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‘जेम ग्रेनाइट्स’ के संस्थापक आर. वीरमणि की मुश्किलें बढ़ीं, यौन शोषण के आरोप में दूसरा ‘पॉक्सो’ मामला दर्ज

विवेक ओझा

चेन्नई पुलिस ने पचासी वर्षीय कारोबारी आर. वीरमणि के खिलाफ एक नाबालिग लड़की के कथित यौन शोषण के आरोप में पॉक्सो अधिनियम के तहत एक और ताजा मामला दर्ज किया है। इस पूरे मामले की गहन जांच अब एक विशेष जांच दल (एसआईटी) कर रहा है।

तमिलनाडु के प्रसिद्ध कारोबारी और ‘जेम ग्रेनाइट्स’ के संस्थापक आर. वीरमणि की कानूनी मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। चेन्नई पुलिस ने उनके खिलाफ यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के तहत एक दूसरा और नया मामला दर्ज किया है। यह ताजा मामला एक महिला द्वारा दी गई उस लिखित शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि कारोबारी ने उसकी नाबालिग बेटी का कथित रूप से यौन शोषण किया था। पचासी वर्षीय आर. वीरमणि पहले से ही इसी तरह के एक अन्य गंभीर पॉक्सो मामले में गिरफ्तार हैं और वर्तमान में चेन्नई की पुझल जेल में न्यायिक हिरासत में बंद हैं। इस नए और संवेदनशील मामले की जांच अब विशेष रूप से गठित एक विशेष जांच दल (एसआईटी) द्वारा की जा रही है।

जांच से जुड़े पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस नए मामले के सामने आने के बाद जांच का दायरा और भी बढ़ा दिया गया है। केंद्रीय अपराध शाखा (सीसीबी) अब उन अन्य महिलाओं के दावों और बयानों की भी गहनता से जांच कर रही है, जिन्होंने आरोप लगाया है कि अतीत में उनके साथ भी कारोबारी द्वारा यौन शोषण किया गया था। जांचकर्ताओं की टीम एक उस पुरानी शिकायत की भी विस्तृत पड़ताल कर रही है, जिसमें एक मां ने आरोप लगाया था कि वीरमणि द्वारा शोषित किए जाने के बाद उसकी बेटी ने अपनी जान दे दी थी। पीड़ित परिवार का दावा है कि उस समय स्थानीय पुलिस में शिकायत दर्ज कराने के बावजूद प्रशासन द्वारा कोई ठोस कानूनी कार्रवाई नहीं की गई थी। इन सभी पुराने मामलों को अब नए सिरे से जांच के दायरे में लाया गया है।

इस पूरे प्रकरण के सामने आने के बाद चेन्नई पुलिस ने एक सार्वजनिक अपील भी जारी की है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई अन्य पीड़िता या आम नागरिक इस मामले से जुड़ी कोई भी जानकारी या शिकायत साझा करना चाहता है, तो वे एक विशेष व्हाट्सएप नंबर पर संपर्क कर सकते हैं। शिकायतकर्ताओं की पहचान पूरी तरह से गुप्त रखने का आश्वासन दिया गया है। राज्य सरकार ने भी इस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए विशेष जांच दल में महिला अधिकारियों को प्रमुखता दी है ताकि पीड़ित महिलाएं बिना किसी डर के अपने बयान दर्ज करा सकें। अब सबकी निगाहें जांच दल की आगामी रिपोर्ट और अदालत में पेश किए जाने वाले सबूतों पर टिकी हैं, जो इस मामले की आगे की दिशा तय करेंगे।