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मेरठ में अवैध निर्माण पर सर्वोच्च न्यायालय का ‘महा-तांडव’: 16 हजार से ज्यादा संपत्तियों को सील कर बुलडोजर चलाने का सख्त आदेश, अधिकारियों की भी उड़ी नींद

राघवेंद्र प्रताप सिंह

उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर में बेखौफ होकर पनपे अवैध निर्माणों और कॉलोनियों पर देश की सबसे बड़ी अदालत ने अपना सबसे भयंकर हंटर चला दिया है। सर्वोच्च न्यायालय ने 16,726 से ज्यादा संपत्तियों को तुरंत सील कर उन्हें जमींदोज करने का सख्त और अंतिम आदेश जारी किया है, जिससे पूरे इलाके में भयंकर खलबली मच गई है।

देश के सर्वोच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर में धड़ल्ले से चल रहे अवैध निर्माण और आवासीय संपत्तियों के व्यावसायिक इस्तेमाल पर अब तक का सबसे कड़ा और आक्रामक प्रहार किया है। न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने इस मामले में कड़ा संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन को खुली और खौफनाक चेतावनी दी है। न्यायालय ने उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद द्वारा सौंपी गई एक विस्तृत रिपोर्ट को देखने के बाद मेरठ के ‘जोन-ए’ में चिन्हित की गई 16,726 संपत्तियों को पूरी तरह से अवैध करार देते हुए उन्हें तुरंत खाली कराने और सील करने का आदेश दिया है। इन अवैध ढांचों में 12,907 पूरी तरह से आवासीय, 874 आवासीय और व्यावसायिक दोनों, तथा 2,945 सिर्फ व्यावसायिक निर्माण शामिल हैं। अदालत ने दहाड़ते हुए कहा कि प्रशासन को दिन-रात एक करके इन इमारतों को मलबे में तब्दील करना होगा, और अगर कोई जर्जर इमारत गिरती है और उसमें किसी निर्दोष की जान जाती है, तो इसके लिए सीधा सरकारी अधिकारी जिम्मेदार माना जाएगा।

इस महा-विनाशकारी कार्रवाई का केंद्र मेरठ के बाहरी इलाके उल्देपुर में रातों-रात पनपी अवैध कॉलोनियां हैं। पीठ ने रिपोर्ट पढ़ने के बाद गहरा क्षोभ और नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि उल्देपुर में सैकड़ों अवैध कॉलोनियां विकसित होना एक बेहद चौंकाने वाली और डरावनी स्थिति है। इस पूरे गोरखधंधे की जड़ों तक पहुंचने के लिए सर्वोच्च न्यायालय ने अपने ही एक पूर्व न्यायाधीश, न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की अध्यक्षता में एक शक्तिशाली न्यायिक आयोग का गठन कर दिया है। यह आयोग न केवल इन अवैध कॉलोनियों की जमीन की प्रकृति की जांच करेगा, बल्कि इस बात का भी बारीकी से पर्दाफाश करेगा कि पिछले पांच सालों से मेरठ विकास प्राधिकरण कुंभकर्णी नींद क्यों सो रहा था। आयोग यह भी पता लगाएगा कि क्या इन अवैध रिहायशी बस्तियों को बसाने में प्राधिकरण के अपने ही अधिकारियों की माफियाओं के साथ मिलीभगत थी, और जो भी इसमें दोषी पाया जाएगा, उसकी सीधी और खौफनाक पहचान की जाएगी।

अदालत ने अपनी पिछली सुनवाई में उल्देपुर में जिन 44 संपत्तियों को सील करवाया था, उनके मामले में भी कोई रहम नहीं दिखाया है। रिपोर्ट में बताया गया कि इनमें से 20 संपत्तियों को पहले ही ढहाया जा चुका है, लेकिन अदालत ने साफ और कड़े शब्दों में आदेश दिया है कि बाकी बची 24 संपत्तियों पर भी बिना किसी देरी के तुरंत बुलडोजर चलाकर उन्हें पूरी तरह से जमींदोज कर दिया जाए। न्यायालय ने यह भी पाया कि मेरठ को चार जोन में बांटा गया था, लेकिन अभी सिर्फ जोन-ए की ही भयावह तस्वीर सामने आई है। अदालत ने बाकी बचे तीन जोन (बी, सी और डी) की भी पूरी कुण्डली अगली सुनवाई तक पेश करने का कड़ा फरमान सुनाया है। अदालत का यह महा-आदेश इस बात का स्पष्ट और अटल सबूत है कि अब न्याय का हथौड़ा सिर्फ अपराधियों पर ही नहीं, बल्कि भ्रष्ट व्यवस्था और अवैध निर्माण की हर एक ईंट पर सबसे खौफनाक तरीके से गिरेगा। इस मामले की अगली सुनवाई अब दिसंबर में होगी, जब अदालत इस पूरी तबाही और कार्रवाई की अंतिम रिपोर्ट देखेगी।