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महिला-नेतृत्व वाले विकास की ओर एक और कदम: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 9 अक्टूबर को महिला एवं बाल विकास शिखर सम्मेलन को करेंगे संबोधित, पोषण और सुरक्षा पर होगा विशेष मंथन

अभिषेक सिंह | द इंडियन व्यू

नई दिल्ली: भारत में महिला सशक्तिकरण और बाल कल्याण की दिशा में एक नया अध्याय जोड़ते हुए, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 9 अक्टूबर 2026 को राजधानी नई दिल्ली में आयोजित होने वाले उच्च-स्तरीय ‘महिला एवं बाल विकास शिखर सम्मेलन’ के समापन सत्र को संबोधित करेंगे। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा आयोजित यह दो दिवसीय सम्मेलन देश भर के नीति-निर्माताओं, राज्य सरकारों के प्रतिनिधियों, गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) और जमीनी स्तर पर काम करने वाले लाखों आंगनवाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं के लिए एक प्रमुख वैचारिक मंच के रूप में कार्य कर रहा है। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य भारत के जनसांख्यिकीय लाभांश (Demographic Dividend) को सुरक्षित करने के लिए महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा और सुरक्षा के लिए एक अभेद्य ढांचा तैयार करना है।

इस शिखर सम्मेलन में जिन प्रमुख विषयों पर सबसे अधिक ध्यान केंद्रित किया जा रहा है, उनमें देश भर के लाखों आंगनवाड़ी केंद्रों का आधुनिकीकरण (सक्षम आंगनवाड़ी योजना) सबसे ऊपर है। सरकार का लक्ष्य इन केंद्रों को केवल पोषण वितरण केंद्रों तक सीमित न रखकर, उन्हें प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा (ECCE) के उत्कृष्ट केंद्रों में बदलना है। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के अनुरूप, आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों के मानसिक और संज्ञानात्मक विकास के लिए डिजिटल उपकरण, स्मार्ट क्लासरूम और खेल-आधारित शिक्षण पद्धतियों को शामिल करने पर विस्तृत कार्ययोजना प्रस्तुत की जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि जीवन के पहले छह वर्ष मस्तिष्क के विकास के लिए सबसे महत्वपूर्ण होते हैं, और इसी को ध्यान में रखते हुए यह ढांचागत सुधार किया जा रहा है।

सम्मेलन का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ ‘पोषण’ है। कुपोषण और एनीमिया (Anemia) को जड़ से खत्म करने के लिए ‘मिशन पोषण 2.0’ (Mission Poshan 2.0) के तहत नई रणनीतियों पर मंथन किया जा रहा है। इसमें श्रीअन्न (Millet) और स्थानीय रूप से उपलब्ध पौष्टिक आहार को बच्चों और गर्भवती महिलाओं की दैनिक डाइट में शामिल करने पर जोर दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री अपने संबोधन में तकनीक के उपयोग, जैसे ‘पोषण ट्रैकर’ ऐप के माध्यम से रियल-टाइम मॉनिटरिंग और जवाबदेही सुनिश्चित करने के फायदों पर प्रकाश डाल सकते हैं, जिसने कुपोषण के खिलाफ लड़ाई को एक पारदर्शी और डेटा-संचालित रूप दिया है।

इसके अलावा, संस्थागत ढांचों के माध्यम से महिलाओं की सुरक्षा और उनके आर्थिक सशक्तिकरण का विषय भी इस सम्मेलन के केंद्र में है। ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के पारित होने के बाद से राजनीतिक और सामाजिक परिदृश्य में आए बदलावों की पृष्ठभूमि में, ‘मिशन शक्ति’ (Mission Shakti) के दोनों उप-घटकों—संबल (सुरक्षा) और सामर्थ्य (सशक्तिकरण)—की समीक्षा की जाएगी। वन स्टॉप सेंटर (OSC), महिला हेल्पलाइन और वर्किंग वुमन हॉस्टल जैसी सुविधाओं के विस्तार पर नई घोषणाएं होने की उम्मीद है। यह सम्मेलन स्पष्ट करता है कि भारत का भविष्य ‘महिलाओं के विकास’ (Development of Women) से आगे बढ़कर अब ‘महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास’ (Women-Led Development) के विजन पर मजबूती से आगे बढ़ रहा है।