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भारत में 10 प्रतिशत से अधिक की आर्थिक विकास दर संभव, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गिनाए ‘विकसित भारत’ के मूल मंत्र

सरिता त्रिपाठी

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने देश की आर्थिक तरक्की को लेकर एक बेहद सकारात्मक और बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा है कि तकनीकी नवाचार और सही दिशा में प्रयास किए जाएं, तो भारत के लिए दस प्रतिशत से अधिक की विकास दर हासिल करना पूरी तरह से संभव है।

देश की अर्थव्यवस्था को लेकर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक बहुत बड़ा और सकारात्मक खाका खींचा है। चेन्नई में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी मद्रास) के पूर्व छात्रों के संगठन द्वारा आयोजित एक विशेष संवाद कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने यह अहम बयान दिया। उन्होंने पूरे आत्मविश्वास के साथ कहा कि भारत आने वाले समय में दस प्रतिशत से ज्यादा की आर्थिक विकास दर हासिल करने की पूरी क्षमता रखता है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस ऐतिहासिक लक्ष्य तक पहुंचने और ‘आत्मनिर्भर भारत’ तथा ‘विकसित भारत’ के सपने को साकार करने के लिए सभी क्षेत्रों में बहुत अधिक मेहनत और सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता होगी।

अपने संबोधन के दौरान वित्त मंत्री ने उन नकारात्मक सोच वाले लोगों पर भी तीखा प्रहार किया जो देश की विफलता में खुशी तलाशते हैं। उन्होंने देशवासियों से अपील की कि वे ऐसे निराशावादी विचारों से बाहर निकलें और सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाएं। अर्थव्यवस्था की इस महा-उड़ान में तकनीक और नए उद्यमों (स्टार्टअप्स) की भूमिका को सबसे अहम बताते हुए उन्होंने कहा कि साल दो हजार पंद्रह के बाद से देश में नए उद्यमों ने जो रफ्तार पकड़ी है, वह भविष्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ साबित होगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि तकनीक का तेजी से विस्तार हर क्षेत्र में होना चाहिए, क्योंकि यही वह सबसे बड़ा हथियार है जो उत्पादन को अनुकूल बनाकर विकास दर को दहाई के आंकड़े के पार ले जा सकता है।

कृषि क्षेत्र में तकनीकी क्रांति का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए वित्त मंत्री ने कई अहम उदाहरण पेश किए। उन्होंने बताया कि कैसे आधुनिक तकनीक किसानों को सीधे बाजारों से जोड़ने और उनकी पैदावार बढ़ाने में एक शानदार और चमत्कारिक बदलाव ला रही है। फसल की कटाई से लेकर खेती में ड्रोन और उपग्रह आधारित यंत्रों से जमीन की सटीक पैमाइश तक, हर जगह आधुनिक मशीनों का इस्तेमाल बढ़ रहा है। इतना ही नहीं, खाद वितरण में होने वाली चोरी और कालाबाजारी को रोकने के लिए ‘पॉइंट ऑफ सेल’ (बिक्री मशीन) का भी सफलतापूर्वक परीक्षण किया जा रहा है। मिट्टी और पानी को खराब होने से बचाने के लिए भी यह तकनीक किसानों को बताएगी कि उन्हें अपनी फसल के लिए कितनी खाद की आवश्यकता है। वित्त मंत्री का यह स्पष्ट संदेश है कि तकनीक का जितनी जल्दी और जितना अधिक इस्तेमाल होगा, भारत की अर्थव्यवस्था उतनी ही तेजी से वैश्विक महाशक्ति बनने की दिशा में आगे बढ़ेगी।