भारत के परमाणु ऊर्जा मिशन की रीढ़: UCIL ने मनाई अपनी हीरक जयंती, छह दशकों की गौरवशाली यात्रा और आत्मनिर्भरता का संकल्प

विवेक ओझा
जादुगुड़ा/नई दिल्ली: भारत के असैन्य और रणनीतिक परमाणु कार्यक्रम को ईंधन की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने वाले सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम, यूरेनियम कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (UCIL) ने अपनी स्थापना के 60 वर्ष पूरे होने पर ‘हीरक जयंती’ (Diamond Jubilee) समारोह का भव्य आयोजन किया है। परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) के प्रशासनिक नियंत्रण में कार्यरत यूसीआईएल ने पिछले छह दशकों में भारत को यूरेनियम खनन और प्रसंस्करण के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में ऐतिहासिक और अतुलनीय योगदान दिया है।
वर्ष 1967 में झारखंड के जादुगुड़ा में स्थापित यूसीआईएल ने देश के पहले वाणिज्यिक यूरेनियम खनन केंद्र के रूप में अपनी यात्रा शुरू की थी। उस समय भारत के पास परमाणु खनिजों के दोहन के लिए न तो उन्नत तकनीक थी और न ही आधुनिक मशीनरी। यूसीआईएल के भूवैज्ञानिकों, इंजीनियरों और खनिकों ने स्वदेशी नवाचार के बल पर भूमिगत खनन की जटिल चुनौतियों को पार किया। आज यूसीआईएल झारखंड के सिंहभूम बेल्ट में जादुगुड़ा, भाटिन, नरवापहाड़, तुरामडीह, बागजाता, बंदुहुरांग और महालडंग जैसी कई अत्याधुनिक खदानों और प्रसंस्करण मिलों का सफल संचालन कर रहा है।
कंपनी की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक आंध्र प्रदेश के कडप्पा जिले में तुम्मलपल्ले यूरेनियम परियोजना का विकास है, जिसे दुनिया के सबसे बड़े यूरेनियम भंडारों में से एक माना जाता है। इस परियोजना में स्वदेशी रूप से विकसित ‘अल्कलाइन लीचिंग’ तकनीक का उपयोग करके कम ग्रेड के अयस्क से भी उच्च गुणवत्ता वाला यूरेनियम सफलतापूर्वक प्राप्त किया जा रहा है। इसके साथ ही कंपनी पर्यावरण संरक्षण, खदान श्रमिकों की सुरक्षा और रेडिएशन सुरक्षा के कड़े अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन सुनिश्चित करती है।
हीरक जयंती समारोह के अवसर पर परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष और यूसीआईएल के वरिष्ठ अधिकारियों ने कंपनी की तकनीकी प्रगति की सराहना की। उन्होंने दोहराया कि भारत के तेजी से बढ़ते स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों और ‘नेट ज़ीरो 2070’ के संकल्प को पूरा करने के लिए परमाणु ऊर्जा का विस्तार अनिवार्य है, और इस विस्तार की सफलता यूसीआईएल द्वारा सुरक्षित की जाने वाली यूरेनियम आपूर्ति पर ही टिकी है।