कुश्ती महासंघ के पूर्व प्रमुख को बरी किए जाने के खिलाफ चार महिला पहलवानों ने दी चुनौती, अदालत ने जारी किया नोटिस

अभिषेक सिंह
महिला पहलवानों ने अगस्त में निचली अदालत द्वारा बृजभूषण शरण सिंह को यौन उत्पीड़न के मामले में बरी किए जाने के फैसले को गलत बताते हुए दिल्ली की विशेष अदालत का रुख किया है, जिसके बाद अदालत ने सभी आरोपियों को नोटिस जारी कर दिया है।
भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह की कानूनी मुश्किलें एक बार फिर बढ़ सकती हैं। यौन उत्पीड़न के मामले में उन्हें निचली अदालत (ट्रायल कोर्ट) से मिली राहत के खिलाफ अब चार महिला पहलवानों ने दिल्ली स्थित विशेष सत्र न्यायालय (सेशन कोर्ट) का दरवाजा खटखटाया है। महिला पहलवानों द्वारा दायर की गई इस नई अपील पर सुनवाई करते हुए राउज एवेन्यू स्थित विशेष अदालत ने बृजभूषण शरण सिंह और महासंघ के पूर्व सहायक सचिव विनोद तोमर को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। यह अपील इसी साल तीन अगस्त को आए उस आदेश के विरोध में की गई है, जिसमें मजिस्ट्रेट की अदालत ने पर्याप्त सबूतों के अभाव का हवाला देते हुए दोनों आरोपियों को सभी आरोपों से पूरी तरह बरी कर दिया था।
पीड़ित महिला पहलवानों की ओर से दाखिल की गई इस नई याचिका में निचली अदालत के फैसले को कानूनी रूप से त्रुटिपूर्ण और टिकने में अक्षम बताया गया है। अपील में यह गंभीर आरोप लगाया गया है कि निचली अदालत ने गवाहों और उपलब्ध सबूतों का चयनात्मक और गलत तरीके से मूल्यांकन किया था। गौरतलब है कि पुलिस के आरोप पत्र में महिला की गरिमा भंग करने, यौन उत्पीड़न और आपराधिक धमकी जैसी गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। लेकिन, तीन अगस्त को फैसला सुनाते हुए निचली अदालत ने कहा था कि अभियोजन पक्ष इन आरोपों को साबित करने में विफल रहा है। उस समय अदालत ने यह भी टिप्पणी की थी कि मामले में शिकायतकर्ताओं के बयानों में कई अंतर्विरोध थे और घटना के कई वर्षों बाद तक आरोपियों के साथ उनके संबंध सामान्य बने हुए थे, जिसके कारण मामला राजनीति से प्रेरित प्रतीत होता था।
इस पुराने फैसले से भारी असहमति जताते हुए अब चार महिला खिलाड़ियों ने अपनी कानूनी लड़ाई को न्यायिक प्रक्रिया के अगले चरण में पहुंचा दिया है। उनका स्पष्ट रूप से मानना है कि न्याय के लिए उनका संघर्ष अभी खत्म नहीं हुआ है। विशेष न्यायाधीश के समक्ष दायर इस अपील के बाद अदालत ने मामले की आगे की समीक्षा के लिए नोटिस की कानूनी प्रक्रिया पूरी कर ली है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जब इस मामले की अगली विस्तृत सुनवाई शुरू होगी, तो बचाव पक्ष इन नई आपत्तियों का किस प्रकार कानूनी जवाब देता है और सत्र न्यायालय पुरानी गवाहियों तथा पुलिस की जांच पर क्या नया रुख अपनाता है। महिला खिलाड़ियों का यह कदम खेल संस्थाओं में महिलाओं की सुरक्षा और उनके खिलाफ होने वाले अपराधों की निष्पक्ष जांच की मांग को एक बार फिर से चर्चा के केंद्र में ले आया है।