कूटनीतिक गतिरोध के पश्चात पुनः प्रारंभ हुई वार्ता: बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के भारत दौरे की प्रबल संभावना

अभिषेक सिंह
नई दिल्ली / ढाका
दक्षिण एशिया की भू-राजनीति और विशेष रूप से भारत-बांग्लादेश संबंधों के संदर्भ में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और बहुप्रतीक्षित कूटनीतिक प्रगति देखने को मिल रही है। हाल ही में दोनों पड़ोसी देशों के बीच उत्पन्न हुए एक संक्षिप्त कूटनीतिक व्यवधान के पश्चात, अब द्विपक्षीय संबंधों को पुनः पटरी पर लाने के लिए गंभीर और सकारात्मक प्रयास आरंभ हो गए हैं। प्राप्त सूचनाओं के अनुसार, अधिकारियों ने एक संक्षिप्त व्यवधान के पश्चात बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान की भारत यात्रा के लिए वार्ता पुनः आरंभ कर दी है। यह कदम दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंधों की प्रगाढ़ता को बनाए रखने की दिशा में एक बहुत बड़ा और सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
बांग्लादेश के वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य और वहां के नए नेतृत्व के सत्ता संभालने के पश्चात यह भारत की उनकी पहली आधिकारिक यात्रा हो सकती है। इस उच्च-स्तरीय यात्रा की रूपरेखा और समय-सारिणी तय करने के लिए दोनों देशों के विदेश मंत्रालयों के अधिकारी निरंतर संपर्क में हैं। ढाका में मौजूद कूटनीतिक सूत्रों ने इस बात की स्पष्ट रूप से पुष्टि की है कि श्री रहमान की यात्रा को अंतिम रूप देने के लिए गहन कूटनीतिक प्रयास किए जा रहे हैं। ढाका के सूत्रों ने कहा है कि श्री रहमान की मौजूदा कूटनीतिक व्यस्तताओं के पश्चात, नवंबर में एक उपयुक्त अवधि के दौरान उनकी नई दिल्ली यात्रा निर्धारित करने के लिए प्रयास जोरों पर चल रहे हैं।
नवंबर का महीना इस यात्रा के लिए सामरिक और कूटनीतिक दोनों ही दृष्टिकोण से अत्यंत उपयुक्त माना जा रहा है। भारत और बांग्लादेश के मध्य पचपन सौ किलोमीटर से अधिक लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा साझा होती है, और ऐसे में दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के मध्य निरंतर संवाद स्थापित रहना पूरे दक्षिण एशियाई क्षेत्र की शांति और स्थिरता के लिए अपरिहार्य है। प्रधानमंत्री तारिक रहमान के लिए भी भारत के साथ संबंधों को एक नई दिशा देना उनकी विदेश नीति की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है। दोनों ही देश आतंकवाद के उन्मूलन, सीमा पार व्यापार और पारगमन संधियों पर एक समान दृष्टिकोण रखते हैं।
इस प्रस्तावित शिखर सम्मेलन के दौरान कई महत्वपूर्ण द्विपक्षीय समझौतों पर हस्ताक्षर होने की प्रबल संभावना है। नदियों के जल बंटवारे, सीमा सुरक्षा, अवैध घुसपैठ की रोकथाम, व्यापार संतुलन और रेलवे व सड़क बुनियादी ढांचे के विकास जैसे संवेदनशील और अत्यंत महत्वपूर्ण विषयों पर इस यात्रा के दौरान व्यापक चर्चा होने की उम्मीद है। भारत हमेशा से अपनी ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति के अंतर्गत बांग्लादेश को अपना सबसे निकटतम और विश्वसनीय रणनीतिक साझीदार मानता रहा है।
विगत कुछ समय में ढाका और नई दिल्ली के मध्य कुछ मुद्दों पर वैचारिक मतभेद उभरे थे, जिसके कारण इस उच्च-स्तरीय यात्रा की घोषणा में थोड़ा विलंब और कूटनीतिक व्यवधान उत्पन्न हुआ था। परंतु, वर्तमान वार्ताएं यह सिद्ध करती हैं कि दोनों ही देश अपने सामरिक और आर्थिक हितों को सर्वोपरि रखते हुए किसी भी प्रकार के मतभेद को संवाद के माध्यम से सुलझाने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं। रॉयटर्स द्वारा साझा की गई एक तस्वीर में बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान को देखा जा सकता है[cite: 111], जो दोनों देशों के मध्य एक नए युग के आरंभ का प्रतीक है। आगामी नवंबर में यदि यह यात्रा सफलतापूर्वक संपन्न होती है, तो यह निश्चित रूप से भारत और बांग्लादेश के ऐतिहासिक संबंधों में एक नया और स्वर्णिम अध्याय जोड़ेगी।