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प्राइवेट कर्मचारियों की बल्ले-बल्ले! मोदी कैबिनेट का ऐतिहासिक फैसला: EPF वेतन सीमा ₹15,000 से बढ़कर हुई ₹25,000, जानिए आपकी सैलरी और पेंशन पर क्या होगा असर

अभिषेक सिंह

नई दिल्ली: देश के करोड़ों प्राइवेट सेक्टर कर्मचारियों और नौकरीपेशा वर्ग के लिए केंद्र की मोदी सरकार ने एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। विश्वकर्मा पूजा के शुभ अवसर पर मोदी कैबिनेट ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के तहत आने वाले कर्मचारियों के लिए अनिवार्य वेतन सीमा (Wage Ceiling) को 15,000 रुपये से बढ़ाकर सीधे 25,000 रुपये प्रति माह करने को मंजूरी दे दी है। करीब एक दशक बाद हुए इस बड़े संशोधन से निजी क्षेत्र के लाखों नए कर्मचारियों के लिए सामाजिक सुरक्षा और गारंटीड पेंशन का रास्ता खुल गया है।

10 साल बाद हुआ बड़ा बदलाव: ₹15,000 से सीधे ₹25,000 की छलांग
ईपीएफओ के तहत अधिकतम वेतन सीमा में आखिरी बार संशोधन वर्ष 2014 में किया गया था, जब इसे 6,500 रुपये से बढ़ाकर 15,000 रुपये किया गया था। लंबे समय से कर्मचारी संगठन और ट्रेड यूनियन बढ़ती महंगाई और वेतन वृद्धि के मद्देनजर इस सीमा को बढ़ाने की मांग कर रहे थे। अब 25,000 रुपये की सीमा लागू होने से संगठित क्षेत्र के लाखों नए कर्मचारी सीधे ईपीएफ (EPF) और पेंशन (EPS) के दायरे में आ जाएंगे, जिन्हें पहले कंपनियां इस लाभ से बाहर रखती थीं।

आपकी जेब और भविष्य पर क्या पड़ेगा असर? समझें 4 बड़े बदलाव
कैबिनेट के इस फैसले से कर्मचारियों के वित्तीय भविष्य और रिटायरमेंट प्लानिंग में बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे:

  • बड़ा रिटायरमेंट फंड: वेतन सीमा 25,000 रुपये होने से कर्मचारी और कंपनी दोनों का अनिवार्य पीएफ योगदान बढ़ जाएगा। इसका सीधा फायदा यह होगा कि रिटायरमेंट के समय कर्मचारियों के हाथ में एक मोटा और बंपर फंड आएगा।
  • पेंशन (EPS) में भारी इजाफा: कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) में अब 25,000 रुपये के आधार पर 8.33% का अंशदान जमा होगा, जिससे रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली मासिक पेंशन राशि में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी।
  • मुफ्त जीवन बीमा (EDLI) का दायरा बढ़ा: ईपीएफओ के तहत मिलने वाले एम्प्लॉइज डिपॉजिट लिंक्ड इंश्योरेंस (EDLI) की सुरक्षा सीमा भी स्वतः बढ़ जाएगी, जिससे नौकरी के दौरान किसी अनहोनी पर कर्मचारी के परिवार को अधिक वित्तीय सहायता मिल सकेगी।
  • इन-हैंड सैलरी में थोड़ा बदलाव: पीएफ अंशदान अधिक कटने के कारण शुरुआती दौर में कुछ कर्मचारियों की इन-हैंड (टेक-होम) सैलरी में मामूली कमी दिख सकती है, लेकिन यह कटौती पूरी तरह से उनकी सुरक्षित और ब्याज-युक्त लंबी बचत के रूप में जमा होगी।

लाखों नए कर्मचारियों को मिलेगा ‘सामाजिक सुरक्षा कवच’
अब तक 15,000 रुपये से अधिक बेसिक सैलरी पाने वाले कई कर्मचारियों के लिए कंपनियां पीएफ का अंशदान अनिवार्य नहीं मानती थीं। लेकिन अब 25,000 रुपये तक बेसिक सैलरी पाने वाले हर कर्मचारी के लिए ईपीएफओ का सदस्य बनना कानूनी रूप से अनिवार्य हो जाएगा। इससे कंपनियों की मनमानी पर लगाम लगेगी और देश के कार्यबल (Workforce) को एक मजबूत वित्तीय सुरक्षा मिलेगी।

मोदी कैबिनेट का यह फैसला निजी क्षेत्र में काम करने वाले मध्यम और निम्न-मध्यम वर्गीय कर्मचारियों के लिए एक बड़ा ‘गेम-चेंजर’ साबित होगा। बढ़ती महंगाई के दौर में यह कदम न केवल कर्मचारियों के बुढ़ापे को आर्थिक रूप से सुरक्षित करेगा, बल्कि देश में संगठित रोजगार और सामाजिक सुरक्षा तंत्र को भी एक नया आयाम देगा।