सीआईए के दस्तावेज़ों से बड़ा खुलासा: 1998 में भारत और अन्य देशों को निशाना बनाने की फिराक में था ओसामा बिन लादेन

विवेक ओझा/ वाशिंगटन / नई दिल्ली: वैश्विक आतंकवाद के इतिहास और 11 सितंबर (9/11) के खौफनाक हमलों की पृष्ठभूमि को लेकर संयुक्त राज्य अमेरिका की प्रमुख खुफिया एजेंसी ने कुछ ऐसे ऐतिहासिक दस्तावेज़ सार्वजनिक किए हैं, जिन्होंने एक बार फिर दुनिया को चौंका दिया है। दशकों पुराने इन अवर्गीकृत (Declassified) दस्तावेज़ों ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि अल कायदा का वैश्विक आतंकवादी नेटवर्क केवल अमेरिका तक ही सीमित नहीं था, बल्कि वह दक्षिण एशिया और विशेष रूप से भारत में भी तबाही मचाने की योजना बना रहा था। श्रीराम लक्ष्मण द्वारा प्रस्तुत की गई इस रिपोर्ट के अनुसार, सीआईए (CIA) के दस्तावेज़ों से यह बड़ा खुलासा हुआ है कि ओसामा बिन लादेन 1998 में भारत और अन्य देशों को निशाना बनाने पर विचार कर रहा था।
यह जानकारी भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और उसके लंबे समय से आतंकवाद के खिलाफ चल रहे संघर्ष के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है। 1990 के दशक का अंत वैश्विक आतंकवाद के उदय का एक क्रूर चरण था। 1998 वही वर्ष है जब अल कायदा ने केन्या और तंजानिया में अमेरिकी दूतावासों पर भीषण बम विस्फोट किए थे। इन दस्तावेज़ों से यह स्पष्ट होता है कि उस समय ओसामा बिन लादेन की नज़रें भारत के महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों और नागरिकों पर भी टिकी हुई थीं। यह खुलासा यह भी साबित करता है कि आतंकवाद की कोई सीमा नहीं होती और भारत हमेशा से इस कट्टरपंथी विचारधारा के मुख्य निशानों में से एक रहा है।
इसके अतिरिक्त, सीआईए द्वारा जारी किए गए इन खुफिया दस्तावेज़ों ने अमेरिकी खुफिया तंत्र और उसके राजनीतिक नेतृत्व की उस समय की जानकारी और उनकी घोर विफलताओं को भी एक बार फिर से बेनकाब कर दिया है। सीआईए की यह ताज़ा रिलीज़ 9/11 आयोग (9/11 Commission) के उन ऐतिहासिक निष्कर्षों की आधिकारिक रूप से पुष्टि करती है, जिनमें कहा गया था कि 9/11 के हमलों से बहुत पहले अमेरिकी राष्ट्रपतियों बिल क्लिंटन और जॉर्ज डब्लू. बुश को अल कायदा के एक बड़े हमले की कई बार चेतावनी दी गई थी। यह तथ्य दर्शाता है कि यदि उन प्रारंभिक चेतावनियों पर पर्याप्त और कठोर कार्रवाई की गई होती, तो शायद वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के विनाश और हज़ारों निर्दोष लोगों की जान को बचाया जा सकता था।
ओसामा बिन लादेन द्वारा फैलाई गई नफरत और कट्टरपंथ का असर उसके मारे जाने के बाद भी दुनिया के कई हिस्सों में लंबे समय तक देखा गया। इस रिपोर्ट के साथ साझा की गई एक पुरानी तस्वीर में अल-कायदा के नेता ओसामा बिन लादेन के समर्थकों को 2 मई, 2011 को उसकी मौत की खबर के बाद क्वेटा (Quetta) में एक रैली के दौरान अमेरिका विरोधी नारे लगाते हुए देखा जा सकता है। पाकिस्तान के क्वेटा और एबटाबाद जैसे शहरों में बिन लादेन को मिलने वाला यह समर्थन इस बात का जीता-जागता सबूत है कि आतंकवाद को पनपने के लिए किस तरह स्थानीय संरक्षण और सहानुभूति प्राप्त होती रही है। सीआईए के ये दस्तावेज़ वर्तमान नीति-निर्माताओं के लिए एक गंभीर सबक हैं कि आतंकवाद से जुड़ी किसी भी छोटी सी खुफिया जानकारी या चेतावनी को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए।