Trending

‘कबाड़ से जुगाड़’ और जनभागीदारी का अद्भुत संगम: वस्त्र मंत्रालय का देशव्यापी ‘स्वच्छता ही सेवा 2026’ अभियान सफलतापूर्वक संपन्न

राघवेंद्र प्रताप सिंह | द इंडियन व्यू

नई दिल्ली: ‘स्वच्छ भारत, स्वस्थ भारत’ के मंत्र को आत्मसात करते हुए केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय (Ministry of Textiles) और इसके अंतर्गत कार्यरत देश भर के विभिन्न बोर्डों, उपक्रमों और संगठनों ने पखवाड़े भर चले ‘स्वच्छता ही सेवा 2026’ अभियान का सफलतापूर्वक और भव्य रूप से समापन कर लिया है। 17 सितंबर से 2 अक्टूबर (महात्मा गांधी की जयंती) तक चले इस विशेष राष्ट्रव्यापी अभियान ने केवल कार्यालयों की साफ-सफाई तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, कचरा प्रबंधन, वृहद वृक्षारोपण और बुनकरों-कारीगरों के बीच स्वच्छता के प्रति गहरी जागरूकता पैदा करने के नए आयाम स्थापित किए।

वस्त्र उद्योग, जो भारत में कृषि के बाद रोजगार देने वाला दूसरा सबसे बड़ा क्षेत्र है, अपने उत्पादन प्रक्रिया में बड़ी मात्रा में कचरा (Textile Waste) पैदा करता है। इसलिए इस वर्ष वस्त्र मंत्रालय के अभियान का केंद्रीय विषय ‘सर्कुलर इकॉनमी’ (Circular Economy) और ‘रीसाइक्लिंग’ पर केंद्रित था। इस अभियान का सबसे बड़ा और लोकप्रिय आकर्षण ‘कबाड़ से जुगाड़’ (वेस्ट टू आर्ट) पहल रही। इसके तहत हथकरघा (Handloom) और हस्तशिल्प (Handicraft) समूहों, निफ्ट (NIFT) के छात्रों और मंत्रालय के कर्मचारियों ने बेकार पड़े कपड़ों, धागों, जूट के बोरों और कार्यालयी स्क्रैप का उपयोग करके बेहद खूबसूरत कलाकृतियां, उपयोगितावादी वस्तुएं (जैसे थैले, डोरमैट) और सजावटी सामान तैयार किए। इस पहल ने न केवल कचरे को कम किया बल्कि रचनात्मकता को भी नया मंच प्रदान किया।

पखवाड़े के दौरान, मंत्रालय के तहत आने वाले कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (CCI), जूट बोर्ड, सिल्क बोर्ड और नेशनल टेक्सटाइल कॉर्पोरेशन (NTC) के कार्यालय परिसरों, मिलों और आसपास के सार्वजनिक स्थानों पर बड़े पैमाने पर श्रमदान (Voluntary Labor) का आयोजन किया गया। वरिष्ठ अधिकारियों से लेकर ग्राउंड स्टाफ तक ने झाड़ू थामकर परिसरों को चमकाया। इसके अलावा, पर्यावरण संतुलन को बढ़ावा देने के लिए देश के विभिन्न हिस्सों में ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत हजारों फलदार और छायादार पौधे रोपे गए।

अभियान के समापन समारोह में मंत्रालय के सचिव ने विभिन्न पहलों की सफलता की सराहना करते हुए कहा कि स्वच्छता की यह आदत अब वस्त्र उद्योग के डीएनए में शामिल होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि पुराने रिकॉर्ड, अनुपयोगी फाइलों और ई-कचरे के वैज्ञानिक निपटान से मंत्रालय के कार्यालयों में भारी जगह खाली हुई है, जिससे कार्यकुशलता में सुधार आया है। इसके साथ ही, देश भर के बुनकर सेवा केंद्रों (WSC) में स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन किया गया, जहां कारीगरों को कार्यस्थल पर साफ-सफाई रखने और व्यावसायिक स्वास्थ्य खतरों से बचने के लिए प्रशिक्षित किया गया। वस्त्र मंत्रालय का यह समग्र प्रयास ‘स्वच्छता’ को एक सरकारी कार्यक्रम से आगे बढ़ाकर इसे एक वास्तविक जनांदोलन बनाने में पूरी तरह सफल रहा है।