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5G की सफलता के बाद 6G के नेतृत्व की तैयारी: तीसरे ‘अंतर्राष्ट्रीय भारत 6G सिम्पोजियम 2026’ में वैश्विक साझेदारी पर जोर, संचार मंत्रालय ने पेश किया भविष्य का विजन

विवेक ओझा | द इंडियन व्यू

नई दिल्ली: भारत अब संचार तकनीक के मामले में दुनिया का केवल उपभोक्ता (Consumer) नहीं, बल्कि एक प्रमुख आविष्कारक और वैश्विक मार्गदर्शक (Global Leader) बनने की राह पर मजबूती से चल पड़ा है। इसी दिशा में, संचार मंत्रालय के दूरसंचार विभाग (DoT) के तत्वावधान में 9 और 10 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में तीसरे ‘अंतर्राष्ट्रीय भारत 6G सिम्पोजियम 2026’ (3rd International Bharat 6G Symposium) का अत्यंत सफल आयोजन किया गया। इस सिम्पोजियम में ‘भारत 6G एलायंस’ (Bharat 6G Alliance) ने दुनिया भर के दूरसंचार विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं, वैश्विक टेक दिग्गजों और नीति-निर्माताओं के साथ मिलकर अगली पीढ़ी की वायरलेस तकनीक की रूपरेखा प्रस्तुत की।

भारत में 5G नेटवर्क के दुनिया के सबसे तेज रोलआउट के बाद, सरकार का पूरा ध्यान अब 6G तकनीक के स्वदेशी विकास और उसके वैश्विक मानकों (Global Standards) के निर्धारण में भारत की भूमिका सुनिश्चित करने पर केंद्रित है। इस सिम्पोजियम में अंतर्राष्ट्रीय दूरसंचार संघ (ITU), 3GPP और आईईईई (IEEE) जैसे वैश्विक मानकीकरण निकायों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। विचार-मंथन के दौरान 6G की अपार संभावनाओं पर चर्चा की गई—जिसमें टेराबाइट्स प्रति सेकंड (Tbps) की इंटरनेट स्पीड, होलोग्राफिक संचार (Holographic Communication), सटीक रिमोट सर्जरी (Remote Surgery), और ऑटोनॉमस (चालक रहित) वाहनों का निर्बाध संचालन शामिल है।

सिम्पोजियम को संबोधित करते हुए दूरसंचार मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ‘भारत 6G विजन डॉक्यूमेंट’ (Bharat 6G Vision Document) का उल्लेख किया। इस विजन के तहत भारत का लक्ष्य 2030 तक 6G सेवाओं को व्यावसायिक रूप से लॉन्च करना और इसके बौद्धिक संपदा अधिकारों (IPRs) तथा पेटेंट में भारत की हिस्सेदारी को 10 प्रतिशत से अधिक करना है। इस आयोजन में ‘भारत 6G एलायंस’ ने अमेरिका, जापान और यूरोपीय संघ के प्रमुख 6G अनुसंधान गठबंधनों के साथ कई महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर भी किए। ये समझौते क्वांटम कम्युनिकेशंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित नेटवर्क ऑप्टिमाइजेशन और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में संयुक्त अनुसंधान का मार्ग प्रशस्त करेंगे।

तकनीकी विशेषज्ञों ने जोर देकर कहा कि 6G केवल इंटरनेट स्पीड बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भौतिक (Physical), डिजिटल (Digital) और जैविक (Biological) दुनिया को आपस में मिलाने वाली एक महा-तकनीक होगी। भारत सरकार द्वारा दूरसंचार क्षेत्र में दी जा रही पीएलआई (PLI) योजना और ‘टेलीकॉम टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट फंड’ (TTDF) के जरिए भारतीय स्टार्टअप्स को 6G टेस्टबेड (Testbeds) विकसित करने के लिए करोड़ों रुपये की वित्तीय सहायता दी जा रही है। यह सिम्पोजियम इस बात की घोषणा है कि भारत अब वैश्विक तकनीकी क्रांति का इंतजार नहीं करेगा, बल्कि वह इस क्रांति का नेतृत्व करेगा।