ब्रिक्स शिखर सम्मेलन: संयुक्त राष्ट्र प्रमुख गुटेरेस ने पीएम मोदी से की द्विपक्षीय मुलाकात

पश्चिम एशिया और यूक्रेन संघर्ष पर हुई गहन चर्चा; संयुक्त राष्ट्र ने की भारत के सहयोग की भारी सराहना
विवेक ओझा/ नई दिल्ली: नई दिल्ली में चल रहे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 (BRICS Summit 2026) के दौरान वैश्विक कूटनीतिक सरगर्मियां अपने चरम पर हैं। इसी बीच एक बेहद अहम और उच्च स्तरीय मुलाकात देखने को मिली है, जिसने पूरी दुनिया के मीडिया और कूटनीतिक विश्लेषकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख एंटोनियो गुटेरेस (UN chief Guterres) ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से एक विशेष मुलाकात की है (meets PM Modi)। यह मुलाकात केवल एक औपचारिक शिष्टाचार भेंट नहीं थी, बल्कि इसमें वर्तमान समय के सबसे ज्वलंत और संवेदनशील वैश्विक सुरक्षा मुद्दों पर गहराई से चर्चा की गई।
आधिकारिक कूटनीतिक जानकारी और जारी की गई तस्वीरों के अनुसार, शुक्रवार, 11 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के मौके पर यह द्विपक्षीय बैठक आयोजित की गई थी (bilateral meeting on the sidelines of the BRICS Summit 2026, in New Delhi on Friday, September 11, 2026)। इस बैठक के दौरान, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और संयुक्त राष्ट्र महासचिव (UNSG) एंटोनियो गुटेरेस को एक-दूसरे से गर्मजोशी से हाथ मिलाते हुए देखा गया (Prime Minister Narendra Modi shakes hands with United Nations Secretary-General António Guterres)। यह दृश्य भारत और संयुक्त राष्ट्र के बीच गहरे होते संस्थागत और कूटनीतिक संबंधों को बहुत ही स्पष्ट रूप से दर्शाता है।
इस महत्वपूर्ण बैठक का मुख्य एजेंडा वैश्विक शांति और सुरक्षा से जुड़ा था। दोनों विश्व नेताओं ने पश्चिम एशिया और यूक्रेन के बीच चल रहे गंभीर संघर्षों पर विस्तृत और गहन चर्चा की (discusses West Asia, Ukraine conflicts)। रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया में चल रहे भारी तनाव ने पूरी दुनिया की आपूर्ति श्रृंखला, खाद्य सुरक्षा और अर्थव्यवस्था को गहरे संकट में डाल रखा है। भारत ने हमेशा से इन दोनों संघर्षों में शांतिपूर्ण बातचीत, मानवीय सहायता और कूटनीति के माध्यम से समाधान निकालने की पुरजोर वकालत की है। संयुक्त राष्ट्र प्रमुख के साथ इस चर्चा में भारत के इस ‘शांति-समर्थक’ और तटस्थ रुख को और भी अधिक बल मिला है।
इसके साथ ही, इस द्विपक्षीय बैठक में अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों की सुरक्षा का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। नेताओं ने ‘नेविगेशन की स्वतंत्रता के सिद्धांत’ (principle of freedom of navigation) के महत्व पर विशेष रूप से ज़ोर दिया। लाल सागर और हिंद महासागर के अन्य हिस्सों में हाल ही में हुए समुद्री हमलों को देखते हुए, स्वतंत्र और सुरक्षित समुद्री व्यापार सुनिश्चित करना संयुक्त राष्ट्र और भारत दोनों के लिए सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक बन गया है।
वैश्विक चुनौतियों से निपटने में भारत की सक्रिय और ज़िम्मेदार भूमिका को संयुक्त राष्ट्र द्वारा पूरी तरह से मान्यता दी गई है। इस बैठक के दौरान, महासचिव गुटेरेस ने संयुक्त राष्ट्र के साथ भारत के घनिष्ठ सहयोग की भी जमकर सराहना की (Secretary-General appreciated India’s close cooperation with the United Nations)। भारत ने हमेशा से यूएन शांति मिशनों, जलवायु परिवर्तन के लक्ष्यों और वैश्विक स्वास्थ्य संकटों के दौरान संयुक्त राष्ट्र के हर कदम का बढ़-चढ़कर समर्थन किया है। भारत ने हाल के वर्षों में ‘ग्लोबल साउथ’ (Global South) के एक मजबूत और विश्वसनीय प्रतिनिधि के रूप में अपनी छवि स्थापित की है। ब्रिक्स जैसे बहुपक्षीय मंच पर संयुक्त राष्ट्र महासचिव की भारत के प्रधानमंत्री के साथ यह बैठक इस बात का स्पष्ट संकेत है कि संयुक्त राष्ट्र वैश्विक शांति और स्थिरता स्थापित करने के लिए भारत की मध्यस्थता और कूटनीतिक क्षमता पर बहुत अधिक भरोसा करता है।