नागालैंड को अपूरणीय क्षति: प्रख्यात नागा नेता श्री कुची रंगाउ जेलियांग के निधन पर प्रधानमंत्री ने जताया गहरा शोक, सांस्कृतिक योगदान को किया याद

राघवेंद्र प्रताप सिंह | द इंडियन व्यू
नई दिल्ली/कोहिमा: पूर्वोत्तर भारत और विशेष रूप से नागालैंड के सामाजिक-सांस्कृतिक परिदृश्य में एक गहरा शून्य पैदा हो गया है। नागालैंड के प्रख्यात नेता, समाज सुधारक और जनजातीय संस्कृति के प्रबल संरक्षक श्री कुची रंगाउ जेलियांग (Shri Kuchi Rengau Zeliang) का निधन हो गया है। उनके निधन पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने गहरा दुख व्यक्त किया है और नागा समाज तथा राष्ट्र निर्माण में उनके द्वारा दिए गए बहुमूल्य योगदान को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है।
प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) द्वारा जारी शोक संदेश में, पीएम मोदी ने श्री कुची रंगाउ जेलियांग के परिवार, उनके समर्थकों और जेलियांगरोंग (Zeliangrong) समुदाय के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं। प्रधानमंत्री ने ‘एक्स’ (X) पर पोस्ट करते हुए कहा, “श्री कुची रंगाउ जेलियांग जी के निधन से अत्यंत दुखी हूं। नागालैंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सहेजने, जनजातीय एकता को बढ़ावा देने और समाज के समग्र विकास में उनके द्वारा किए गए निस्वार्थ प्रयासों को आने वाली पीढ़ियां हमेशा याद रखेंगी। इस दुख की घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिजनों और प्रशंसकों के साथ हैं। ओम शांति।”
श्री कुची रंगाउ जेलियांग केवल एक स्थानीय नेता नहीं थे, बल्कि वे नागालैंड के स्वदेशी ज्ञान (Indigenous Knowledge) और पारंपरिक प्रथाओं के एक बड़े पैरोकार थे। वे विशेष रूप से जेलियांगरोंग समुदाय—जो असम, मणिपुर और नागालैंड में फैला हुआ एक प्रमुख नागा समूह है—के अधिकारों और उनके सांस्कृतिक संरक्षण के लिए आजीवन संघर्षरत रहे। उन्होंने पश्चिमी प्रभाव के बीच स्वदेशी नागा संस्कृति की जड़ों को मजबूत करने और युवाओं को अपनी विरासत से जोड़े रखने के लिए कई जमीनी अभियान चलाए थे।
नागालैंड के मुख्यमंत्री श्री नेफियू रियो (Neiphiu Rio) और राज्य के राज्यपाल ने भी उनके निधन को राज्य के लिए एक ‘अपूरणीय क्षति’ करार दिया है। मुख्यमंत्री ने अपने शोक संदेश में कहा कि श्री जेलियांग ने हमेशा शांति, सह-अस्तित्व और भाईचारे की वकालत की। पूर्वोत्तर में शांति प्रक्रिया और सामाजिक समरसता बनाए रखने में स्थानीय नेताओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है, और श्री जेलियांग इस दिशा में एक मजबूत स्तंभ थे।
प्रधानमंत्री मोदी का यह शोक संदेश पूर्वोत्तर के नेताओं और वहां की जनजातीय संस्कृति के प्रति केंद्र सरकार के गहरे सम्मान को परिलक्षित करता है। श्री जेलियांग का अंतिम संस्कार पूरे राजकीय और पारंपरिक नागा रीति-रिवाजों के साथ किया जाएगा, जहां राज्य भर से लोग उन्हें अंतिम विदाई देने पहुंच रहे हैं।