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Firozabad : वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का टूंडला में हो ठहराव, रेलवे बोर्ड के सीईओ को भेजा पत्र

Tundla, Firozabad : वाराणसी से नई दिल्ली के बीच प्रस्तावित वंदे भारत स्लीपर ट्रेन के टूंडला रेलवे स्टेशन पर ठहराव की मांग तेज हो गई है। क्षेत्रीय रेल उपयोगकर्ता परामर्शदात्री समिति, उत्तर मध्य रेलवे के सदस्य श्रीकृष्ण गौतम ने रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) को पत्र भेजकर टूंडला स्टेशन पर ट्रेन का ठहराव स्वीकृत किए जाने की मांग की है।श्रीकृष्ण गौतम ने पत्र में कहा है कि टूंडला रेलवे स्टेशन आगरा, फिरोजाबाद, मथुरा, एटा समेत आसपास के कई जनपदों के यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण जंक्शन है। यहां से बड़ी संख्या में लोग प्रतिदिन विभिन्न शहरों के लिए रेल यात्रा करते हैं। उन्होंने बताया कि टूंडला रेलवे स्टेशन आगरा के प्रमुख रेल संपर्क केंद्रों में शामिल है। आईआरसीटीसी और क्रिस की आरक्षण व्यवस्था में भी आगरा और टूंडला जंक्शन को एक साथ क्लब किया गया है।व्यापार और उद्योग के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है टूंडलापत्र में कहा गया है कि टूंडला रेलवे स्टेशन धार्मिक, व्यापारिक और औद्योगिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। आगरा के चमड़ा उद्योग, फिरोजाबाद के कांच उद्योग तथा आसपास के क्षेत्रों के व्यापारी और कारोबारी नियमित रूप से दिल्ली, वाराणसी और अन्य प्रमुख शहरों की यात्रा करते हैं।इसके अलावा बड़ी संख्या में आम यात्री भी इन शहरों के बीच आवागमन करते हैं।श्रीकृष्ण गौतम ने कहा कि क्षेत्र की जनता लंबे समय से आधुनिक और तेज गति वाली रेल सेवाओं की मांग करती रही है। ऐसे में वाराणसी-नई दिल्ली के बीच प्रस्तावित वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का टूंडला में ठहराव होने से यात्रियों को काफी सुविधा मिल सकती है।लाखों यात्रियों को मिल सकता है लाभउन्होंने पत्र में कहा कि टूंडला स्टेशन पर ठहराव मिलने से आगरा, फिरोजाबाद, मथुरा, एटा और आसपास के क्षेत्रों के यात्रियों को दिल्ली और वाराणसी के लिए आधुनिक, सुविधाजनक और तेज रेल यात्रा का विकल्प मिलेगा। इससे व्यापारियों, उद्योगों से जुड़े लोगों और नियमित रेल यात्रियों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है।उन्होंने रेलवे बोर्ड से जनहित और क्षेत्रीय यात्रियों की मांग को ध्यान में रखते हुए वाराणसी-नई दिल्ली के बीच प्रस्तावित वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का टूंडला रेलवे स्टेशन पर ठहराव स्वीकृत करने का अनुरोध किया है। क्षेत्रीय रेल उपयोगकर्ता परामर्शदात्री समिति के सदस्य की ओर से उठाई गई इस मांग के बाद अब स्थानीय यात्रियों की निगाह रेलवे बोर्ड के निर्णय पर है।