नशे के खिलाफ हिमालय में शंखनाद: कुल्लू के अतिसंवेदनशील मलाना में केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (CBN) का विशेष ‘जन संवाद’, वैकल्पिक विकास पर जोर
अभिषेक सिंह | द इंडियन व्यू
कुल्लू (हिमाचल प्रदेश): देवभूमि हिमाचल प्रदेश को मादक पदार्थों के काले साये से मुक्त कराने और युवाओं को नशे के जाल से बचाने के लिए वित्त मंत्रालय के अधीन केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (Central Bureau of Narcotics – CBN) ने एक अत्यंत साहसिक और जमीनी पहल की है। कुल्लू जिले के दुर्गम और मादक पदार्थों की खेती के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कुख्यात मलाना (Malana) गांव में सीबीएन ने एक विशेष ‘जन संवाद’ (Community Outreach) कार्यक्रम का आयोजन किया। इस ऐतिहासिक पहल का मुख्य उद्देश्य स्थानीय ग्रामीणों को मादक पदार्थों के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना, भांग (Cannabis) की अवैध खेती को रोकना और क्षेत्र में रोजगार के वैकल्पिक व वैध साधनों को बढ़ावा देना है।
मलाना गांव लंबे समय से अपनी एक विशेष किस्म की हशीश (Hashish), जिसे ‘मलाना क्रीम’ कहा जाता है, के लिए दुनिया भर के ड्रग तस्करों और अंतरराष्ट्रीय कार्टेल की नजरों में रहा है। भौगोलिक दुर्गमता और विशिष्ट स्थानीय मान्यताओं के कारण यहां कानून प्रवर्तन एजेंसियों (Law Enforcement Agencies) का सीधा हस्तक्षेप हमेशा से चुनौतीपूर्ण रहा है। सीबीएन के अधिकारियों ने इस ‘जन संवाद’ के माध्यम से पारंपरिक दंडात्मक कार्रवाई से एक कदम आगे बढ़कर मनोवैज्ञानिक और सामाजिक सुधार का रास्ता चुना। गांव के पंचों, स्थानीय महिलाओं और युवाओं के साथ चौपाल लगाकर अधिकारियों ने नशे के कारण बर्बाद हो रही युवा पीढ़ी और इसके कानूनी व सामाजिक दुष्परिणामों पर गंभीर चर्चा की।
संवाद के दौरान सीबीएन के महानिदेशक और वरिष्ठ अधिकारियों ने ग्रामीणों को समझाया कि मादक पदार्थों की खेती से मिलने वाला अल्पकालिक आर्थिक लाभ उनके भविष्य और बच्चों के स्वास्थ्य के लिए एक जहर है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार की नशे के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ (Zero Tolerance) की नीति है, और मादक पदार्थों की तस्करी में संलिप्त पाए जाने पर एनडीपीएस (NDPS) एक्ट के तहत संपत्ति जब्ती और कठोर कारावास के कड़े प्रावधान हैं। इसके साथ ही, स्थानीय प्रशासन और कृषि विभाग के सहयोग से ग्रामीणों को सेब, चेरी, औषधीय पौधों की खेती और ईको-टूरिज्म (Eco-Tourism) जैसे सम्मानजनक और वैध आय के विकल्प अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।
इस ‘जन संवाद’ में महिलाओं की भागीदारी विशेष रूप से उत्साहजनक रही, जिन्होंने मादक पदार्थों के खतरे से अपने परिवारों को बचाने का संकल्प लिया। ब्यूरो ने नशा छोड़ने के इच्छुक युवाओं के लिए पुनर्वास (Rehabilitation) और कौशल विकास योजनाओं की भी जानकारी साझा की। कुल्लू पुलिस और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के समन्वय से चलाया जा रहा यह अभियान इस बात का प्रमाण है कि समस्या की जड़ पर प्रहार करने के लिए केवल कानूनी डंडा ही काफी नहीं है, बल्कि जनभागीदारी और लोगों का हृदय परिवर्तन भी उतना ही आवश्यक है। मलाना में गूंजा यह शंखनाद पूरे हिमालयी क्षेत्र में नशामुक्त समाज की स्थापना के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा।