हुनर और कौशल से दुनिया में भारत का डंका: प्रधानमंत्री मोदी ने वर्ल्डस्किल्स प्रतियोगिता के विजेताओं से किया संवाद, ‘स्किल इंडिया’ के विजन को मिली नई उड़ान
अभिषेक सिंह | द इंडियन व्यू
नई दिल्ली: भारत के युवाओं में छिपे अपार कौशल (Skill) और क्षमता को नई पहचान और सम्मान देते हुए, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने फ्रांस के लियोन (Lyon) में आयोजित ’48वीं वर्ल्डस्किल्स प्रतियोगिता’ (48th WorldSkills Competition) में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले ‘टीम इंडिया’ के होनहार प्रतिभागियों से अपने आवास पर विशेष संवाद किया। विश्व स्तर पर ‘कौशल के ओलंपिक’ (Olympics of Skills) के रूप में विख्यात इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में भारतीय युवाओं के शानदार प्रदर्शन ने यह साबित कर दिया है कि भारत अब केवल एक बड़ी आबादी वाला देश नहीं है, बल्कि यह दुनिया की ‘स्किल्ड कैपिटल’ (Skilled Capital of the World) बनने की राह पर तेजी से अग्रसर है।
संवाद के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने प्रतियोगिता में मेडल जीतने वाले और उत्कृष्टता पदक (Medallions for Excellence) प्राप्त करने वाले सभी प्रतिभागियों को व्यक्तिगत रूप से बधाई दी। केंद्रीय कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्री श्री जयंत चौधरी (Jayant Chaudhary) की उपस्थिति में आयोजित इस कार्यक्रम में, प्रधानमंत्री ने युवाओं से उनके अनुभव, उनकी कड़ी ट्रेनिंग और विदेशी धरती पर मिली चुनौतियों के बारे में विस्तार से चर्चा की। ‘टीम इंडिया’ के सदस्यों ने रोबोटिक्स, वेल्डिंग, हेयरड्रेसिंग, साइबर सुरक्षा, मेक्ट्रोनिक्स, और क्लाउड कंप्यूटिंग जैसे अत्यंत जटिल और आधुनिक ट्रेड्स में दुनिया के विकसित देशों (जैसे चीन, कोरिया और जर्मनी) के प्रतियोगियों को कड़ी टक्कर दी थी।
प्रधानमंत्री ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि उनके हाथ का हुनर और काम के प्रति उनका समर्पण ही नए ‘आत्मनिर्भर भारत’ (Aatmanirbhar Bharat) की सबसे बड़ी नींव है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारतीय समाज में पारंपरिक रूप से केवल किताबी शिक्षा (Academic Education) को ही महत्व दिया जाता था, लेकिन अब यह मानसिकता बदल रही है। ‘स्किल इंडिया मिशन’ (Skill India Mission) और नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के माध्यम से व्यावसायिक प्रशिक्षण (Vocational Training) को मुख्यधारा की शिक्षा के साथ जोड़ा जा रहा है।
प्रतिभागियों ने प्रधानमंत्री के साथ अपने संघर्ष की कहानियां साझा कीं कि कैसे टियर-2 और टियर-3 शहरों से निकलकर उन्होंने आईटीआई (ITIs) और नेशनल स्किल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट्स (NSTIs) में विश्वस्तरीय मशीनों पर अभ्यास किया। प्रधानमंत्री ने उन्हें आश्वस्त किया कि सरकार उनके इस कौशल का उपयोग देश के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मजबूत करने में करेगी। उन्होंने इन चैंपियनों से अपील की कि वे अपने-अपने संस्थानों में लौटकर अन्य युवाओं के लिए मेंटर (Mentor) की भूमिका निभाएं। यह संवाद न केवल इन युवा चैंपियनों के लिए जीवन भर का अविस्मरणीय अनुभव था, बल्कि यह देश के उन लाखों युवाओं के लिए एक बड़ा प्रेरणास्रोत है, जो अपने कौशल के दम पर दुनिया जीतना चाहते हैं।