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महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास’ की दिशा में सशक्त कदम: प्रधानमंत्री मोदी ने महिला एवं बाल विकास शिखर सम्मेलन के समापन सत्र की की अध्यक्षता, कुपोषण मुक्त भारत का लिया संकल्प

राघवेंद्र प्रताप सिंह | द इंडियन व्यू

नई दिल्ली: ‘विकसित भारत 2047’ के महासंकल्प को साकार करने में देश की मातृशक्ति और नौनिहालों की भूमिका को केंद्रीय मंच प्रदान करते हुए, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने नई दिल्ली में आयोजित ‘राष्ट्रीय महिला एवं बाल विकास (WCD) विभागीय शिखर सम्मेलन’ के समापन सत्र की गरिमामयी अध्यक्षता की। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा आयोजित इस अत्यंत महत्वपूर्ण शिखर सम्मेलन में देश भर से आए नीति-निर्माताओं, बाल अधिकार विशेषज्ञों, राज्य सरकारों के महिला कल्याण मंत्रियों और जमीनी स्तर पर काम करने वाली आंगनवाड़ी व आशा कार्यकर्ताओं के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि आज का नया भारत केवल ‘महिलाओं के विकास’ (Development of Women) तक सीमित नहीं है, बल्कि अब हम ‘महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास’ (Women-Led Development) के एक नए युग में प्रवेश कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि महिलाएं अब केवल सरकारी योजनाओं की लाभार्थी मात्र नहीं हैं, बल्कि वे नीति-निर्माण, उद्यमिता, विज्ञान, और रक्षा सहित अर्थव्यवस्था के हर क्षेत्र में राष्ट्र का नेतृत्व कर रही हैं। ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ का जिक्र करते हुए उन्होंने इसे राजनीतिक सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक और युगांतरकारी मील का पत्थर बताया।

सम्मेलन के दौरान महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के तीन प्रमुख राष्ट्रीय मिशनों—’मिशन पोषण 2.0′ (Mission Poshan 2.0), ‘मिशन शक्ति’ (Mission Shakti), और ‘मिशन वात्सल्य’ (Mission Vatsalya)—के जमीनी क्रियान्वयन और उनकी सफलताओं की विस्तृत समीक्षा की गई। प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से ‘सक्षम आंगनवाड़ी’ योजना की सराहना की। उन्होंने बताया कि कैसे ‘पोषण ट्रैकर’ (Poshan Tracker) जैसी उन्नत डिजिटल पहलों ने देश भर के लाखों आंगनवाड़ी केंद्रों की कार्यप्रणाली को पूरी तरह से पारदर्शी और डेटा-संचालित बना दिया है। आज करोड़ों बच्चों के स्वास्थ्य, उनके वजन (Stunting and Wasting) और उनके दैनिक पोषण आहार की रियल-टाइम मॉनिटरिंग की जा रही है, जिसने कुपोषण के खिलाफ लड़ाई को एक वैज्ञानिक दिशा दी है।

महिला सुरक्षा और आर्थिक स्वावलंबन के मोर्चे पर, प्रधानमंत्री ने ‘मिशन शक्ति’ के तहत देश भर में स्थापित किए जा रहे ‘वन स्टॉप सेंटर’ (One Stop Centres) और वर्किंग वुमन हॉस्टल्स (कामकाजी महिला छात्रावास) के विस्तार पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि महिलाओं के खिलाफ किसी भी प्रकार के अपराध पर सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ (Zero Tolerance) नीति है। इसके साथ ही, बच्चों को एक सुरक्षित और खुशहाल बचपन प्रदान करने के लिए ‘मिशन वात्सल्य’ के तहत बाल संरक्षण गृहों और किशोर न्याय बोर्डों को और अधिक संवेदनशील बनाने की रूपरेखा भी प्रस्तुत की गई। सम्मेलन का समापन इस स्पष्ट उद्घोष के साथ हुआ कि भारत का भविष्य सशक्त माताओं और स्वस्थ बच्चों के कंधों पर ही सुरक्षित है।