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ट्रंप ने रूसी तेल और गैस खरीद से हटाया टैरिफ, भारत के लिए क्या हैं इसके मायने?

विवेक ओझा

नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूसी तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर लगने वाले टैरिफ से छूट देने का बड़ा फैसला किया है। यह छूट ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ के तहत दी गई है, जिसके तहत रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले पांच प्रमुख देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रावधान था। इन पांच देशों में भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबेजान शामिल हैं।

फैसले का ब्यौरा
ट्रंप ने शुक्रवार शाम जारी एक कार्यकारी आदेश में राष्ट्रीय हित का हवाला देते हुए ग्राहम एक्ट के तहत लगाए जाने वाले प्रतिबंधों, पाबंदियों और शुल्कों से छूट का ऐलान किया। यह फैसला कानून के पूरी तरह प्रभावी होने से ठीक पहले लिया गया है, क्योंकि इसकी 30 दिनों की अंतिम समयसीमा 18 अक्टूबर को समाप्त हो रही थी। ट्रंप ने कांग्रेस को प्रमाणपत्र सौंपते हुए कहा कि यह छूट अमेरिका के राष्ट्रीय हित में है। हालांकि, उन्होंने भविष्य में जरूरत पड़ने पर इस कानून के तहत कार्रवाई करने का अधिकार अपने पास सुरक्षित रखा है।

भारत के लिए क्या हैं मायने?
रूस भारत के लिए कच्चे तेल का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बना हुआ है। ट्रंप के इस फैसले से भारत को बड़ी आर्थिक राहत मिली है, क्योंकि अगर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लागू हो जाते, तो अमेरिका को होने वाले भारतीय निर्यात पर भारी असर पड़ता, क्योंकि अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। साथ ही, प्रतिबंधों के कारण रूसी कच्चा तेल आर्थिक रूप से व्यवहार्य नहीं रह जाता, जिससे आपूर्ति संकट बढ़ सकता था।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह भारत के लिए फिलहाल राहत है, लेकिन यह स्थायी नहीं है। अमेरिका ने साफ कर दिया है कि वह भारत और अन्य देशों द्वारा रूसी तेल की खरीद की निगरानी करेगा और किसी भी ऐसे घटनाक्रम पर नजर रखेगा जो नए प्रतिबंधों को जरूरी बना सके। इसका मतलब है कि आगे भी अनिश्चितता बनी रह सकती है।

इस फैसले का भारत-अमेरिका संबंधों पर सकारात्मक असर पड़ने की उम्मीद है। 20 अक्टूबर को दोनों देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक निर्धारित है, जिसमें द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा होनी है। माना जा रहा है कि यह छूट उस बैठक के लिए एक सकारात्मक माहौल बनाएगी।

ट्रंप के रुख में बदलाव
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब ट्रंप रूस के प्रति नरम रुख अपना रहे हैं। हाल ही में उन्होंने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की की खुलकर आलोचना की थी और सुझाव दिया था कि यूक्रेन को नया नेतृत्व चुनना चाहिए। इसके अलावा, अमेरिका और रूस के बीच डीजल खरीद समझौता होने के बाद अन्य देशों पर दंड लगाना मुश्किल हो गया था।