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भारत में टोलिंग व्यवस्था का नया युग: NHAI ने तमिलनाडु में शुरू किया देश का पहला ‘बैरियरलेस’ टोलिंग सिस्टम, बिना रुके फर्राटे से दौड़ेंगे वाहन

विवेक ओझा

चेन्नई/नई दिल्ली: भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने देश के हाईवे इंफ्रास्ट्रक्चर और यातायात प्रबंधन में एक क्रांतिकारी बदलाव की शुरुआत कर दी है। हाईवे पर यात्रा को अधिक सुगम, तेज़ और पूरी तरह से जाम-मुक्त बनाने के उद्देश्य से तमिलनाडु में देश का पहला ‘बैरियरलेस मल्टी-लेन फ्री फ्लो टोलिंग सिस्टम’ (Multi-Lane Free Flow – MLFF) आधिकारिक तौर पर लागू कर दिया गया है। यह नई तकनीक न केवल भारत के लिए एक तकनीकी छलांग है, बल्कि यह पारंपरिक टोल प्लाजा के स्वरूप को हमेशा के लिए बदल कर रख देगी, जहां वाहनों को रुकने की बिल्कुल भी आवश्यकता नहीं होगी।

अब तक, FASTag के लागू होने के बावजूद, वाहनों को टोल प्लाजा पर स्कैनिंग के लिए अपनी गति धीमी करनी पड़ती थी और बैरियर के उठने का इंतज़ार करना पड़ता था। पीक आवर्स या त्योहारों के समय, इस धीमी प्रक्रिया के कारण टोल प्लाजा पर वाहनों की लंबी-लंबी कतारें लग जाती थीं, जिससे यात्रियों का कीमती समय बर्बाद होता था और भारी मात्रा में ईंधन जलने से प्रदूषण भी बढ़ता था। NHAI की इस नई ‘बैरियरलेस’ (बिना अवरोध वाली) तकनीक ने इन सभी समस्याओं का एक स्थायी और आधुनिक समाधान पेश किया है।

इस अत्याधुनिक सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि टोल प्लाजा पर कोई भी भौतिक बैरियर (Boom Barrier) नहीं होगा। इसके बजाय, हाईवे के ऊपर विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए गैन्ट्री (Gantry) फ्रेम लगाए गए हैं, जिन पर हाई-टेक कैमरे, रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (RFID) रीडर और उन्नत सेंसर लगे हुए हैं। जैसे ही कोई वाहन 100 किलोमीटर प्रति घंटे या उससे अधिक की तेज़ गति से इस गैन्ट्री के नीचे से गुज़रेगा, ये शक्तिशाली कैमरे और सेंसर पलक झपकते ही वाहन के FASTag और उसकी हाई-सिक्योरिटी नंबर प्लेट (HSRP) को स्कैन कर लेंगे। स्कैनिंग के तुरंत बाद, सैटेलाइट और बैंकिंग नेटवर्क के माध्यम से टोल की सटीक राशि वाहन मालिक के लिंक किए गए खाते या वॉलेट से ऑटोमैटिक रूप से कट जाएगी।

यह पूरी प्रक्रिया इतनी तेज़ और निर्बाध होगी कि चालक को यह एहसास भी नहीं होगा कि उसने टोल पार कर लिया है। NHAI के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, इस सिस्टम के लागू होने से न सिर्फ यात्रियों के समय और लाखों लीटर ईंधन की बचत होगी, बल्कि टोल प्लाजा पर होने वाले हादसों और विवादों में भी भारी कमी आएगी। तमिलनाडु में इस पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद, सरकार जल्द ही इस ‘बैरियरलेस’ सिस्टम को दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे और देश के अन्य प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों पर भी चरणबद्ध तरीके से लागू करने की योजना बना रही है। यह ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (GNSS) आधारित टोलिंग की दिशा में भारत का पहला बड़ा कदम माना जा रहा है।