पेंशनभोगियों के सम्मान और अधिकारों की रक्षा: डॉ. जितेंद्र सिंह ने की 17वीं ‘पेंशन अदालत’ की अध्यक्षता, जटिल समस्याओं का ऑन-द-स्पॉट समाधान

सरिता त्रिपाठी
नई दिल्ली: केंद्र सरकार के सेवानिवृत्त कर्मचारियों और बुजुर्ग पेंशनभोगियों के जीवन को सुगम, सम्मानजनक और तनावमुक्त बनाने के संकल्प को दोहराते हुए कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय के तहत पेंशन एवं पेंशनभोगी कल्याण विभाग (DOPPW) द्वारा नई दिल्ली स्थित भारतीय लोक प्रशासन संस्थान (IIPA) में ’17वीं अखिल भारतीय पेंशन अदालत’ का भव्य आयोजन किया गया। केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस उच्च-स्तरीय अदालत की अध्यक्षता की और देश के विभिन्न हिस्सों से आए जटिल, विवादित और लंबे समय से अटके पेंशन मामलों का मौके पर ही पारदर्शी और स्थायी समाधान सुनिश्चित किया।
भारत जैसे विशाल प्रशासनिक तंत्र में सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन, ग्रेच्युटी, पारिवारिक पेंशन और चिकित्सा प्रतिपूर्ति के मामलों में कई बार तकनीकी बाधाओं, नियमों की जटिलताओं या अंतर-विभागीय समन्वय की कमी के चलते बुजुर्ग पेंशनरों को वर्षों तक कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ते थे। विशेष रूप से मृत कर्मचारियों की विधवाओं, दिव्यांग बच्चों और दूर-दराज के क्षेत्रों में रहने वाले बुजुर्गों के लिए यह प्रक्रिया अत्यंत पीड़ादायक हो जाती थी। केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई ‘पेंशन अदालत’ प्रणाली ने इस प्रशासनिक जड़ता को पूरी तरह तोड़ दिया है।
पेंशन अदालत की कार्यप्रणाली की सबसे बड़ी विशेषता इसका बहु-विभागीय मंच होना है। इस अदालत में संबंधित प्रशासनिक मंत्रालय, मुख्य लेखा परीक्षक, नियंत्रक महालेखाकार (CGA), बैंकों के नोडल अधिकारी और स्वयं पेंशनभोगी एक साथ आमने-सामने बैठते हैं। मामलों की सुनवाई खुली अदालत की तरह होती है, जहां नियमों की मानवीय और संवेदनशील व्याख्या करते हुए ऑन-द-स्पॉट आदेश जारी किए जाते हैं। 17वीं पेंशन अदालत के दौरान रक्षा, रेलवे, डाक, गृह और दूरसंचार जैसे प्रमुख मंत्रालयों के दर्जनों वर्षों पुराने पेचीदा मामलों को चंद घंटों के भीतर सुलझाया गया।
संबोधन के दौरान डॉ. जितेंद्र सिंह ने रेखांकित किया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार का दृष्टिकोण बुजुर्गों के प्रति केवल कागजी औपचारिकता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उनकी ‘ईज़ ऑफ लिविंग’ (Ease of Living) का मुख्य आधार है। उन्होंने विभाग द्वारा शुरू किए गए डिजिटल सुधारों, विशेषकर ‘भविष्य’ (Bhavishya) पोर्टल और आधार आधारित ‘फेस ऑथेंटिकेशन डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट’ (DLC) की सफलता का उल्लेख किया। इस तकनीक ने 80 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों को बैंक की कतारों में लगे बिना घर बैठे अपना जीवन प्रमाण पत्र जमा करने की सुविधा दी है। मंत्री महोदय ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि पेंशन मामलों में किसी भी प्रकार की अनुचित देरी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, क्योंकि जिन्होंने राष्ट्र सेवा में अपना जीवन समर्पित किया है, उनका सम्मान सर्वोच्च प्राथमिकता है।