सिद्धेश लाड की कप्तानी में मुंबई का रणजी अभियान शुरू, नजरें 43वें खिताब पर
मुंबई की नजरें रणजी ट्रॉफी में एक बार फिर इतिहास रचने पर हैं। 42 बार की चैंपियन टीम रविवार को वानखेड़े स्टेडियम में चंडीगढ़ के खिलाफ मुकाबले से 2026-27 सत्र का आगाज करेगी। सिद्धेश लाड की कप्तानी और 19 वर्षीय आयुष म्हात्रे की उपकप्तानी में उतर रही मुंबई का लक्ष्य रिकॉर्ड 43वां रणजी ट्रॉफी खिताब हासिल करना है। टीम में अनुभव और युवा प्रतिभा का अच्छा संतुलन है।
मुंबई क्रिकेट संघ की ओर से वानखेड़े स्टेडियम में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कप्तान लाड और उपकप्तान म्हात्रे ने नए सत्र की तैयारियों, रणनीति और टीम की महत्वाकांक्षाओं पर चर्चा की। दोनों ने इस बात पर जोर दिया कि मुंबई की ऐतिहासिक विरासत जहां खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा है, वहीं उससे जुड़ी उम्मीदों का दबाव भी हमेशा बना रहता है।
लाड ने कहा कि मुंबई की जर्सी पहनने के साथ ही एक बड़ी जिम्मेदारी जुड़ जाती है। उन्होंने कहा, “मुंबई के समृद्ध इतिहास, हमारे द्वारा जीते गए 42 रणजी ट्रॉफी खिताब और इस टीम का प्रतिनिधित्व करने वाले खिलाड़ियों की विरासत को देखते हुए मुंबई की जर्सी पहनने पर हमेशा दबाव रहेगा। लेकिन एक टीम के तौर पर हम इस दबाव से भागने के बजाय इसे स्वीकार करना चाहते हैं। हम मुंबई का प्रतिनिधित्व करने के साथ आने वाले इतिहास और संस्कृति को समझते हैं और सत्र का इंतजार कर रहे हैं।”

वहीं, उपकप्तान की जिम्मेदारी मिलने को म्हात्रे ने अपने लिए गर्व का पल बताया। उन्होंने कहा, “मुंबई का उपकप्तान बनाया जाना मेरे लिए बड़ी जिम्मेदारी और बेहद गर्व का क्षण है, खासकर टीम के कद और मुंबई क्रिकेट के लिए रणजी ट्रॉफी के महत्व को देखते हुए। मुझे टीम से शानदार समर्थन मिला है और मैंने कभी महसूस नहीं किया कि युवा होने के कारण मेरे साथ अलग व्यवहार किया गया। सिद्धेश लाड ने मेरा काफी समर्थन किया है और हमेशा मुझे टीम में सहज महसूस कराया है।”
म्हात्रे ने अपने खेल में संयम को अहम बताते हुए महेंद्र सिंह धोनी से मिली सीख का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, “मैंने मैदान पर शांत रहने का महत्व भी सीखा है। हमने हमेशा देखा है कि महेंद्र सिंह धोनी शांत रहते हैं और उनसे मैंने सीखा है कि गुस्सा पांच मिनट तक रह सकता है, लेकिन गुस्से में लिए गए फैसले अक्सर गलत हो सकते हैं। जब आप शांत हो जाते हैं तो बेहतर सोच सकते हैं। मैंने इसी तरीके को अपनाने, मैदान पर संयमित रहने और अपने तथा टीम के लिए बेहतर फैसले लेने की कोशिश की है।”
मुंबई की 16 सदस्यीय टीम में अनुभवी खिलाड़ियों के साथ कई युवा चेहरों को भी जगह मिली है। यशस्वी जायसवाल, सरफराज खान और मुशीर खान जैसे खिलाड़ियों की मौजूदगी टीम की बल्लेबाजी को मजबूती देती है। ऐसे में मुंबई के पास अपने रिकॉर्ड को और मजबूत करने का सुनहरा मौका होगा।
कप्तान सिद्धेश लाड खुद घरेलू क्रिकेट में लंबा अनुभव रखते हैं। वह प्रथम श्रेणी क्रिकेट में 5,600 से अधिक रन बना चुके हैं। 2025-26 सत्र में भी उन्होंने मुंबई के मध्यक्रम में अहम भूमिका निभाई और मुश्किल परिस्थितियों में टीम को संभालने का काम किया।
दूसरी ओर, 19 वर्षीय आयुष म्हात्रे मुंबई के शीर्ष क्रम में अहम भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं। उन्होंने अब तक 13 प्रथम श्रेणी मैचों में 660 रन बनाए हैं। साल की शुरुआत में हैमस्ट्रिंग चोट के कारण मैदान से दूर रहने के बाद उन्होंने वापसी की है। ऐसे में नए सत्र में उनकी फिटनेस और बल्लेबाजी मुंबई के अभियान के लिए महत्वपूर्ण रहने वाली है।
मुंबई के लिए यह सिर्फ एक नए रणजी सत्र की शुरुआत नहीं, बल्कि अपनी गौरवशाली विरासत में एक और अध्याय जोड़ने का मौका है। 42 खिताब जीत चुकी टीम अब 43वें खिताब के लक्ष्य के साथ मैदान में उतरेगी।