रणजी फाइनल Day 1 : शार्दुल के कमाल से मुंबई ने की वापसी
श्रेयस अय्यर और अजिंक्य रहाणे का रणजी ट्रॉफी में खराब प्रदर्शन जारी रहा, शार्दुल ठाकुर के हरफनमौला खेल से मुंबई रणजी ट्रॉफी फाइनल के शुरुआती दिन विदर्भ के खिलाफ खराब स्थिति से लौटने में कामयाब रहा।
शार्दुल ने 69 गेंद में आठ चौके और तीन छक्के से 75 रन की पारी खेली जिससे 111 रन पर छह विकेट गंवाने वाली मुंबई ने 224 रन बनाये। शार्दुल ने गेंद से कमाल करते हुए विदर्भ के ध्रुव शोरे को खाता खोले बगैर पगबाधा कर मुंबई को शानदार शुरुआत दिलायी।

दिन का खेल खत्म होने तक विदर्भ ने तीन विकेट पर 31 रन बनाये थे। टीम मुंबई से 193 रन पीछे है। स्टंप्स तक अथर्व तायडे 21 रन बनाकर क्रीज पर थे, रात्रि प्रहरी आदित्य ठाकरे उनका साथ दे रहे थे।
अपने प्रथम श्रेणी करियर का आखिरी मैच खेल रहे रहे तेज गेंदबाज ने धवल कुलकर्णी ने दिन के आखिरी सत्र में आउटस्विंग का शानदार इस्तेमाल करते हुए अमन मोखाडे (आठ) और अनुभवी करुण नायर (शून्य) को विकेटकीपर हार्दिक तामोरे के हाथों कैच कराकर मैच पर मुंबई का दबदबा बनाया।
मुंबई बिना विकेट गिरे 81 रन बना लिये थे, लंच के पहले और बाद के सत्र में टीम 111 रन के स्कोर तक छह विकेट गंवा दिये। रहाणे और अय्यर ने एक समान सात-सात रन बनाये। रहाणे के लिए यह सत्र काफी निराशाजनक रहा।
पिछले साल रणजी ट्रॉफी में शानदार प्रदर्शन के बाद वह भारतीय टीम में वापसी के लिए दरवाजा खटखटा रहे थे, इस साल घरेलू प्रतियोगिता में काफी लचर प्रदर्शन के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या मुंबई के चयनकर्ता अपने कप्तान को टीम में बरकरार रखते है या नहीं।
दिन के पहले सत्र में उमेश यादव (43 रन पर दो विकेट) की गेंदबाजी के खिलाफ मुंबई के सलामी बल्लेबाजों पृथ्वी साव (46) और भूपेन लालवानी (37) ने आसानी से रन बनाये। टेस्ट में 170 शिकार करने वाले इस गेंदबाज ने लंच के बाद के सत्र में शानदार वापसी की और अय्यर का अहम विकेट चटकाया।
पारी के 20वें ओवर में तेज गेंदबाज यश ठाकुर (54 रन पर तीन विकेट) ने लालवानी को आउट कर पहले विकेट के लिए 81 रन की साझेदारी को तोड़ा। कप्तान अक्षय वाखरे ने स्लिप में एक हाथ ने उनका शानदार कैच लपका।
दूसरे छोर से तेज गेंदबाजों और स्पिनरों के खिलाफ सहजता से रन बना रहे थे साव वामहस्त स्पिनर हर्ष दुबे (62 रन पर तीन विकेट) की गेंद पर बोल्ड होकर अर्धशतक से चूक गये।
अंडर-19 विश्व कप के बाद रणजी ट्रॉफी के नॉकआउट चरण में शानदार प्रदर्शन करने वाले मुशीर खान (छह रन) हर्ष की फिरकी पढ़ने में नाकाम रहे और पगबाधा हो गये। 30 रन के अंदर छह विकेट गंवाने वाली मुंबई के बल्लेबाज इस दौरान 18 ओवर तक एक भी चौका लगाने में सफल नहीं रहे।
शार्दुल के क्रीज पर आने के बाद मैच का रुख मुंबई की ओर मुड़ना शुरू हुआ। उन्होंने कुछ चौके लगाकर विदर्भ के गेंदबाजों पर दबाव बना दिया। एक छोर से वह तेजी से रन बना रहे थे तो वही दूसरे छोर से पुछल्ले बल्लेबाजों का विकेट गिर रहा था। वह आउट होने वाले आखिरी बल्लेबाज रहे।