उत्तर प्रदेश में आयरन और उल्टी रोकने की दवा गुणवत्ता जांच में फेल, स्वास्थ्य विभाग ने दो दवा कंपनियों को किया ब्लैकलिस्ट

उत्तर प्रदेश के सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों के लिए सप्लाई की जाने वाली आयरन-फोलिक एसिड और उल्टी रोकने की दवाएं गुणवत्ता परीक्षण में विफल पाई गई हैं। उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाई कारपोरेशन (UPMSC) ने मानकों की अनदेखी करने वाली दो फार्मा कंपनियों को तीन साल के लिए काली सूची में डाल दिया है
विवेक ओझा
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मरीजों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वाली दवा कंपनियों के खिलाफ राज्य सरकार ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में आपूर्ति के लिए भेजी जाने वाली जरूरी दवाओं के नमूने (सैंपल) गुणवत्ता जांच में फेल हो गए हैं। इनमें बच्चों और महिलाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाने वाली आयरन-फोलिक एसिड टैबलेट और उल्टी रोकने की दवा के कई बैच शामिल हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाई कारपोरेशन ने नियमों का उल्लंघन करने वाली दो अलग-अलग दवा निर्माता कंपनियों को अगले तीन साल के लिए ब्लैक लिस्ट (काली सूची) कर दिया है। इसके साथ ही कंपनियों के सभी बकाया भुगतान रोकने और बाजार से बची हुई खेप वापस मंगाने के निर्देश भी जारी किए गए हैं।
प्राप्त विवरण के अनुसार, जिन दो फार्मा कंपनियों पर यह कड़ी कार्रवाई की गई है, उनमें राजस्थान की ‘बायोजेनेटिक ड्रग्स प्राइवेट लिमिटेड’ और उत्तराखंड की ‘मैक्सकेम फार्मास्यूटिकल्स प्राइवेट लिमिटेड’ शामिल हैं। कारपोरेशन द्वारा जारी आदेश में बताया गया है कि बायोजेनेटिक ड्रग्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा सप्लाई की गई आयरन-फोलिक एसिड (IFA) टैबलेट के कुल 10 बैच गुणवत्ता मानकों (Standards of Quality) पर पूरी तरह विफल साबित हुए। इन फेल हुए बैचों में बैच नंबर 410424-बीयूपी25, 150424-बीयूपी25, 370424-बीयूपी25, 320424-बीयूपी25, 360424-बीयूपी25, 420424-बीयूपी25, 450424-बीयूपी25, 490424-बीयूपी25, 480424-बीयूपी25 और 270424-बीयूपी25 शामिल हैं। इन दवाओं को जब मेडिकल वेयरहाउस में रखकर शुरुआती जांच के लिए भेजा गया था, तभी इनकी गुणवत्ता पर संदेह पैदा हुआ था।
दवाओं के मानकविहीन पाए जाने के बाद विभाग की ओर से इनकी दोबारा अन्य निर्धारित प्रयोगशालाओं में जांच कराई गई, लेकिन वहां भी इसके सभी 10 बैच फेल ही पाए गए। इसी प्रकार, उत्तराखंड की मैक्सकेम फार्मास्यूटिकल्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा सप्लाई की जाने वाली ‘ओन्डैनसेट्रॉन एचसीएल 4 एमजी’ (Ondansetron HCl 4mg Tablets) टैबलेट – जो मुख्य रूप से उल्टी और जी मिचलाने की समस्या को रोकने के लिए मरीजों को दी जाती है – उसके भी 4 प्रमुख बैच गुणवत्ता परीक्षण में खरे नहीं उतर सके। कारपोरेशन अधिकारियों के अनुसार इन दोनों कंपनियों को पहले भी नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन उनकी तरफ से कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण या जवाब नहीं दिया गया, जिसके बाद यह कठोर कार्रवाई की गई है।
राज्य के स्वास्थ्य विभाग और मेडिकल सप्लाई कारपोरेशन के इस कड़े कदम से दवा आपूर्ति करने वाली एजेंसियों में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि मरीजों के जीवन और स्वास्थ्य सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रदेशभर के सभी जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने यहां उपलब्ध इन दोनों कंपनियों के बचे हुए स्टॉक की जांच करें और यदि यह दवाएं स्टॉक में पाई जाती हैं, तो उनके वितरण पर तुरंत रोक लगाकर उन्हें तत्काल प्रभाव से मुख्य चिकित्सा कार्यालय या वेयरहाउस को वापस लौटा दें।