिधिमंडल की यात्रा के दौरान महिलाओं पर लगाए गए कथित प्रतिबंधों को लेकर एक दिन की हड़ताल की गई थी। एफिल टॉवर के कर्मचारियों द्वारा की गई इस हड़ताल के कारण पर्यटकों को काफी असुविधा का सामना करना पड़ा। हालांकि, इस एक दिन की हड़ताल के बाद जब एफिल टॉवर को फिर से खोला गया, तो पर्यटकों को वहां से गुज़रते हुए देखा गया।

इस विवाद का समय भी काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह घटनाक्रम पेरिस में भारत की एक बड़ी सांस्कृतिक उपस्थिति दर्ज कराने के ठीक आस-पास हुआ है। गौरतलब है कि रविवार को ही प्रधानमंत्री मोदी ने वीडियोकांफ्रेंसिंग के जरिए पेरिस में BAPS मंदिर का उद्घाटन किया था। इस नवनिर्मित मंदिर को भारत और फ्रांस के बीच सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों के एक नए अध्याय के रूप में देखा जा रहा है। ऐसे में एफिल टॉवर का यह विवाद इस भव्य उद्घाटन के साये में एक अप्रत्याशित घटनाक्रम बनकर उभरा। भारत सरकार का त्वरित स्पष्टीकरण यह सुनिश्चित करने का प्रयास है कि इस निजी विवाद की आंच दोनों देशों के प्रगाढ़ होते द्विपक्षीय और सांस्कृतिक संबंधों पर बिल्कुल भी न पड़े।