उत्तर प्रदेश के पंद्रह लाख किसानों की प्रधानमंत्री सम्मान निधि पर संकट, जौनपुर समेत कई जिलों में रुक सकती है किश्त

अभिषेक सिंह
राज्य में पंद्रह लाख से अधिक किसानों का विवरण और भूमि रिकॉर्ड डिजिटल मंच पर अधूरा पाए जाने के कारण उनकी आगामी आर्थिक सहायता अटक सकती है। सरकार ने लंबित सत्यापन को जल्द पूरा करने के निर्देश दिए हैं।
उत्तर प्रदेश के लाखों किसानों के लिए एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है। राज्य के करीब पंद्रह लाख पैंतीस हजार किसानों की प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की आगामी किश्त पर भारी संकट मंडरा रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, इन लाभार्थियों का विवरण योजना के डिजिटल मंच पर या तो अधूरा है या उसमें कुछ बड़ी तकनीकी खामियां पाई गई हैं। विशेष रूप से जौनपुर और उसके आसपास के कई अन्य जिलों में ऐसे किसानों की संख्या काफी अधिक है, जिनके भूमि रिकॉर्ड, पहचान पत्र या बैंक खाते का अनिवार्य डिजिटल सत्यापन अभी तक पूरा नहीं हो सका है। सरकार द्वारा किसानों को हर साल दी जाने वाली छह हजार रुपये की इस आर्थिक सहायता का लाभ अब केवल उन्हीं को मिलेगा, जिनका पूरा विवरण और जमीन के कागजात योजना के मानकों के अनुसार पूरी तरह से सत्यापित और अद्यतन होंगे।
अधिकारियों के मुताबिक, इन पंद्रह लाख से अधिक मामलों में सबसे बड़ी समस्या भूमि के मालिकाना हक से जुड़ी है। करीब दस लाख से अधिक मामले ऐसे हैं जहां पुराने और नए भूमि स्वामी की पहचान स्पष्ट नहीं हो सकी है, और लगभग दो लाख पचहत्तर हजार मामलों में वरासत के अलावा किन्हीं अन्य कारणों से जमीन का हस्तांतरण दर्ज है। इसके अलावा, हजारों लाभार्थियों का डिजिटल पहचान सत्यापन और बैंक खाते को पहचान पत्र से जोड़ने का काम भी लंबित है। कुछ मामले ऐसे भी हैं जहां लाभार्थी के नाबालिग होने का संदेह जताते हुए जांच के आदेश दिए गए हैं। इन तमाम विसंगतियों के कारण ही केंद्र सरकार की ओर से इन किसानों का विवरण संदिग्ध मानते हुए इनकी किश्त को रोक दिया गया है। कृषि विभाग और स्थानीय प्रशासन के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती इन सभी लंबित प्रकरणों की जल्द से जल्द भौतिक और डिजिटल जांच पूरी करना है।
किसानों की इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार ने सभी संबंधित जिलाधिकारियों और राजस्व विभाग को सख्त निर्देश जारी किए हैं। प्रशासन द्वारा ग्रामीण स्तर पर पंचायत सहायकों और राजस्व विभाग की संयुक्त टीमों के माध्यम से विशेष अभियान चलाया जा रहा है ताकि किसानों के रुके हुए सत्यापन कार्य को तीस सितंबर तक हर हाल में पूरा किया जा सके। जौनपुर समेत अन्य प्रभावित जिलों के किसानों से यह अपील की गई है कि वे जल्द से जल्द अपने नजदीकी सुविधा केंद्र या कृषि विभाग के शिविरों में जाकर अपनी रुकी हुई प्रक्रिया पूरी करा लें। यदि तय समय सीमा के भीतर भूमि अभिलेखों का सत्यापन और डिजिटल पहचान अद्यतन का कार्य पूरा नहीं होता है, तो ऐसे सभी किसानों को आधिकारिक सूची से बाहर कर दिया जाएगा और उन्हें इस महत्वपूर्ण योजना के लाभ से वंचित होना पड़ सकता है।