पंजाब के मानसा में नशे के खिलाफ अभियान चलाने वाले कार्यकर्ता की सरेआम गोली मारकर हत्या

मेडिकल स्टोर संचालक से नशीली दवाओं की बिक्री को लेकर हुई थी बहस, मोबाइल पर रिकॉर्डिंग के दौरान मारी गई गोली; विपक्ष ने कानून-व्यवस्था पर उठाए सवाल
अभिषेक सिंह | द इंडियन व्यू
मानसा (पंजाब)
पंजाब के मानसा जिले से एक अत्यंत ही स्तब्ध कर देने वाली और दर्दनाक घटना प्रकाश में आई है। राज्य में नशे के बढ़ते कारोबार और दवा की दुकानों (मेडिकल स्टोर) पर अवैध रूप से नशीली दवाओं की बिक्री को उजागर करने वाले एक प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई है। पुलिस द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, यह भयानक घटना मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 को मानसा जिले में घटित हुई। एक मेडिकल स्टोर के मालिक ने इस कार्यकर्ता को उस समय गोली मार दी जब वह नशीली दवाओं की बिक्री को लेकर उससे पूछताछ कर रहा था।
इस हत्याकांड का शिकार हुए सामाजिक कार्यकर्ता की पहचान परविंदर सिंह के रूप में हुई है, जिन्हें लोग ‘झोटा’ के उपनाम से भी जानते थे। परविंदर सिंह उर्फ झोटा उस समय एक मेडिकल स्टोर के मालिक से एक व्यक्ति को कुछ नशीली दवाएं बेचे जाने को लेकर सवाल कर रहे थे, जब उन पर यह जानलेवा हमला किया गया। इस पूरी घटना का सबसे खौफनाक पहलू यह है कि जब यह विवाद चल रहा था, तब परविंदर सिंह अपने मोबाइल फोन पर इस पूरी बहस को रिकॉर्ड कर रहे थे।
घटना के प्रत्यक्षदर्शियों और सोशल मीडिया पर मौजूद वीडियो के अनुसार, परविंदर सिंह अपने फेसबुक पेज पर करीब साढ़े पांच मिनट का लाइव वीडियो स्ट्रीम कर रहे थे। इसी सीधे प्रसारण के दौरान उनकी हत्या कर दी गई। वीडियो में स्पष्ट रूप से सुना जा सकता है कि परविंदर सिंह बता रहे हैं कि मेडिकल स्टोर संचालक ने अपनी पिस्तौल निकाल ली है। इसके कुछ ही सेकंड बाद आरोपी ने उन पर ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं। गोली लगने के बाद परविंदर को तुरंत मानसा के सिविल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन अस्पताल पहुँचने से पहले ही उन्होंने दम तोड़ दिया था।
मानसा सिविल अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी के अनुसार, परविंदर सिंह झोटा को तीन गोलियां लगी थीं। इनमें से दो गोलियां उनके पेट में और एक गोली उनकी जांघ में लगी थी। एक गोली उनके लिवर को पार कर गई थी, जिसके कारण अत्यधिक रक्तस्राव हुआ और उनकी दुखद मृत्यु हो गई। उनके साथ मौजूद उनके एक साथी को भी इस दौरान गोली लगने से मामूली चोटें आई हैं। घटना के तुरंत बाद आरोपी मेडिकल स्टोर संचालक, जिसकी पहचान अश्विनी कुमार के तौर पर हुई है, अपनी दुकान का शटर गिराकर मौके से फरार हो गया। मानसा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) वैभव चौधरी ने आश्वासन दिया है कि आरोपी को पकड़ने के लिए पुलिस की कई विशेष टीमों का गठन कर दिया गया है।
परविंदर सिंह झोटा मानसा और उसके आसपास के इलाकों में नशा विरोधी अभियानों का एक प्रमुख चेहरा थे। वे मेडिकल स्टोरों पर अवैध रूप से नशे की लत वाली दवाओं की बिक्री को उजागर करने के लिए जाने जाते थे। उनकी इस निर्मम हत्या ने पूरे पंजाब की राजनीति में भूचाल ला दिया है। राज्य में अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने हैं, ऐसे में नशे का मुद्दा और भी ज्यादा गरमा गया है। प्रमुख विपक्षी दलों, जिनमें कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल शामिल हैं, ने सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (आप) सरकार पर तीखा राजनीतिक प्रहार किया है।
शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल और वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने इस हत्याकांड की कड़ी निंदा करते हुए इसे राज्य में ‘जंगल राज’ का प्रमाण बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार नशे के कारोबारियों को रोकने में पूरी तरह विफल रही है और अब तो कैमरे के सामने सरेआम हत्याएं हो रही हैं। कांग्रेस नेता अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने भी इस हत्या को मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार की कानून-व्यवस्था बनाए रखने में पूर्ण विफलता करार दिया। उन्होंने कहा कि जो लोग नशे के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं, उन्हें सरकार की ओर से कोई सुरक्षा या समर्थन नहीं मिल रहा है।
इस घटना के बाद से मानसा के सिविल अस्पताल और इलाके में भारी संख्या में लोगों की भीड़ जमा हो गई है। पुलिस और प्रशासन स्थिति को नियंत्रित करने और लोगों के गुस्से को शांत करने का प्रयास कर रहे हैं। एक सामाजिक कार्यकर्ता की इस तरह से दिनदहाड़े और सरेआम हत्या ने प्रशासन के उन दावों पर गंभीर सवालिया निशान लगा दिया है, जिनमें राज्य को नशा मुक्त और अपराध मुक्त बनाने की बात कही जाती है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पुलिस कितनी जल्दी इस मामले के आरोपी को गिरफ्तार कर कानून के कटघरे में खड़ा करती है।