कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद भारत पहुंचीं, द्विपक्षीय संबंधों को नई मजबूती देने पर जोर

नई दिल्ली ( इंडियन व्यू डेस्क ) : भारत और कनाडा के संबंध लोकतंत्र, समान विचारधारा, आर्थिक और रणनीतिक हितों पर आधारित हैं। हालिया उच्च-स्तरीय वार्ताओं और वार्ताओं के बाद दोनों देशों के बीच संबंधों को नए सिरे से गति मिली है। इसी कड़ी में कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद भारत पहुंच गई हैं। उनके इस दौरे को दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संपर्क बढ़ाने और द्विपक्षीय संबंधों में बनी सकारात्मक रफ्तार को और मजबूत करने के महत्वपूर्ण अवसर के रूप में देखा जा रहा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए कहा कि जून 2025 के बाद यह अनीता आनंद की भारत की तीसरी यात्रा है। उन्होंने बताया कि यह दौरा भारत और कनाडा के बीच लगातार जारी उच्चस्तरीय संवाद तथा संबंधों में आई सकारात्मक गति को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।
द्विपक्षीय साझेदारी को मजबूत करने पर फोकस
जायसवाल के अनुसार, यात्रा के दौरान दोनों पक्ष हाल के दिनों में हुई प्रगति को आगे बढ़ाने और द्विपक्षीय साझेदारी को और अधिक मजबूत करने के उपायों पर विस्तार से विचार-विमर्श करेंगे। यह दौरा दोनों देशों के बीच संबंधों में निरंतरता और आपसी सहयोग की दिशा में एक और सकारात्मक कदम माना जा रहा है। आगामी बैठकों में आपसी हितों के मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।
आपको बता दें कि कनाडा की हिंद-प्रशांत नीति में भारत को एक प्रमुख और महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार माना गया है। दोनों देश हिंद प्रशांत क्षेत्र में नियम-आधारित व्यवस्था और संतुलन बनाए रखने के पक्ष में हैं। कनाडा भारत के नागरिक परमाणु ऊर्जा कार्यक्रमों के लिए यूरेनियम की आपूर्ति करता है। आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए दोनों देशों के बीच संयुक्त कार्य समूह और सुरक्षा समझौते भी मौजूद हैं।
भारत और कनाडा ने आने वाले समय में व्यापार को काफी बड़े स्तर पर बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। कनाडा इलेक्ट्रिक वाहनों, बैटरी और उच्च तकनीक के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals) तथा ग्रीन हाइड्रोजन/स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में भारत का प्रमुख साझेदार बन रहा है। कनाडा अपनी अमेरिकी बाजारों पर निर्भरता कम करने के लिए भारत के विशाल और तेजी से बढ़ते बाजार को प्राथमिकता देता है, जबकि भारत को कनाडा से तकनीक, कृषि (दालें/दलहन) और प्राकृतिक संसाधन प्राप्त होते हैं।
कनाडा में भारतीय मूल के लोगों (Indian Diaspora) की एक बहुत बड़ी और प्रभावशाली आबादी रहती है, जो दोनों देशों के बीच सेतु का काम करती है। कनाडा भारतीय छात्रों के लिए उच्च शिक्षा का एक प्रमुख केंद्र रहा है, जिससे दोनों देशों के विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों के बीच अकादमिक सहयोग मजबूत होता है। एआई (AI), सेमीकंडक्टर, क्वांटम टेक्नोलॉजी और अंतरिक्ष (ISRO और कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी) के क्षेत्र में दोनों देश मिलकर काम कर रहे हैं।