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PM मोदी के जन्मदिन पर लखनऊ में सजेगा ‘मेगा इवेंट’! सीएम योगी खोलेंगे सौगातों का पिटारा, हजारों कारीगरों को मिलेगा रोजगार का नया ‘हथियार’

राघवेंद्र प्रताप सिंह

लखनऊ/उत्तर प्रदेश: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन और भगवान विश्वकर्मा जयंती के पावन अवसर पर राजधानी लखनऊ में एक भव्य और ऐतिहासिक कार्यक्रम का आयोजन होने जा रहा है। पारंपरिक शिल्पकारों, दस्तकारों और छोटे कारीगरों की जिंदगी बदलने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद इस महा-आयोजन की कमान संभालेंगे। इस विशेष मौके पर सीएम योगी ‘विश्वकर्मा श्रम सम्मान एवं स्वरोजगार योजना’ के तहत चयनित हजारों लाभार्थियों को आधुनिक और उन्नत टूलकिट (Toolkit) वितरित कर उनके हुनर को नई उड़ान देंगे।

हाथ के हुनर को मिलेगा आधुनिक संबल: कारीगर बनेंगे ‘आत्मनिर्भर’
पारंपरिक दस्तकारी से जुड़े कामगारों को आर्थिक रूप से मजबूत करने और उनके काम को रफ्तार देने के लिए यह आयोजन बेहद खास होने वाला है:

  • फ्री टूलकिट और आधुनिक उपकरण: लोहार, बढ़ई, दर्जी, कुम्हार, राजमिस्त्री, मोची और नाई जैसे पारंपरिक कार्यों से जुड़े कारीगरों को अत्याधुनिक औजारों की टूलकिट बांटी जाएगी, ताकि वे बाजार की आधुनिक जरूरतों के मुताबिक काम कर सकें।
  • बिना गारंटी लोन और ट्रेनिंग: योजना के तहत लाभार्थियों को केवल टूलकिट ही नहीं, बल्कि तकनीकी ट्रेनिंग और बैंकों के जरिए आसान व रियायती दरों पर ऋण की सुविधा भी मुहैया कराई जा रही है।
  • ‘लोकल फॉर वोकल’ को नई धार: इस पहल का सीधा मकसद ग्रामीण और कस्बाई स्तर पर काम कर रहे कामगारों की आमदनी बढ़ाना और उन्हें बिचौलियों के चंगुल से मुक्त कराना है।

प्रदेश भर में ‘सेवा पखवाड़ा’ का शंखनाद
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर पूरे उत्तर प्रदेश में व्यापक ‘सेवा पखवाड़ा’ अभियान भी शुरू किया जा रहा है:

  • जनसेवा के काम: 17 सितंबर से शुरू होकर अगले पंद्रह दिनों तक चलने वाले इस अभियान के तहत रक्तदान शिविर, स्वच्छता अभियान, स्वास्थ्य परीक्षण और पौधरोपण जैसे जनसरोकार के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
  • जिलों में भी गूंजेगी गूंज: राजधानी लखनऊ के मुख्य कार्यक्रम के साथ-साथ प्रदेश के सभी 75 जिलों में भी स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अफसरों की मौजूदगी में लाभार्थियों को सम्मानित किया जाएगा।

पीएम मोदी के जन्मदिन के अवसर पर कारीगरों और शिल्पकारों को दिया जाने वाला यह तोहफा केवल एक सरकारी सहायता नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की पारंपरिक कारीगरी को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने का एक ठोस कदम है। जब हाथ के हुनर को आधुनिक तकनीक और वित्तीय संबल मिलेगा, तभी आत्मनिर्भर भारत का सपना धरातल पर पूरी तरह साकार होगा।