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नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव: कांग्रेस प्रत्याशी की अचानक गिरफ्तारी से गरमाई राजनीति, पार्टी ने पुलिसिया कार्रवाई पर उठाए गंभीर प्रश्न

राघवेन्द्र प्रताप सिंह
कोलकाता / नंदीग्राम

पश्चिम बंगाल की राजनीति में चुनावी सरगर्मियां हमेशा से ही अत्यधिक तीव्र, आक्रामक और विवादों से घिरी रही हैं। राज्य में होने वाले आगामी विधानसभा उपचुनावों से ठीक पूर्व एक ऐसा बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक घटनाक्रम सामने आया है, जिसने राज्य के संपूर्ण राजनीतिक माहौल को पूरी तरह से गरमा दिया है। इस ताज़ा घटनाक्रम ने चुनावी निष्पक्षता और पुलिस प्रशासन की भूमिका पर भी कई अत्यंत गंभीर और तीखे सवाल खड़े कर दिए हैं। प्राप्त समाचारों और आधिकारिक रिपोर्टों के अनुसार, आगामी नंदीग्राम उपचुनाव के लिए घोषित किए गए कांग्रेस के प्रत्याशी को अचानक गिरफ्तार कर लिया गया है, जिसके पश्चात कांग्रेस पार्टी ने पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई पर अत्यंत गंभीर प्रश्न उठाए हैं।

यह अप्रत्याशित गिरफ्तारी ऐसे नाज़ुक समय में हुई है जब क्षेत्र में चुनाव प्रचार धीरे-धीरे अपने चरम पर पहुंचने वाला था। आधिकारिक विवरण के अनुसार, आगामी नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव के लिए कांग्रेस के अधिकृत उम्मीदवार मिलन प्रधान को अठारह सितंबर को पुलिस द्वारा अचानक गिरफ्तार कर लिया गया। यह गिरफ्तारी किसी हालिया अपराध के लिए नहीं, बल्कि लगभग दो दशक पुराने एक बेहद संवेदनशील और ऐतिहासिक मामले में की गई है। पुलिस प्रशासन का आधिकारिक वक्तव्य है कि उनकी यह गिरफ्तारी वर्ष दो हज़ार सात के ऐतिहासिक भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन में उनकी कथित संलिप्तता के आरोप में की गई है।

वर्ष दो हज़ार सात का नंदीग्राम भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन पश्चिम बंगाल के राजनीतिक इतिहास का वह सबसे महत्वपूर्ण और हिंसक अध्याय है, जिसने अंततः राज्य में पैंतीस साल पुरानी वामपंथी सरकार की मजबूत नींव को पूरी तरह से हिला कर रख दिया था। उस समय निर्दोष किसानों और स्थानीय निवासियों ने विशेष आर्थिक क्षेत्र (सेज) के लिए अपनी उपजाऊ कृषि भूमि के जबरन अधिग्रहण का पुरजोर विरोध किया था। इतने लंबे वर्षों के पश्चात, और वह भी ठीक एक महत्वपूर्ण चुनाव के समय, इस इतने पुराने मामले में एक प्रमुख राजनीतिक दल के उम्मीदवार की गिरफ्तारी को लेकर विपक्ष पूरी तरह से आक्रोशित और अचंभित है।

पश्चिम बंगाल कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने इस पूरी पुलिसिया कार्रवाई को राजनीति से प्रेरित, द्वेषपूर्ण और पूरी तरह से अलोकतांत्रिक करार दिया है। अठारह सितंबर, दो हज़ार छब्बीस को सामने आई रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम बंगाल कांग्रेस के प्रमुख सुभंकर सरकार ने इस अचानक हुई गिरफ्तारी पर कड़े सवाल उठाए हैं। कांग्रेस पार्टी का स्पष्ट और सीधा आरोप है कि यह कार्रवाई राज्य के सत्तारूढ़ दल के सीधे इशारे पर की गई है ताकि उनके मजबूत उम्मीदवार को चुनाव प्रचार करने से पूरी तरह रोका जा सके और नंदीग्राम जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रतिष्ठित विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस पार्टी के मनोबल को तोड़ा जा सके।

नंदीग्राम हमेशा से पश्चिम बंगाल की राजनीति का मुख्य केंद्र बिंदु रहा है। यह वही ऐतिहासिक क्षेत्र है जिसने राज्य की वर्तमान राजनीतिक दिशा तय की थी। इस उपचुनाव में भी सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। ऐसे नाज़ुक समय में जब स्वतंत्र, शांतिपूर्ण और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना चुनाव आयोग और स्थानीय प्रशासन की सर्वोच्च जिम्मेदारी होती है, पुलिस की इस दंडात्मक कार्रवाई ने एक अनावश्यक और बड़े विवाद को जन्म दे दिया है। कांग्रेस नेताओं का यह तर्क अत्यंत प्रासंगिक है कि यदि मिलन प्रधान पर लगे आरोप इतने ही गंभीर थे, तो पुलिस प्रशासन ने पिछले उन्नीस वर्षों तक उनके विरुद्ध कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की? अचानक चुनाव के समय ही उनकी यह कथित संलिप्तता पुलिस को क्यों याद आई? इस घटना ने विपक्षी दलों को राज्य सरकार की प्रशासनिक मशीनरी के कथित दुरुपयोग के खिलाफ एकजुट होने का एक बड़ा अवसर प्रदान कर दिया है।