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वायनाड बैंक डकैती मामला: 1988 की घटना में 76 वर्षीय अब्दुल समद को तेरह साल की जेल

अभिषेक सिंह

केरलम के कलपेट्टा स्थित अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने नल्लुरनाड सर्विस कोऑपरेटिव बैंक में हुई डकैती के मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कोल्लम निवासी एक बुजुर्ग को सजा और सोलह हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।

केरलम के वायनाड जिले में न्यायपालिका ने एक बेहद पुराने और गंभीर आपराधिक मामले में अपना अंतिम फैसला सुनाया है। कलपेट्टा स्थित अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय के न्यायाधीश एल जयवंत ने मंगलवार को एक ऐतिहासिक निर्णय देते हुए उन्नीस सौ अट्ठासी में हुई एक बैंक डकैती के मामले में सजा का ऐलान किया है। अदालत ने इस जघन्य अपराध में शामिल होने के आरोप में कोल्लम के रहने वाले छिहत्तर वर्षीय अब्दुल समद को मुख्य रूप से दोषी पाया है। इतने लंबे समय तक चली कानूनी प्रक्रिया और साक्ष्यों की गहन जांच के बाद न्यायालय ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि न्याय की पहुंच से बचा नहीं जा सकता।

यह पूरा मामला वायनाड के नल्लुरनाड सर्विस कोऑपरेटिव बैंक से जुड़ा हुआ है, जहां आज से लगभग अड़तीस साल पहले अपराधियों के एक गिरोह ने इस दुस्साहसिक डकैती को अंजाम दिया था। घटना के बाद पुलिस ने सघन जांच शुरू की थी और समय के साथ कई कानूनी बाधाओं के बावजूद अभियोजन पक्ष इस मामले को मजबूती से अदालत में साबित करने में सफल रहा। अदालत ने दोनों पक्षों की लंबी बहस और दशकों पुराने गवाहों व दस्तावेजों की बारीकी से समीक्षा करने के बाद आरोपी को इस वारदात का दोषी करार दिया। उम्र के इस पड़ाव पर अदालत द्वारा सुनाया गया यह फैसला न्याय प्रणाली की दृढ़ता को दर्शाता है।

अपराध की गंभीरता और सार्वजनिक संपत्ति को हुए नुकसान को ध्यान में रखते हुए न्यायाधीश ने दोषी अब्दुल समद को तेरह साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही न्यायालय ने उस पर सोलह हजार रुपये का आर्थिक जुर्माना भी लगाया है। बचाव पक्ष की ओर से दोषी की वृद्धावस्था और स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए सजा में नरमी बरतने की अपील की गई थी, लेकिन अदालत ने अपराध की प्रकृति को देखते हुए इसे खारिज कर दिया। सजा सुनाए जाने के बाद कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर दोषी को जेल भेज दिया गया है, जिससे दशकों पुराने इस सनसनीखेज मामले का अंततः कानूनी रूप से पटाक्षेप हो गया है।