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बीमार यूपी से ‘सुपर-हेल्दी’ प्रदेश तक का महा-सफर! योगी सरकार के साढ़े नौ साल में स्वास्थ्य सेवाओं का हुआ ऐसा बंपर कायाकल्प, आंकड़े देखकर चौंक जाएंगे आप

विवेक ओझा

लखनऊ/उत्तर प्रदेश: एक वह भी खौफनाक दौर था जब उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था खुद ‘गहन चिकित्सा कक्ष’ (आईसीयू) में आखिरी सांसें गिनती हुई नजर आती थी। अस्पतालों में डॉक्टरों का भारी टोटा था, जीवन रक्षक मशीनों पर धूल फांकती थी और सुदूर गांव के मजबूर मरीजों को एक मामूली से इलाज के लिए भी बड़े शहरों की खाक छाननी पड़ती थी। लेकिन पिछले साढ़े नौ वर्षों में सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ के जादुई नेतृत्व में उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य ढांचे ने एक ऐसी ऐतिहासिक और अकल्पनीय छलांग लगाई है, जिसने पूरे देश के सामने सुशासन का एक नया और अचूक मॉडल पेश कर दिया है। शून्य से शिखर तक पहुंचने की इस महा-यात्रा में योगी सरकार ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का ऐसा अभूतपूर्व कायाकल्प किया है, जो किसी बड़े चमत्कार से कम नहीं है। अब गांवों से लेकर शहरों तक, यूपी की स्वास्थ्य व्यवस्था ‘रेफरल सेंटर’ (मरीजों को बाहर भेजने वाले अस्पताल) के ठप्पे से पूरी तरह मुक्त होकर विश्वस्तरीय इलाज का मुख्य केंद्र बन चुकी है।

विरासत की बदहाली से रिकॉर्ड तोड़ विकास तक की महा-छलांग
वर्ष दो हजार सत्रह से पहले उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य तंत्र की चरमराती हालत किसी से भी छिपी नहीं थी। जिला अस्पतालों की भारी कमी और ग्रामीण इलाकों में बुनियादी सुविधाओं के घोर अभाव ने आम आदमी का जीना मुहाल कर रखा था। लेकिन सत्ता में आते ही योगी सरकार ने इस गंभीर चुनौती को अवसर में बदलते हुए स्वास्थ्य क्षेत्र में अपने खजाने का मुंह पूरी तरह से खोल दिया। साढ़े नौ वर्षों के ऐतिहासिक कार्यकाल के आंकड़ों पर अगर बारीकी से नजर डालें तो विकास की यह तूफानी रफ्तार सचमुच हर किसी को हैरान कर देने वाली है।

जिला अस्पतालों की संख्या में जबरदस्त और ऐतिहासिक उछाल
किसी भी राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था की असली रीढ़ उसके जिला अस्पताल ही होते हैं। वर्ष दो हजार सत्रह में पूरे उत्तर प्रदेश में मात्र एक सौ नौ जिला स्तरीय राजकीय और विशिष्ट चिकित्सालय ही मौजूद थे। लेकिन योगी सरकार के निरंतर कड़े प्रयासों और ‘मिशन मोड’ वाली कार्यप्रणाली के कारण वर्ष दो हजार छब्बीस में इनकी संख्या एक सौ पंद्रह प्रतिशत की भारी-भरकम वृद्धि के साथ बढ़कर सीधे दो सौ चौंतीस तक पहुंच गई है। यह चमत्कारी आंकड़ा इस बात का सीधा प्रमाण है कि अब गंभीर से गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए मरीजों को राजधानी लखनऊ या दिल्ली की तरफ दौड़ नहीं लगानी पड़ती।

सीएचसी और पीएचसी का हुआ महा-विस्तार, गांव-गांव पहुंची संजीवनी
योगी सरकार का सबसे बड़ा फोकस हमेशा से इस बात पर रहा है कि ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले गरीब परिवारों और किसानों को उनके घर की चौखट के पास ही बेहतरीन इलाज मिल सके:

  • सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों का बिछा जाल: पिछले साढ़े नौ सालों में प्रदेश में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की संख्या आठ सौ इक्कीस से बढ़ाकर नौ सौ सतहत्तर कर दी गई है। यह सीधे तौर पर लगभग उन्नीस प्रतिशत का भारी विस्तार है, जिसने ग्रामीण स्वास्थ्य ढांचे को नई ताकत दी है।
  • प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की बढ़ी असीम ताकत: ग्रामीण प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की संख्या अट्ठाईस सौ ग्यारह से बढ़कर तीस सौ पैंतीस हो गई है। वहीं, शहरी क्षेत्रों में निर्धन और मध्यम वर्ग को त्वरित इलाज देने के लिए नगरीय प्राथमिक केंद्रों की संख्या में तैंतीस प्रतिशत का महा-उछाल आया है। यह संख्या पांच सौ बयालीस से बढ़कर सात सौ इक्कीस तक पहुंच चुकी है।
  • कुल प्राथमिक केंद्रों का बड़ा आंकड़ा: आज की तारीख में पूरे प्रदेश में कुल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की संख्या तैंतीस सौ तिरपन से बढ़कर सैंतीस सौ छप्पन के जादुई आंकड़े को पार कर चुकी है।

उपकेंद्रों और ‘आरोग्य मंदिरों’ की ऐतिहासिक व डिजिटल क्रांति
स्वास्थ्य सुविधाओं को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के दृढ़ संकल्प को पूरा करते हुए योगी सरकार ने स्वास्थ्य उपकेंद्रों के नेटवर्क में चालीस प्रतिशत का महा-इजाफा किया है। दो हजार सत्रह में जहां महज बीस हजार पांच सौ तिहत्तर उपकेंद्र थे, वहीं आज इनकी संख्या अट्ठाईस हजार आठ सौ पैंतालीस हो गई है। इसके साथ ही, प्रदेश भर में उनतीस हजार आठ सौ छियानबे ‘आयुष्मान आरोग्य मंदिर’ पूरी सफलता के साथ संचालित किए जा रहे हैं। चौदह सौ पच्चीस नए नगरीय आयुष्मान आरोग्य मंदिर भी इसी शानदार श्रृंखला का हिस्सा हैं। आज इन आरोग्य मंदिरों में टेली-मेडिसिन के जरिए दूर बैठे बड़े और विशेषज्ञ डॉक्टर गांव के मरीजों को मुफ्त सलाह और अचूक दवाइयां दे रहे हैं।

मशीनों और विशेषज्ञों की लंबी फौज: अब गांव में भी हाई-टेक इलाज
योगी सरकार का यह चौतरफा बदलाव केवल कंक्रीट की ऊंची इमारतों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि अस्पतालों के भीतर स्थापित की गई अत्याधुनिक सुविधाओं ने असली कायाकल्प किया है:

  • नर्सिंग और विशेषज्ञता का अकल्पनीय विस्तार: दो हजार सत्रह में सामुदायिक स्तर पर नर्सिंग कॉलेजों की संख्या शून्य थी, जो आज बढ़कर तिहत्तर हो गई है। प्रदेश के पांच सौ तैंतालीस केंद्रों पर बेहोशी (एनेस्थीसिया) क्लीनिक और संबंधित विशेषज्ञों की विशेष तैनाती की गई है।
  • आधुनिक जांच मशीनें और ऑक्सीजन की आत्मनिर्भरता: आपात स्थितियों से निपटने के लिए तीन सौ सत्तर केंद्रों में अत्याधुनिक डिजिटल एक्स-रे मशीनें स्थापित की गई हैं। अब ब्लॉक स्तर पर ही अल्ट्रासाउंड की हाई-टेक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसके अलावा, एक सौ नवासी नए ऑक्सीजन प्लांट और एक सौ इकसठ ब्लड स्टोरेज यूनिट्स चौबीसों घंटे पूरी तरह से क्रियाशील हैं, जिससे मरीजों को खून या ऑक्सीजन के लिए तड़पना नहीं पड़ता।

‘बीमारू’ राज्य से ‘आरोग्य’ प्रदेश बनने का स्वर्णिम युग
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साढ़े नौ साल के लौह-सुशासन ने उत्तर प्रदेश के माथे से ‘बीमारू राज्य’ का काला कलंक हमेशा-हमेशा के लिए धो डाला है। आधुनिक लैब और क्रिटिकल केयर सुविधाओं के निर्माण से आज उत्तर प्रदेश एक बेहद सुरक्षित, सक्षम और हाई-टेक स्वास्थ्य प्रणाली की दिशा में सरपट दौड़ रहा है। विकास की यह स्वास्थ्य क्रांति सिर्फ पन्नों पर दर्ज कागजी आंकड़े नहीं हैं, बल्कि यह उन करोड़ों बेबस माताओं, बुजुर्गों और मासूम बच्चों के चेहरों की लौटी हुई मुस्कान है, जिन्हें अब महंगे इलाज के अभाव में अपनी जान नहीं गंवानी पड़ती। योगी सरकार के यह साढ़े नौ साल यकीनन यूपी के स्वास्थ्य इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज किए जाएंगे।