सर डोनाल्ड ब्रैडमैन के बर्थडे पर जानें उनसे जुड़े किस्सों को
‘बल्ले का जादूगर’, ‘क्रिकेट की दुनिया का बॉस’, ‘द डॉन’…..सर डोनाल्ड ब्रैडमैन। ब्रैडमैन जो एक बल्लेबाज नहीं, क्रिकेट के इतिहास में एक ऐसे लीजेंड हैं, जिनकी महानता को मापने के लिए कोई पैमाना नहीं है।

शॉट्स ऐसे थे कि जो ब्रैडमैन की इच्छा का पालन करते थे। वह जहां चाहते थे, गेंद चुपचाप वहां चली जाती थी। 27 अगस्त 1908 जन्मे ब्रैडमैन ने खेल में असाधारण प्रदर्शन की सभी सीमाओं को पार किया था। जहां महान से महान बल्लेबाजों की औसत 55-60 के बीच सिमट जाती है, ब्रैडमैन का सौ का औसत कल्पनाओं के किसी छोर से परे है।
जब उन्होंने 1927 में न्यू साउथ वेल्स के लिए डेब्यू किया, तब तक ब्रैडमैन पहले ही उस असाधारण प्रतिभा की झलक दिखा चुके थे जो जल्द ही क्रिकेट की दुनिया को मोहित कर देने वाली थी।
1928 में ब्रिसबेन में इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट में डेब्यू किया था। उनकी शुरुआत साधारण थी, 18 और 1 के स्कोर के साथ, यह तूफान से पहले की शांति थी। 1930 की एशेज सीरीज में, उन्होंने पांच टेस्ट मैचों में 974 रन बनाकर खुद को विश्व मंच पर स्थापित किया।
ब्रैडमैन के करियर की अहम चुनौती 1932-33 की कुख्यात “बॉडीलाइन” सीरीज के दौरान आई थी। इस सीरीज में इंग्लैंड ने, ब्रैडमैन की रन बनाने की क्षमता को सीमित करने के प्रयास में, एक विवादास्पद रणनीति का सहारा लिया। जिसमें तेज गेंदबाजों ने बल्लेबाज के शरीर पर निशाना साधा और लेग साइड पर फील्डरों की एक घेराबंदी बनाई, गेंद के बल्ले के किनारे लगने पर कैच हो सके।
गेंदबाजों के इस उग्र हमले में ब्रैडमैन ने 56.57 की औसत से 396 रन बनाए थे। 56.57 की औसत आज भी किसी महान बल्लेबाज की सफलता को बयां करती है, ब्रैडमैन के मानकों के हिसाब से यह कम थी। “बॉडीलाइन” सीरीज के बाद की कुछ पारियों में ब्रैडमैन का खेल उतार-चढ़ाव के दौर से गुजरा, उन्होंने ऑस्ट्रेलिया को अगली एशेज ट्रॉफी जिताकर अपनी जीत की स्क्रिप्ट खुद लिखी थी।
उनके बल्ले के आगे गेंदबाजों का नतमस्तक होना जारी रहा और स्थिति यह थी कि 1948 में जब ब्रैडमैन अपना अंतिम टेस्ट खेलने जा रहे थे उनको 100 की औसत बरकरार रखने के लिए 4 रनों की जरुरत थी।
सर डोनाल्ड ब्रैडमैन 55 टेस्ट खेले और 6,996 रन बनाए। 29 सेंचुरी के साथ उनका टॉप स्कोर 334 रन रहा। ब्रैडमैन ने भारत के खिलाफ पांच मैच खेले, जिसमें 178 के औसत से 715 रन बनाकर चार शतक लगाए। इनमें एक दोहरा शतक है।
भारत के लिए एक और खास बात है। ब्रैडमैन सचिन तेंदुलकर का खेल काफी पसंद करते थे। सचिन को अपने खेल के करीब पाते थे। बोलते थे सचिन का खेल उनको अपने खेल के दिनों की याद दिलाता है।
ऐसी बात उन्होंने किसी और बल्लेबाज के लिए नहीं बोली थी। सचिन के खेल के दिनों में उनकी डोनाल्ड ब्रैडमैन से बहुत तुलना हुई थी। क्रिकेट के इस जादूगर ने 25 फरवरी 2001 को 92 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया था।