Trending

‘महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास’ का नया रोडमैप: प्रधानमंत्री मोदी ने महिला एवं बाल विकास शिखर सम्मेलन का किया समापन, पोषण और सुरक्षा पर की बड़ी घोषणाएं

विवेक ओझा | द इंडियन व्यू

नई दिल्ली: भारत के जनसांख्यिकीय लाभांश को सुरक्षित करने और आधी आबादी को देश के विकास का मुख्य इंजन बनाने के उद्देश्य से आयोजित ‘राष्ट्रीय महिला एवं बाल विकास शिखर सम्मेलन’ (National WCD Summit) का 9 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में अत्यंत सफल और गरिमामय समापन हुआ। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने इस उच्च-स्तरीय सम्मेलन के समापन सत्र की अध्यक्षता की और देश भर से आए नीति-निर्माताओं, राज्य सरकारों के प्रतिनिधियों और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए ‘विकसित भारत 2047’ (Viksit Bharat 2047) में महिलाओं की निर्णायक भूमिका का खाका पेश किया।

केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवी (Annapurna Devi) की उपस्थिति में आयोजित इस दो दिवसीय महामंथन में सरकार के तीन प्रमुख मिशनों—’मिशन पोषण 2.0′ (Mission Poshan 2.0), ‘मिशन शक्ति’ (Mission Shakti), और ‘मिशन वात्सल्य’ (Mission Vatsalya)—के जमीनी क्रियान्वयन की विस्तृत समीक्षा की गई। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि अमृत काल में भारत का लक्ष्य केवल ‘महिलाओं का विकास’ (Development of Women) नहीं है, बल्कि अब हम ‘महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास’ (Women-Led Development) के युग में प्रवेश कर चुके हैं, जहां महिलाएं नीति-निर्माण और अर्थव्यवस्था के हर क्षेत्र में अगुवाई कर रही हैं।

बच्चों में कुपोषण और महिलाओं में एनीमिया (रक्ताल्पता) को देश की सबसे बड़ी स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक बताते हुए, प्रधानमंत्री ने ‘सक्षम आंगनवाड़ी’ योजना की उपलब्धियों को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि कैसे ‘पोषण ट्रैकर’ (Poshan Tracker) ऐप जैसी डिजिटल पहलों ने देश भर के 13 लाख से अधिक आंगनवाड़ी केंद्रों को आधुनिक और पारदर्शी बना दिया है। आज करोड़ों बच्चों के स्वास्थ्य, उनके वजन और पोषण आहार की रियल-टाइम मॉनिटरिंग की जा रही है। प्रधानमंत्री ने श्रीअन्न (Millets) को बच्चों के दैनिक आहार का हिस्सा बनाने पर जोर दिया, क्योंकि यह न केवल सस्ता है बल्कि सूक्ष्म पोषक तत्वों (Micronutrients) का पावरहाउस भी है।

महिला सुरक्षा के मोर्चे पर प्रधानमंत्री ने कड़ा संदेश देते हुए कहा कि ‘मिशन शक्ति’ के तहत महिलाओं के खिलाफ किसी भी प्रकार की हिंसा पर सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति है। देश भर में बनाए जा रहे ‘वन स्टॉप सेंटर’ (One Stop Centres – OSC) और महिला हेल्पलाइनों के सुदृढ़ीकरण से संकट में फंसी महिलाओं को तत्काल कानूनी, चिकित्सा और मनोवैज्ञानिक सहायता मिल रही है। इसके साथ ही, वर्किंग वुमन हॉस्टल (कामकाजी महिला छात्रावास) और क्रेच (पालना घर) सुविधाओं के विस्तार पर भी नई कार्ययोजना प्रस्तुत की गई, ताकि अधिक से अधिक महिलाएं कार्यबल (Workforce) में शामिल हो सकें। यह शिखर सम्मेलन इस बात का स्पष्ट संकेत है कि भारत का भविष्य सशक्त माताओं और स्वस्थ बच्चों के कंधों पर ही टिका है।