एसआईआर विवाद ने लिया विकराल रूप: ममता बनर्जी का सबसे बड़ा राजनीतिक धमाका- ‘सीईसी ज्ञानेश कुमार को करो गिरफ्तार, बंगाल में हो दोबारा मतदान’

अभिषेक सिंह
देश के चुनाव आयोग (ईसीआई) में उठे एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) विवाद ने अब एक बहुत बड़े राजनीतिक महा-संग्राम का रूप ले लिया है। पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार पर अब तक का सबसे आक्रामक हमला बोलते हुए उनकी तुरंत गिरफ्तारी की मांग की है।
भारत की राजनीति और लोकतांत्रिक व्यवस्था इस वक्त एक अभूतपूर्व और भयंकर विवाद के केंद्र में खड़ी है। चुनाव आयोग के भीतर लिए गए कुछ बेहद अहम फैसलों और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर उठी असहमति की खबरों के बाद विपक्ष ने चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इस पूरे विवाद में सबसे बड़ा और मारक राजनीतिक धमाका पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख ममता बनर्जी ने किया है। उन्होंने सीधे तौर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर देश के लोकतांत्रिक ढांचे को कुचलने का संगीन आरोप लगाया है। ममता बनर्जी ने दहाड़ते हुए कहा है कि ज्ञानेश कुमार को तुरंत गिरफ्तार किया जाना चाहिए, क्योंकि उनके नेतृत्व में पूरी चुनावी प्रक्रिया के साथ समझौता किया गया है। उन्होंने चुनाव आयोग और सत्ताधारी दल भाजपा के बीच ‘जॉइंट वेंचर’ (साझेदारी) होने का बेहद गंभीर और विस्फोटक आरोप भी जड़ दिया है।
ममता बनर्जी का गुस्सा सिर्फ ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली तक ही सीमित नहीं रहा। उन्होंने 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों का सीधा हवाला देते हुए आरोप लगाया कि इस एसआईआर प्रक्रिया के जरिए राज्य की मतदाता सूची से लगभग 79 लाख मतदाताओं के नाम एक झटके में हटा दिए गए, जो कि राज्य की कुल मतदाता सूची का लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा है। उन्होंने दावा किया कि यह कोई सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं थी, बल्कि सत्ताधारी दल को विशेष लाभ पहुंचाने के लिए उठाया गया एक सुनियोजित और खौफनाक कदम था, जिसने लाखों मतदाताओं को उनके मूल अधिकार से वंचित कर दिया। ममता ने साफ और कड़े शब्दों में मांग की है कि पश्चिम बंगाल सहित उन सभी राज्यों में, जहां एसआईआर के बाद चुनाव हुए हैं, वहां तुरंत प्रभाव से दोबारा चुनाव (री-पोल) कराए जाने चाहिए और यह चुनाव पुरानी मतदाता सूची के आधार पर ही होने चाहिए।
विपक्ष के इस महा-आक्रमण के बाद देश का राजनीतिक पारा अपने चरम पर पहुंच गया है। ममता बनर्जी ने ऐलान किया है कि जब तक ज्ञानेश कुमार अपनी कुर्सी पर बैठे रहेंगे, तब तक पूरे देश में भयंकर विरोध प्रदर्शन होते रहेंगे। उन्होंने इंडिया ब्लॉक (विपक्षी गठबंधन) के नेताओं के साथ मिलकर चुनाव आयोग के खिलाफ एक बहुत बड़े देशव्यापी ‘विद्रोह’ का भी आह्वान कर दिया है। ममता का कहना है कि यह लड़ाई अब सिर्फ एक चुनाव की नहीं, बल्कि देश की आजादी और लोकतंत्र को बचाने की आखिरी लड़ाई है। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय और न्यायपालिका से भी इस मामले में दखल देने और आम जनता की आवाज सुनने की कड़ी अपील की है।
दूसरी तरफ, इस पूरे महा-बवाल पर चुनाव आयोग और सत्ता पक्ष ने भी पलटवार करते हुए अपना रुख बिल्कुल साफ कर दिया है। चुनाव आयोग ने अपनी ओर से स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा है कि एसआईआर से जुड़े सभी बड़े फैसले पूरी सर्वसम्मति से और तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी के बाद ही लिए गए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया कि अधिकारियों के बीच विचारों का आदान-प्रदान और तकनीकी टिप्पणियां होना एक बहुत ही सामान्य और लोकतांत्रिक प्रक्रिया है, इसे टकराव या मनमानी नहीं कहा जा सकता। वहीं, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने ममता बनर्जी के इन सभी आक्रामक आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि विपक्ष अपनी लगातार हो रही राजनीतिक हार को पचा नहीं पा रहा है। सत्ता पक्ष का आरोप है कि कांग्रेस और टीएमसी जैसे दल अपनी हार का ठीकरा हमेशा लोकतांत्रिक संस्थाओं और चुनाव आयोग पर फोड़ने की पुरानी आदत से मजबूर हैं। सत्ता और विपक्ष के बीच छिड़ी यह खौफनाक सियासी जंग अब देश की सड़कों से लेकर संसद और अदालतों तक एक बहुत बड़े संघर्ष का रूप लेने वाली है।