एशियन गेम्स 2026: स्वर्णिम इतिहास रचते हुए भारतीय महिला हॉकी टीम ने चीन को हराया, 44 साल बाद जीता गोल्ड

अभिषेक सिंह
जापान के आईची नागोया में आयोजित एशियन गेम्स 2026 के खिताबी मुकाबले में भारत ने चीन को 1-0 से मात दी। लालरेम्सियामी के निर्णायक गोल और गोलकीपर सविता के बेहतरीन बचाव ने भारत को 44 साल बाद ऐतिहासिक स्वर्ण पदक दिलाया।
जापान के आईची नागोया में चल रहे एशियन गेम्स 2026 से भारत के लिए एक बेहद गौरवशाली और ऐतिहासिक खेल खबर सामने आई है। भारतीय महिला हॉकी टीम ने अपने शानदार और जुझारू प्रदर्शन के दम पर स्वर्णिम इतिहास रचते हुए देश के खाते में एक और गोल्ड मेडल (स्वर्ण पदक) डाल दिया है। बहुप्रतीक्षित खिताबी मुकाबले में भारतीय टीम ने कड़े संघर्ष के बाद चीन को 1-0 से हराकर यह ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। इस खिताबी जीत के साथ ही भारत ने 44 साल के लंबे सूखे को खत्म करते हुए एशियन गेम्स की महिला हॉकी स्पर्धा में सोना जीता है। इससे पहले के इतिहास पर नजर डालें तो भारत 1998 और 2018 के एशियन गेम्स में भी शानदार प्रदर्शन करते हुए फाइनल तक पहुंचा था। हालांकि, 1998 में दक्षिण कोरिया और 2018 में जापान से मिली हार के कारण भारतीय टीम को दोनों ही बार रजत पदक से संतोष करना पड़ा था। लेकिन इस बार सलीमा टेटे की कप्तानी वाली टीम ने कोई भी चूक नहीं की। फाइनल में पहुंचने से पहले, भारतीय टीम ने सेमीफाइनल में भी दमदार खेल दिखाते हुए साउथ कोरिया को 2-0 से मात देकर खिताबी मुकाबले में अपनी शानदार एंट्री की थी।
फाइनल मैच की शुरुआत से ही दोनों टीमों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली। मैच के शुरुआती 15 मिनट का खेल खत्म होने तक भारतीय महिला हॉकी टीम ने 1-0 की अहम बढ़त बना ली थी। हालांकि, इस पहले क्वार्टर में चीनी टीम का गेंद पर अधिक नियंत्रण रहा और उन्होंने भारतीय रक्षापंक्ति पर भारी दबाव बनाने की कोशिश की, लेकिन 10वें मिनट में लालरेम्सियामी ने पूरा पासा ही पलट दिया। साक्षी की ओर से आए एक बेहद सटीक पास को लालरेम्सियामी ने अपने नियंत्रण में लिया और एक जोरदार रिवर्स हिट के जरिए गेंद को सीधे नेट के ऊपरी हिस्से में पहुंचाकर भारत का खाता खोल दिया। पूरे मैच में भारत की ओर से किया गया यह इकलौता गोल ही निर्णायक साबित हुआ, क्योंकि इसके बाद पूरे मैच में कोई और गोल नहीं हो सका।
पहला क्वार्टर भारत के पक्ष में रहने के बाद, दूसरा क्वार्टर पूरी तरह से गोलरहित रहा। हाफ-टाइम तक भारत की 1-0 की बढ़त बरकरार रही। इस दौरान चीनी टीम को मैच में वापसी करने और स्कोर बराबर करने का एक सुनहरा मौका पेनल्टी स्ट्रोक के रूप में मिला था। लेकिन, भारतीय गोलकीपर सविता ने गोलपोस्ट के सामने एक मजबूत ‘दीवार’ की तरह खड़ी रहकर एक बेहतरीन बचाव किया और टीम पर आए इस बड़े संकट को पूरी तरह से टाल दिया। सविता के इस शानदार बचाव ने भारतीय खिलाड़ियों का उत्साह दोगुना कर दिया।
मुकाबले के तीसरे क्वार्टर में भी दोनों टीमों ने गोल करने के कई प्रयास किए, लेकिन किसी को भी सफलता हाथ नहीं लगी और यह क्वार्टर भी गोलरहित ही समाप्त हुआ। 45 मिनट के कड़े खेल के बाद भी स्कोरलाइन भारत के पक्ष में 1-0 ही रही। इस तीसरे क्वार्टर के आखिरी 2 मिनटों में भारतीय खिलाड़ियों ने बहुत ही शानदार खेल का प्रदर्शन किया। मैदान के एक छोर से दूसरे छोर तक तेज पासिंग के जरिए भारतीय टीम ने गेंद पर अपना मजबूत नियंत्रण बनाए रखा और चीनी खिलाड़ियों को हावी होने का कोई भी मौका नहीं दिया। इस तरह, भारतीय टीम ने अपने बेहतरीन तालमेल और रणनीति के दम पर यह मुकाबला जीतकर एशियन गेम्स में अपना दबदबा साबित कर दिया।