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दिल्ली के स्वरूप नगर में रूह कंपा देने वाली क्रूरता: नाबालिग बच्ची से दुष्कर्म और हत्या के मामले में चार गिरफ्तार

श्वानों द्वारा आंशिक रूप से खाया हुआ मिला क्षत-विक्षत शव; सीसीटीवी और एक मालवाहक वाहन के विशेष चिह्न ने सुलझाई जघन्य अपराध की गुत्थी

द इंडियन व्यू टीम
नई दिल्ली : देश की राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली एक बार फिर से एक ऐसी अत्यंत वीभत्स, क्रूर और अमानवीय घटना की गवाह बनी है, जिसने पूरे समाज की आत्मा को झकझोर कर रख दिया है। महिलाओं और विशेषकर छोटी बच्चियों की सुरक्षा को लेकर किए जाने वाले तमाम बड़े-बड़े सरकारी दावों की पोल खोलती यह घटना मानवता के नाम पर एक गहरा कलंक है। दिल्ली के स्वरूप नगर इलाके से एक अत्यंत हृदयविदारक मामला सामने आया है। प्राप्त पुलिस रिपोर्टों के अनुसार, स्वरूप नगर में एक नाबालिग लड़की से दुष्कर्म और हत्या (rape-murder) की गई है, और उसका शव, जिसे कुत्तों द्वारा आंशिक रूप से खा लिया गया था, बरामद किया गया है। इस मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चार लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें से सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इन चार आरोपियों में तीन किशोर (juveniles) शामिल हैं।

इस जघन्य अपराध की भयावहता का अंदाज़ा उस स्थिति से लगाया जा सकता है जिसमें पीड़िता का शव पाया गया था। पुलिस अधिकारियों ने जानकारी देते हुए बताया कि तेरह सितंबर को शव एक अत्यंत सड़ी-गली (decomposed) और पहचान में न आने वाली स्थिति (unidentifiable state) में पाया गया था। खुले मैदान में पड़े इस क्षत-विक्षत शव को लावारिस श्वानों ने अपना शिकार बना लिया था, जो इस पूरी त्रासदी को और भी अधिक दर्दनाक और अमानवीय बना देता है। जब शव की स्थिति इतनी खराब हो चुकी थी, तो पुलिस के लिए इस अंधी हत्या की गुत्थी को सुलझाना एक अत्यंत जटिल चुनौती बन गया था।

परंतु, आधुनिक तकनीकी और सूक्ष्म अन्वेषण कौशल की सहायता से जांचकर्ताओं ने इस मामले में सफलता प्राप्त की। इस क्रूर अपराध के साक्ष्यों को मिटाने के सभी प्रयासों के बावजूद, एक छोटी सी चूक ने अपराधियों को पकड़वा दिया। पुलिस जांचकर्ताओं के अनुसार, एक दूर लगे सीसीटीवी (CCTV) कैमरे की फुटेज और एक टेम्पो (मालवाहक वाहन) पर बने एक अजीब या विशेष चिह्न (peculiar symbol) ने जांचकर्ताओं को आरोपियों तक पहुंचने में सबसे अधिक मदद की। इस मालवाहक वाहन का उपयोग संभवतः पीड़िता के अपहरण या उसके शव को उस सुनसान जगह पर ठिकाने लगाने के लिए किया गया था।

इस मामले का सबसे चिंताजनक और समाज को डराने वाला पहलू तीन किशोरों की संलिप्तता है। जिन उम्र में बच्चों के हाथों में किताबें होनी चाहिए, उस उम्र में उनके भीतर इतनी भयानक विकृति और क्रूरता का पनपना हमारी सामाजिक और पारिवारिक व्यवस्था की एक बहुत बड़ी विफलता है। निर्भया कांड के बाद किशोर न्याय अधिनियम में किए गए संशोधनों के बावजूद, किशोरों द्वारा किए जाने वाले जघन्य अपराधों में कोई कमी नहीं आ रही है।

यह घटना राजधानी में कानून व्यवस्था की स्थिति और महिलाओं के लिए सुरक्षित माहौल की भारी कमी को एक बार फिर से रेखांकित करती है। स्थानीय निवासियों में इस घटना को लेकर भारी रोष और आक्रोश व्याप्त है। वे आरोपियों के लिए त्वरित न्याय और फांसी की सज़ा की मांग कर रहे हैं। प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि इस मामले की सुनवाई ‘फास्ट-ट्रैक’ अदालतों में हो और अपराधियों को उनके किए की ऐसी कठोरतम सज़ा मिले जो भविष्य में इस तरह की अमानवीय क्रूरता करने वालों के लिए एक कड़ा सबक बन सके।