भीषण बिजली संकट के बीच दक्षिणी राज्यों में हाहाकार, ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए कर्नाटक ने असम से मांगी सहायता

राज्य ‘एक राष्ट्र, एक ग्रिड, एक आवृत्ति’ प्रणाली के अंतर्गत प्रतिदिन एक सौ मेगावाट विद्युत कर रहा है प्राप्त; खपत में हुई भारी वृद्धि
राघवेंद्र प्रताप सिंह
बेंगलुरु : दक्षिण भारत के अधिकांश राज्यों में इस वर्ष मानसून की भारी विफलता और वर्षा के अभाव ने एक अत्यंत गंभीर और अभूतपूर्व ऊर्जा संकट को जन्म दे दिया है। जब संपूर्ण दक्षिणी क्षेत्र लगभग एक ही प्रकार की चुनौतीपूर्ण स्थिति का सामना कर रहा है, तब कर्नाटक राज्य ने अपनी बढ़ती विद्युत आवश्यकताओं को पूर्ण करने के लिए देश के पूर्वोत्तर राज्य असम की ओर रुख किया है। यह कदम भारत की एकीकृत और सुदृढ़ विद्युत प्रसारण प्रणाली की सार्थकता और राज्यों के मध्य आपसी सहयोग की भावना को अत्यंत स्पष्ट रूप से रेखांकित करता है।
कर्नाटक राज्य, जो देश के प्रमुख औद्योगिक और सूचना प्रौद्योगिकी केंद्रों का हृदय स्थल है, वहां निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। अठारह सितंबर, दो हज़ार छब्बीस को रश्मि पाटिल द्वारा प्रकाशित इस विश्लेषणात्मक रिपोर्ट के अनुसार, वर्षा न होने के कारण अधिकांश दक्षिण भारत सूखे जैसी स्थिति का सामना कर रहा है, जिसके परिणामस्वरूप कर्नाटक को असम से विद्युत आपूर्ति की व्यवस्था करनी पड़ी है। राज्य अब अपनी दैनिक आवश्यकताओं को संतुलित करने के लिए ‘एक राष्ट्र, एक ग्रिड, एक आवृत्ति’ (वन नेशन, वन ग्रिड, वन फ्रीक्वेंसी) नामक राष्ट्रीय प्रणाली के अंतर्गत प्रतिदिन एक सौ मेगावाट (100MW) विद्युत प्राप्त कर रहा है। एक सितंबर से ही यह विद्युत प्राप्ति की सुचारू व्यवस्था दैनिक आधार पर निरंतर रूप से संचालित की जा रही है।
यह ऊर्जा संकट मुख्य रूप से राज्य में विद्युत की खपत में हुई अप्रत्याशित और भारी वृद्धि के कारण उत्पन्न हुआ है। नवीनतम और आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, सत्रह सितंबर तक पूरे राज्य में विद्युत की कुल खपत बढ़कर तीन सौ उनतालीस दशमलव इक्यावन (339.51) मिलियन यूनिट तक पहुंच गई थी। स्थिति की गंभीरता का वास्तविक अनुमान इस तथ्य से लगाया जा सकता है कि पिछले वर्ष इसी अवधि के दौरान यह खपत मात्र दो सौ इक्यावन दशमलव अड़तालीस (251.48) मिलियन यूनिट ही दर्ज की गई थी।
खपत में हुई इस भारी वृद्धि के कई मुख्य कारण हैं। वर्षा की कमी के कारण कृषि क्षेत्र में सिंचाई के लिए विद्युत पंपों का निरंतर और अत्यधिक उपयोग किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, तापमान में असामान्य वृद्धि के कारण घरेलू और व्यावसायिक क्षेत्रों में भी वातानुकूलन उपकरणों का प्रयोग बहुत अधिक बढ़ गया है। वहीं दूसरी ओर, राज्य के प्रमुख जलविद्युत जलाशयों में जल स्तर अपने न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया है, जिससे स्थानीय विद्युत उत्पादन बुरी तरह से प्रभावित हुआ है।
ऐसे विषम और चुनौतीपूर्ण समय में ‘एक राष्ट्र, एक ग्रिड, एक आवृत्ति’ प्रणाली राज्य के लिए एक बहुत बड़े वरदान के रूप में सिद्ध हुई है। यह राष्ट्रीय ग्रिड देश के किसी भी हिस्से में उत्पन्न होने वाली अतिरिक्त बिजली को उस हिस्से तक निर्बाध रूप से पहुंचाने में सक्षम है जहां इसकी सबसे अधिक आवश्यकता होती है। असम, जहां इस समय विद्युत उत्पादन की स्थिति अपेक्षाकृत अनुकूल है, वहां से कर्नाटक तक ऊर्जा का यह हस्तांतरण भारत के संघीय ढांचे और राष्ट्रीय संसाधन प्रबंधन की एक अत्यंत सफल और सराहनीय मिसाल है। राज्य सरकार अब इस संकट से दीर्घकालिक रूप से निपटने के लिए सौर ऊर्जा और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों पर भी अपना ध्यान तीव्रता से केंद्रित कर रही है।