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‘कर्ज वसूली के नाम पर गुंडागर्दी बर्दाश्त नहीं!’ EMI बाउंस होने पर जबरन गाड़ी छीनने वाले बैंकों पर सुप्रीम कोर्ट का चाबुक, RBI को सख्त आदेश

सरिता त्रिपाठी

नई दिल्ली: अगर आपकी कार या बाइक की ईएमआई (EMI) बाउंस हो गई है और बैंक के रिकवरी एजेंट जबरन आपकी गाड़ी खींच ले जाने की धमकी दे रहे हैं, तो आपके लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर है। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने कर्ज वसूली के नाम पर होने वाली इस मनमानी और गुंडागर्दी पर अब तक का सबसे सख्त रुख अपनाया है। देश की सबसे बड़ी अदालत ने इस मामले में सीधे रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) को कड़े निर्देश देते हुए कहा है कि फाइनेंस कंपनियों द्वारा ग्राहकों से जबरन वाहन जब्त करने की इस ‘अवैध और खौफनाक’ प्रथा पर तुरंत लगाम लगाई जाए।

रिकवरी एजेंटों के ‘बाहुबल’ और जंगलराज पर सुप्रीम कोर्ट का करारा प्रहार
अदालत ने इस बात पर गहरी नाराजगी जताई कि बैंक और फाइनेंस कंपनियां कर्ज वसूली के लिए स्थापित कानूनी प्रक्रिया (Rule of Law) का पालन करने के बजाय बाहुबलियों, बाउंसरों और गुंडों का इस्तेमाल कर रही हैं:

  • सड़क पर नहीं चलेगा ‘जंगलराज’: सुप्रीम कोर्ट ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि किसी भी फाइनेंस कंपनी या बैंक को यह अधिकार नहीं है कि वह सड़क पर, टोल प्लाजा पर या घर के बाहर से ग्राहक की गाड़ी जबरन छीन ले। यह पूरी तरह से असंवैधानिक और गैरकानूनी है।
  • RBI की जवाबदेही तय: इस गुंडागर्दी को रोकने के लिए कोर्ट ने सीधे RBI को आड़े हाथों लिया। कोर्ट ने कहा कि एक नियामक (Regulator) के तौर पर यह सुनिश्चित करना पूरी तरह से RBI की जिम्मेदारी है कि कोई भी बैंक या एनबीएफसी (NBFC) रिकवरी के नाम पर आम आदमी का उत्पीड़न न करे।

बिना उचित नोटिस कोई जब्ती नहीं, आम आदमी को मिली सबसे बड़ी ‘कानूनी ढाल’
सुप्रीम कोर्ट के इस सख्त निर्देश ने उन लाखों मध्यमवर्गीय और गरीब परिवारों को एक बड़ी कानूनी ढाल दी है, जो किसी आर्थिक तंगी, नौकरी जाने या बीमारी के कारण एक-दो EMI नहीं चुका पाते। अब बैंकों को वाहन जब्त करने से पहले उचित कानूनी प्रक्रिया (जैसे मध्यस्थता, अदालती आदेश या एडवांस नोटिस) के नियमों का कड़ाई से पालन करना ही होगा।

सुप्रीम कोर्ट का यह ऐतिहासिक आदेश उन मनबढ़ रिकवरी एजेंटों और फाइनेंस कंपनियों के गाल पर एक करारा तमाचा है, जो चंद रुपयों के लिए खुद को कानून और पुलिस से भी ऊपर मानने लगे थे। यह फैसला देश को स्पष्ट संदेश देता है कि ‘कर्जदार होना कोई अपराध नहीं है’, और किसी भी नागरिक के सम्मान और सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने की इजाजत किसी भी बैंक या कंपनी को नहीं दी जा सकती।