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एशियन गेम्स : वेटलिफ्टिंग में भारत की चुनौती पेश करेगी मीराबाई चानू व बिंदियारानी


भारत को एशियन गेम्स के इतिहास में जिन खेलों में अभी तक गोल्ड मेडल नहीं मिला है उसमें वेटलिफ्टिंग भी है। एशियन गेम्स में वेटलिफ्टिंग की चुनौती भारतीय प्लेयर्स के लिए काफी कठिन होने वाली है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि ओंलपिक में सबसे अधिक मेडल लाने वाले टॉप चार देश एशिया के ही है।

वहीं इस खेल के 47 में 40 वर्ल्ड रिकॉर्ड एशियाई वेटलिफ्टर्स के नाम है। नॉर्थ कोरिया एक बार फिर एशियन गेम्स में वापसी करने वाला है जिससे चुनौती और ज्यादा मुश्किल होने वाली है।

भारत ने पिछले वर्ष हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में 13 मेडल अपने नाम किए थे, एशियन गेम्स में ऐसा करना आसान नहीं होगा। भारत के केवल दो वेटलिफ्टर्स इन खेलों में भाग लेंगे जिनपर करोड़ों फैन्स की उम्मीदों का भार होगा।

भारत ने अभी तक इस टूर्नामेंट में 15 मेडल हासिल किए है जिसमें पांच सिल्वर और नौ ब्रॉन्ज मेडल है। वह एशियन गेम्स में वेटलिफ्टिंग में 19वां सबसे सफल देश है।

भारत ने पिछली बार चार प्लेयर्स का दल एशियन गेम्स में भेजा था। सतीश शिवालिंगम, अजय सिंह, विकास ठाकुर के अलावा राखी हालदार ने जकार्ता में देश का प्रतिनिधित्व किया।

कोई भी खिलाड़ी पोडियम पर नहीं पहुंच पाया था। राखी हालदार अपने लिफ्ट नहीं कर पाई थी। भारत के प्रदर्शन से फैंस काफी निराश हुए थे।

भारतीय वेटलिफ्टिंग फेडरेशन ने हांगझू एशियन गेम्स के लिए पहले चार प्लेयर्स का दल चुना था, पिछले महीने पुरुष वेटलिफ्टर्स को सेलेक्शन की शर्तें पूरी न करने के कारण दल से बाहर कर दिया गया था।

इस बार केवल दो महिलाएं इस खेल में देश का प्रतिनिधित्व करेंगी। मीराबाई चानू 49 किलोग्राम और बिंदियारानी देवी 55 किलोग्राम में मेडल की दावेदारी पेश करेंगी।

मीराबाई चानू ओलंपिक मेडलिस्ट है। टोक्यो में उन्होंने सिल्वर मेडल अपने नाम किया था वहीं पिछले साल कॉमनवेल्थ गेम्स में वह गोल्ड मेडलिस्ट रहीं।

पिछले साल हुई वर्ल्ड चैंपियनशिप में उन्होंने सिल्वर मेडल अपने नाम किया था। मीराबाई पहली बार एशियन गेम्स में हिस्सा लेने वाली है जहां उनकी नजर गोल्ड पर होगी।

बिदियारानी की बात करें तो पिछले साल हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में उन्होंने सिल्वर मेडल जीता था। इसी टूर्नामेंट में उन्होंने क्लीन एंड जर्क में उन्होंने कॉमनवेल्थ रिकॉर्ड भी कायम किया था।